प्रश्न: सदगुरु, सोते समय हम किस प्रकार ध्यान की अवस्था में रह सकते हैं ?

सदगुरु: अच्छा, तो आप अपने ध्यान को एक ही समय पर दो से ज्यादा काम करने वाला बनाना चाहते हैं। क्या आप ध्यान का उपयोग नींद लाने के लिये करना चाहते हैं, या फिर, ध्यान करने के लिये नींद का उपयोग करना चाहते हैं ? आप कौन सी बात कह रहे हैं - सोते समय ध्यान कैसे करें या ध्यान करते समय कैसे सोयें ?

गलत प्रश्न पूछना

सूफी गुरु इब्राहिम के बारे में एक सुंदर कहानी है। उन्होंने बहुत सारे शिष्य इकट्ठा कर लिये थे और उनके आश्रम में एक दिन दो युवाओं की आपस में मुलाकात हुई। उस समय, वहाँ, एक भव्य सूर्यास्त हो रहा था पर वे दोनों वहाँ दुखी हो कर बैठे थे।

उन्हें अपनी धूम्रपान करने की आदत के कारण परेशानी हो रही थी। वे चर्चा कर रहे थे, "हम ऐसा क्यों नहीं करते कि गुरुजी के पास जा कर उनसे ही पूछते हैं कि क्या हम धूम्रपान कर सकते हैं ? क्या पता ? वे भी बड़े अजीब हैं ! हो सकता है कि वे हाँ कह दें और ये भी हो सकता है कि वे हमें तमाखू से कुछ बेहतर चीज़ भी दे दें !”

तो उन्होंने तय किया कि वे अलग अलग जा कर उनसे पूछेंगे। अगली शाम को एक बार फिर से भव्य सूर्यास्त का समय आया। उनमें से एक वहाँ दुखी हो कर बैठा था और तभी दूसरा वहाँ धूम्रपान करते हुए आया। उसे देख कर ये दुखी आदमी बोला, "तुम धूम्रपान कैसे कर रहे हो ? तुम गुरुजी के आदेश को तोड़ रहे हो"!

दूसरा बोला, "नहीं"!

दुखी आदमी ने कहा, "कल मैं गुरुजी के पास गया था और मैंने उनसे पूछा था। उन्होंने कहा, नहीं, तुम धूम्रपान नहीं कर सकते"।

"तुमने उनसे क्या पूछा था"?

पहला बोला, "मैंने पूछा था, क्या ध्यान करते समय मैं धूम्रपान कर सकता हूँ"?”

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तब दूसरे ने कहा, "यही तो तुमने गलती की। मैंने उनसे पूछा, क्या धूम्रपान करते समय मैं ध्यान कर सकता हूँ और उन्होंने कहा, हाँ !

बस, सो जाओ !

 

 

अभी तुम पूछ रहे हो, "क्या मैं सोते समय ध्यान कर सकता हूँ"? इस धरती पर बहुत से लोगों को जागते हुए भी ध्यान करने में समस्या हो रही है। बहुत सारे लोगों की हालत ऐसी है कि अगर उन्होंने अपने आप को बहुत कुछ कर के तैयार न किया हो तो वे, एक घंटे के लिये ध्यान में बैठने पर मुश्किल से तीन मिनिट ही ध्यान की अवस्था में रह पाते हैं। बार बार, बार बार, वे एक क्षण उसमें होते हैं और फिर कहीं और पहुँच जाते हैं।

अपनी नींद में आध्यात्मिकता लाने की कोशिश मत कीजिये। बस ऐसे सोईये, जैसे आप मर गये हों।

अपनी नींद में ध्यान कैसे किया जाये, यह सोचने की बजाय, आप का ध्यान करने का समय चाहे जितना भी हो, उसकी गुणवत्ता को बढ़ाना बेहतर है। कम से कम अपनी नींद को तो अपने सोचने से मत बिगाड़िये। बस, अच्छी तरह से सोईये, जैसे कि कहते हैं, "लकड़ी के कुंदे (टुकड़े) की तरह सोईये"। अगर आप इस तरह नहीं सो सकते तो एक बिल्ली या कुत्ते की तरह सोईये। आध्यात्मिकता को अपनी नींद में लाने की कोशिश मत कीजिये। बस ऐसे सोईये, जैसे कि आप मर गये हों।

सब कुछ छोड़ कर, पूरी तरह से सोईये

मरे हुए लोगों के शरीर कड़े हो जाते हैं पर वे सब कुछ भरपूर होने की गहरी अवस्था में होते हैं। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं होती कि वे कैसे दिख रहे हैं ? तो, इसी तरह से, जब आप सो रहे हों तो आप को इस बात की चिंता नहीं होनी चाहिये कि आप के साथ क्या हो रहा है ? मैंने अमेरिका में एक बात देखी कि सुबह जब आप लोगों से मिलते हैं तो बहुत से लोग पूछते हैं, "क्या आप अच्छी तरह से सोये थे"? मुझे ये प्रश्न समझ नहीं आता था क्यों कि ये कोई मुद्दा ही नहीं था। पर अब मैं देखता हूँ कि बहुत से लोगों के लिये नींद एक मुद्दा होता है। अगर आप अपनी नींद में ध्यान करने की कोशिश करेंगे तो नींद ज़रूर ही आप के लिये एक मुद्दा हो जायेगी। तो अपनी नींद को पूरी तरह से, भरपूर होने दीजिये। अगर आप एक मरे हुए आदमी की तरह सोना नहीं चाहते तो एक छोटे से शिशु की तरह सोईये। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मैकान ने इस बारे में एक सुंदर बात कही। ओबामा के खिलाफ चुनाव हारने के बाद जब लोगों ने उनसे पूछा, "आप कैसे हैं"? तो वे बोले, "मैं एक छोटे से शिशु की तरह सो रहा हूँ। हर दो घंटे में उठता हूँ, रोता हूँ, और फिर सो जाता हूँ"। ये उस आदमी के लिये बहुत ही अद्भुत बात थी। अगर हारने पर भी आप हँसी मजाक कर सकते हैं, एक छोटे शिशु की तरह सो सकते हैं, तो ये आप के लिये अच्छा है।

ध्यान में होने का गुण

आप ध्यान की अवस्था में हो सकते हैं,अथवा आप ध्यान बन सकते हैं, पर आप ध्यान कर नहीं सकते।

ध्यान कोई काम नहीं है, जिसे किया जा सके। यह एक गुण है। यह वो खुशबू है जिस अवस्था पर आप पहुँच सकते हैं और अपने जीने के तरीके में ही, एक तरह से पसीज सकते हैं, बह सकते हैं। ये इसलिये नहीं होता कि आप इसके बारे में कुछ कर रहे हैं - अगर आप अपने शरीर और मन, अपनी ऊर्जाओं और भावनाओं को परिपक्वता की एक खास अवस्था में पहुँचा सकते हैं, तो आप ध्यान की अवस्था में आ जाते हैं। आप ध्यान की अवस्था में हो सकते हैं  या आप ध्यान बन सकते हैं, पर आप ध्यान कर नहीं सकते।अगर आप ये गुण अपने आप में ले आते हैं, तो ये आप को तब भी नहीं छोड़ेगा जब आप नींद में हों। जब ये गुण आप की जीने की एक प्रक्रिया ही बन जाता है, तो शरीर चाहे जाग रहा हो या सो रहा हो, ध्यान में होने की प्रक्रिया जारी रहेगी। पर, अगर आप सोते समय ध्यान करने की कोशिश करेंगे तो बस एक ही बात होगी - आप ठीक से सो नहीं पायेंगे।