गुरु पूर्णिमा के अवसर पर, पढ़ते हैं सद्गुरु की तीन गुरु पूर्णिमा से जुड़ी कवितायेँ। ये कविताएँ गहरी, अंतर्दृष्टिपूर्ण और व्यक्तिगत हैं। पहली कविता आदिगुरु - पहले गुरु के बारे में है। दूसरी और तीसरी गुरु पूर्णिमा कविताओं में, सद्गुरु एक साधक के रूप में अपने अनुभवों के बारे में, और उस पल के अनुभव के बार में बता रहे हैं, जब उन्होंने अपने गुरु की कृपा प्राप्त की थी।