अग्नि से शुद्घ करें अपने आभामंडल को
हमारे विचार, भावनाएं शारीरिक स्वास्थ्य और यहां तक कि हमारे कर्म भी हमारे आभामंडल में देखे जा सकते हैं। इसे शुद्ध करने के कई तरीके हैं - इनमें से एक है अग्नि का इस्तेमाल। आइये जानते हैं इसके बारे में...
 
अग्नि से शुद्घ करें अपने आभामंडल को
 

हमारी पंचतत्वों की ब्लॉग श्रृंखला में आइये आज पढ़ते हैं अग्नि के बारे में।

हमारे विचार, भावनाएं शारीरिक स्वास्थ्य और यहां तक कि हमारे कर्म भी हमारे आभामंडल में देखे जा सकते हैं। इसे शुद्ध करने के कई तरीके हैं - इनमें से एक है अग्नि का इस्तेमाल। आइये जानते हैं इसके बारे में...

क्या आपने ध्यान दिया है कि जब आप स्नान करते हैं, जब आप अपने ऊपर पानी डालते हैं, तो सिर्फ आपकी त्वचा की ही सफाई नहीं होती, कुछ और भी साफ होता है। मान लेते हैं, आप बहुत क्रोधित या चिढ़े हुए हैं और आपके भीतर बहुत सी चीजें चल रही हैं। आप सिर्फ स्नान कर लें, तो आपको महसूस होगा कि सारी नकारात्मकता बह गई है।
स्नान का मतलब सिर्फ आपके शरीर की त्वचा की सफाई नहीं है, आप कुछ हद तक अपने आभामंडल को भी शुद्ध कर सकते हैं।

भारतीय मूल के लोग इसे अच्छी तरह जानते हैं। आपके घरों में, आपकी दादी-नानी आपकी नजर उतारती थीं, जो दरअसल आभामंडल का शुद्धीकरण है।
आप जो कुछ भी हैं, आभामंडल उसकी एक सूक्ष्म अभिव्यक्ति है। अगर आप किसी के आभामंडल को देखें, तो आप उसके शारीरिक स्वास्थ्य, उसके मानसिक स्वास्थ्य, उसका कार्मिक ढांचा - एक तरीके से उसके अतीत और वर्तमान, और अगर वह बेवकूफ है, तो उसका भविष्य भी साफ.-साफ देख सकते हैं। अगर आप बेवकूफ हैं, तभी हम आपका भविष्य बता सकते हैं, वरना हम सिर्फ आपका अतीत बता सकते हैं।
आप अपने शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए बहुत से तरीके सीख सकते हैं - योगिक क्रियाओं से लेकर सही ढंग से भोजन करने तक। जिस तरह आप जल से स्नान करते हैं, आप वायु-स्नान भी कर सकते हैं। मान लीजिए मन्द हवा बह रही है। अगर आप पतला कपड़ा पहन कर उस हवा में खड़े हो जाएं, तो कुछ देर बाद आपको बहुत साफ. सुथरा और पारदर्शी महसूस होगा।
लिंग भैरवी में “क्लेश-नाशन क्रिया” की जाती है। यह एक ऐसी क्रिया है जो अशुद्धियों को नष्ट कर देती है।
अगर वायु की गति, स्पर्श, तापमान और बाकी सब कुछ सही है, तो वायु आपको शुद्ध करती है। यह वायु-स्नान है। हम आपको मिट्टी से स्नान भी कराते हैं। इसी तरह, हम आपको अग्नि स्नान भी करा सकते हैं।
लिंग भैरवी (ईशा योग केंद्र में देवी स्थान) में अग्नि स्नान किया जाता है। निश्चित रूप से आप आग को अपने शरीर पर नहीं डाल सकते, आप बस एक खास तरीके से अपने शरीर के आभामंडल को स्पर्श कर सकते हैं। आपके आभामंडल में कुछ खास पैटर्न होता है। अगर उन जगहों पर अग्नि का स्पर्श कराएं, तो अचानक आप चमक और स्पष्टता महसूस करेंगे। भारतीय मूल के लोग इसे अच्छी तरह जानते हैं। आपके घरों में, आपकी दादी-नानी आपकी नजर उतारती थीं, जो दरअसल आभामंडल का शुद्धीकरण है। बहुत बार लोगों ने देखा है कि जब बच्चे बीमार होते हैं, तो जरा सा अग्नि स्नान कराते ही वे ठीक हो जाते हैं। यह आपके सिस्टम पर असर डालता है।
लिंग भैरवी में “क्लेश-नाशन क्रिया” की जाती है। यह एक ऐसी क्रिया है जो अशुद्धियों को नष्ट कर देती है। अंग्रेजी में उसे ऑरा क्लींजिंग (आभामंडल की सफाई) कह सकते हैं। यह आभामंडल से अशुद्धियों को हटाने की प्रक्रिया है ताकि शरीर बेहतर स्वास्थ्य, सुख और मानसिक संतुलन महसूस करे।

 
 
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