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पितृ अमावस्या

पर कालभैरव शांति प्रक्रिया


25 सितम्बर 2022 रात 10:45 से रात 12:45 तक

“हम चाहते हैं कि लोग आनंद से जीएं। अगर वे आनंद से नहीं जीते हैं, तो कम से कम उन्हें शांति से मरना चाहिए। अगर वे यह भी नहीं करते हैं, तो हम उनकी मृत्यु के बाद उनके लिए कुछ करना चाहते हैं।” —सद्गुरु

कालभैरव शांति, लिंग भैरवी मंदिर में होने वाली एक वार्षिक प्रक्रिया है, जो पूर्वजों और दिवंगत रिश्तेदारों के कल्याण के लिए पितृ अमावस्या की शुभ रात्रि को आयोजित की जाती है। वर्ष 2022 में पितृ अमावस्या 25 सितम्बर को है।

पितृ अमावस्या का महत्व

यह विशेष दिन हमारी उन सभी पिछली पीढ़ियों को समर्पित होता है, जिन्होंने हमारे जीवन में किसी न किसी रूप में अपना योगदान दिया है। इस दिन कुछ भेंट करके हम उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं। हम जो भाषा बोलते हैं, जिस तरह बैठते हैं, हमारे कपड़े, हमारी इमारतें – आज हम जो कुछ भी जानते हैं, लगभग हर चीज हमें पिछली पीढ़ियों से मिली है।

वैसे तो लोग अपने मरे हुए मां-बाप को अपनी श्रद्धांजली देने के तौर पर एक धार्मिक रिवाज के रूप में इस दिन को मनाते हैं, लेकिन दरअसल यह उन सभी पीढ़ियों के प्रति अपना आभार प्रकट करने का एक ज़रिया है, जो हमसे पहले इस धरती पर आईं थी।

काल भैरव शांति के लिए आवश्यक वस्तुएं

  1. आवश्यकताएँ:

    • मृतक की तस्वीर

    • मृतक का नाम

    • जन्म तिथि, या जन्म का सही वर्ष और मृत्यु की तारीख, या मृत्यु का सही वर्ष या मृतक के माता और पिता दोनों के नाम।

  2. मृतक की एक ऐसी फोटो होना ज़रूरी है, जिसमें सिर्फ मृतक हो, कोई दूसरा नहीं। प्रक्रिया के लिए एक समूह में खीचें गए फोटो का उपयोग नहीं किया जा सकता है। फोटो तब की होनी चाहिए, जब वह व्यक्ति जीवित था।

  3. गर्भधारण के 48 दिनों या उससे अधिक समय के बाद गर्भपात, या शिशु के मृत पैदा होने के मामले में, मां की तस्वीर (वह तस्वीर गर्भावस्था के दौरान ली गई हो तो बेहतर होगा) का उपयोग किया जाना चाहिए।

  4. यह सलाह दी जाती है कि जो महिलाएं गर्भवती हैं या मासिक धर्म चक्र से गुज़र रही हैं, वे कालभैरव शांति प्रक्रिया के लिए न आएं, क्योंकि यह उनकी भलाई के लिए मददगार नहीं होगा।

  5. आप चाहें तो अगले 10 वर्षों तक यह प्रक्रिया करने के लिए एक ही बार में रजिस्टर कर सकते हैं।

आप कालभैरव शांति प्रक्रिया लाइवस्ट्रीम में रात 10:45 से रात 12:45 तक भी शामिल हो सकते हैं। (रजिस्ट्रेशन फ्री और ज़रूरी है)

अग्नि अर्पणम्

देवी लिंग भैरवी को अग्नि की भेंट, जो हर उस चीज और उन लोगों के प्रति आभार प्रकट करने के लिए है, जिन्होंने हमारे जीवन को पोषित किया है, और अपना योगदान दिया है। यह प्रक्रिया उन सभी पूर्वजों और दिवंगत रिश्तेदारों के लिए की जा सकती है, जिनके नाम/फोटो/ और कोई जानकारी आपके पास उपलब्ध नहीं है।

अभी रजिस्टर करें

संपर्क की जानकारी

फोन: +91-8300083111
ईमेल: info@lingabhairavi.org
रजिस्ट्रेशन तमिलनाडु के सभी स्थानीय केंद्रों पर उपलब्ध है।

हिस्सा लेने के दूसरे तरीके

अग्नि अर्पणम्

हमारे जीवन को पोषित करने में जिन लोगों या वस्तुओं का योगदान रहा है, उन सभी के प्रति आभार के रूप में देवी को अग्नि अर्पणम् भेंट किया जाता है।

यहाँ रजिस्टर करें
अन्नदान

अपने पूर्वजों के सम्मान में, आश्रम के साधकों को भोजन की एक पवित्र भेंट, जिसके इस्तेमाल से आश्रम में आध्यात्मिक साधकों के भोजन की व्यवस्था की जाएगी।

कालभैरव कर्म

कालभैरव कर्म, लिंग भैरवी मंदिर में मृतकों के लिए आयोजित किया जाने वाला एक अनुष्ठान है। यह अनुष्ठान मृत्यु के बाद कुछ समय की अवधि के भीतर किया जाता है, और इसमें देवी की कृपा का आह्वान किया जाता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों तरह की मौतों के स्थिति में, मृत प्राणी को एक सहज और सुखद तरीके से आगे बढ़ने में मदद करती है।

महालय अमावस्या

 
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