योग करना ठीक है या जिम जाना ?

क्या योग से मांसपेशियाँ बनने में मदद मिलती है? आप अगर वजन उठाने के व्यायाम पर हर दिन घंटों बिताते हैं तो आप विश्वास नहीं करेंगे कि ऐसा योग से भी हो सकता है। यहाँ सद्गुरु योग बनाम व्यायामशाला यानि जिम के चिर-परिचित विवाद पर अपना पक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
योग करना ठीक है या जिम जाना ?
 

सदगुरु: मनुष्य के शरीर में मांसपेशियों की व्यवस्था एक अद्भुत चीज़ है। हमारी मांसपेशियाँ विलक्षण काम कर सकती हैं और, उन्हें ज्यादा मजबूत बना कर उनकी क्षमता को बढ़ाया भी जा सकता है, और साथ ही उन्हें बहुत लचीला भी बनाया जा सकता है। यदि आप वजन उठाने का व्यायाम बहुत करते हैं तो आप की मांसपेशियाँ बड़ी दिखेंगी पर उनमें लचीलापन नहीं होगा। अपनी मांसपेशियों को बड़ा कर लेने वाले लोगों को अगर आप देखें तो वे सही ढंग से नमस्कार भी नहीं कर सकते। वे झुक भी नहीं सकते।

अपनी मांसपेशियों को बड़ा कर लेने वाले लोगों को अगर आप देखें तो वे सही ढंग से नमस्कार भी नहीं कर सकते।

अगर आप को बड़ी मांसपेशियाँ ही चाहियें जिससे आप अच्छे दिखें, तो इसके लिये आज बहुत से आसान तरीके हैं। आप बाइसेप्स इम्प्लांट्स करा सकते हैं। सिलिकॉन केवल वक्ष बड़े करने में ही नहीं लगता - ये बाहों की पेशियों में, पिंडलियों की पेशियों में भी, सब जगह लग सकता है, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ये बिल्कुल बेकार की चीज़ है। आप को कोई कठिन परिश्रम नहीं करना, बस कार्टिसोन्स और हार्मोन्स की खुराकें लीजिये और वजन उठाते रहिये। ये सब बहुत आसान तरीके हैं और सिर्फ अच्छा दिखने के लिये हैं।

जी हाँ, शरीर को मजबूत बनाने से आप को शक्ति मिलती है। पर आप वही मजबूती, वही शक्ति एक बिल्कुल अलग ढंग से भी पा सकते हैं, और उससे ज्यादा बड़ी बात - आप अपने शरीर को लचीला रख सकते हैं, जो बहुत महत्वपूर्ण है। खुशहाली के कई पहलू हैं जिसमें अच्छा स्वास्थ्य, ऊर्जा, मन का आनंद एवं आध्यात्मिक आयाम हैं। जब हम सुबह में 30 मिनिट से 1 घंटे तक का समय लगाते हैं तो हम ये देखना चाहते हैं कि हमारे सारे शरीर को इसका लाभ मिले, सिर्फ मांसपेशियों को ही नहीं।

आप अगर अपनी मांसपेशियाँ बनाना चाहते हैं तो क्या आप को लोहे का वजन उठाने का व्यायाम नहीं करना चाहिये? आप ये कर सकते हैं क्योंकि आधुनिक तकनीकों ने हमारे जीवन को शारीरिक व्यायाम और गतिविधियों से दूर ही कर दिया है। आजकल हर काम मशीनों से होता है। अपना आई फोन छोड़ कर अब आप को कुछ भी ले कर घूमने की ज़रूरत नहीं है। तो चूंकि आप अपने अंगों का उपयोग सारा दिन करते ही नहीं हैं, अतः जिम में हल्का भारोत्तोलन प्रशिक्षण ठीक है।

योग : ये व्यायाम नहीं है

योग कोई व्यायाम का प्रकार नहीं है, इसके अन्य कई आयाम हैं। योग को सिर्फ एक व्यायाम प्रक्रिया बना देना एक गंभीर अपराध होगा। पर एक चीज़ है - उप -योग, जिसका अर्थ है हल्का व्यायाम या उपयोगी प्रक्रियायें, जिनमें आध्यात्मिक आयाम जुड़ा हुआ नहीं है। आप अगर उप-योग अथवा अंग मर्दन योग करते हैं तो ये पक्का हो जायेगा कि आप चुस्त दुरुस्त रहेंगे। और आप को किन्हीं उपकरणों की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी। आप को कुछ चाहिए तो वह है - फर्श पर केवल 6×6 फुट की जगह। आप एकदम चुस्त दुरुस्त रहेंगे, और आप की मांसपेशियाँ भी बनेंगीं। अंगमर्दन और उप-योग में आप के शरीर के भार का ही उपयोग सब व्यायाम करने में होता है। तब आप को यह बहाना भी नहीं मिलेगा कि आप के पास कोई जिम नहीं है। आप कहीं पर भी ये व्यायाम कर सकते हैं, क्योंकि आप का शरीर आप के साथ ही है। शरीर को सुदृढ़ बनाने का ये उतना ही प्रभावशाली तरीका है जितना जिम में वजन उठाना। इससे आप समझदार मनुष्य दिखेंगे और अपनी शारीरिक व्यवस्था पर कोई अतिरिक्त दबाव डाले बिना ही आप काफी मजबूत हो जायेंगे। सिर्फ एक बात है कि आप इकट्ठी की हुई मांसपेशियों वाले नहीं दिखेंगे। बहुत सारे लोग उस तरह के, सिर्फ मांसपेशियों वाले, हो गये हैं। उन्हें लगता है कि वे चुस्त दुरुस्त हैं पर मुझे लगता है कि वे सब जैसे कोई एक साँचे में ढले हैं। आप की मांसपेशियों की मजबूती और उनका भरा हुआ उठाव ही महत्वपूर्ण नहीं है पर आप के शरीर का लचीलापन आप की व्यवस्था ठीक से चलाने के लिये ज्यादा महत्वपूर्ण है।

आप ने जिन चीज़ों के बारे में सोचा भी नहीं था, वे आप के लिये जीवित वास्तविकतायें बन जाती हैं, बस इसलिये कि भौतिक से परे का कोई आयाम जीवित हो जाता है।

योग में हम सिर्फ मांसपेशियों की मजबूती की ओर ही नहीं देखते। शरीर के हर अंग का स्वस्थ होना भी महत्वपूर्ण है। यौगिक व्यवस्था इसीलिये विकसित हुयी है कि शरीर के सभी अंगों के स्वास्थ्य की देखभाल की जाये। यदि आप की मांसपेशियाँ बहुत सुदृढ़ हैं पर आप का लिवर सही ढंग से काम नहीं कर रहा, तो उन मांसपेशियों का क्या लाभ? यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि शरीर लचीला हो और उपयोगी हो। अंगों का आरामदायक स्थिति में होना भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है। एक पहलू यह भी है कि शरीर के अधिकतर महत्वपूर्ण अंग छाती और पेट के हिस्से में होते हैं। ये अंग न तो कठोर हैं, न ही नट-बोल्ट द्वारा जोड़े हुए हैं। वे ढीले-ढाले हैं, जालों में लटके हुए हैं। सिर्फ जब आप अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी कर के बैठते हैं, तभी ये अंग सबसे ज्यादा आराम में होते हैं। परंतु, आजकल आराम का आधुनिक विचार ये है कि आप पीछे की ओर झुके हुए हों। पर जब आप ऐसे झुके हुए होते हैं, तो आप के अंग कभी भी आराम में नहीं हो सकते, उन्हें जैसे काम करना चाहिये, वे वैसा नहीं कर पायेंगे।

शरीर को सीधा रखना ज़रूरी है, इसलिये नहीं कि हमें आराम पसंद नहीं है पर इसलिये कि हम आराम को बिल्कुल अलग ढंग से समझते और अनुभव करते हैं। आप अपनी मांसपेशियों को इस बात की ट्रेनिंग दे सकते हैं कि रीढ़ की हड्डी सीधी कर के बैठने पर भी वे आराम में रहें, पर आप अपने अंगों को इस बात की ट्रेनिंग नहीं दे सकते कि शरीर पीछे की ओर झुका हुआ होने पर भी वे आरामदायक अवस्था में रहें। ऐसा करने का कोई मार्ग नहीं है, अतः हम अपने शरीर को इस तरह से प्रशिक्षित करते हैं, जिससे हमारे कंकाल एवं मांसपेशियों की व्यवस्थायें सीधे बैठने पर आराम की अवस्था में ही हों।

योग : अस्तित्व को खोल देना

आप पतला होने, पीठ का दर्द या सिरदर्द मिटाने के लिये योग नहीं करते। स्वस्थ और शांतिपूर्ण तो आप योग करने से, ऐसे ही हो जायेंगे, क्योंकि योग करने के ये साईड इफ़ेक्ट हैं, ये योग का मुख्य लक्ष्य नहीं हैं। आप को वजन कम करने या स्वस्थ रहने के लिये योग करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिये तो आप को समझदारी से खाना, और टेनिस खेलना या तैरना चाहिये। योग का लक्ष्य आप के अंदर एक अन्य आयाम को जगाना है जो भौतिकता से परे है। सिर्फ जब वह जागता है, तभी अस्तित्व आप के लिये लाखों अलग-अलग तरीकों से खुलता है। आप ने जिन चीज़ों के बारे में सोचा भी नहीं था, वे आप के लिये जीवित वास्तविकतायें बन जाती हैं, बस इसलिये कि भौतिक से परे का कोई आयाम जीवित हो जाता है।


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