सद्‌गुरु: जो लोग भाग्य में विश्वास रखते हैं, उसके सहारे रहते हैं, वे हमेशा तारों, ग्रहों, स्थानों की तरफ देखते रहते हैं। यहाँ तक कि वे भाग्यशाली जूतों, भाग्यशाली साबुन, भाग्यशाली नंबर तथा इसी तरह की चीज़ों को ढूँढते रहते हैं। भाग्य के सहारे आगे बढ़ने की चाह में वे उन चीजों को भी खो देते हैं जो वे ख़ुद आराम से कर सकते थे। आपके जीवन का कोई भी पहलू हो, उसके लिए ज़िम्मेदार आप ही हैं। आप की शांति या अशांति, आप की स्वस्थ मानसिकता या आप का पागलपन, आप की खुशी या आप का दुख, आप के अंदर भगवान या शैतान, ये सब आप का काम है, आपका किया धरा है।

 

अपना जीवन अपने हाथ में लेना

अपनी ऊर्जा का पूरी क़ाबिलियत के साथ इस्तेमाल करने की बजाय, अपने भीतर और बाहर सही वातावरण बनाने की बजाय, दुर्भाग्य से हम हमेशा ऐसी चीज़ें ढूंढते रहते हैं जो हमारे लिए ये सब कर दें।

आज सुबह से शाम तक आपने कैसा अनुभव किया, यह आप पर निर्भर करता है। अपने आसपास के लोगों के साथ आप का कितना टकराव है, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने आसपास के लोगों और परिस्थितियों को तथा उनकी सीमाओं और संभावनाओं को समझने में कितने असंवेदनशील रहे। यह इस बात से बिल्कुल भी तय नहीं होता कि आप कौन सा भाग्यशाली पत्थर या तावीज़ पहने हुए थे। यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी संवेदनशीलता, बुद्धिमत्ता और जागरूकता के साथ अपने आसपास के जीवन को देखते हैं, काम करते हैं और रहते हैं।

 

अगर किसी स्थान पर एक फूलों वाली झाड़ी है और एक कंटीली, सूखी झाड़ी है तो सभी मधुमक्खियां फूलों वाली झाड़ी की ओर जायेंगी। फूलों वाली झाड़ी भाग्यशाली नहीं है, बस उसके पास सुगंध है, जो आप को दिखती भी नहीं, जो सब कुछ अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

एक दिन दो इंसान हवाई अड्डे पर मिले। उनमें से एक बहुत ही ज्यादा दुःखी, परेशान दिख रहा था। दूसरे ने पूछा, ‘आप को क्या हुआ है?’ पहला बोला, ‘क्या-क्या बताऊँ? मेरी पहली पत्नी कैंसर से मर गयी, दूसरी पड़ोसी के साथ भाग गई, बेटा जेल में है क्योंकि उसने मुझे जान से मारने की कोशिश की, मेरी 14 साल की बेटी गर्भवती है, मेरे घर पर बिजली गिर पड़ी, शेयर बाजार में आज मेरे सारे शेयर्स के भाव गिर गए। और आज मेरी मेडिकल रिपोर्ट आई है जिससे पता चला है कि मुझे एड्स है।’

दूसरा बोला, " ओह, आप का भाग्य कितना खराब है! वैसे आप काम क्या करते हैं?’ पहले ने जवाब दिया, ‘मैं लकी चार्म्ज़ बेचता हूं’!

Subscribe

Get weekly updates on the latest blogs via newsletters right in your mailbox.
No Spam. Cancel Anytime.

बात यह है कि यदि आप एक खास तरह के हैं तो एक खास तरह की चीजें आप की ओर आकर्षित होंगीं। अगर आप किसी दूसरी तरह के हैं तो फिर कुछ और तरह की चीजें आप के लिये होंगी। अगर किसी स्थान पर एक फूलों वाली झाड़ी है और एक कंटीली, सूखी झाड़ी है तो सभी मधुमक्खियां फूलों वाली झाड़ी की ओर जायेंगी। फूलों वाली झाड़ी भाग्यशाली नहीं है, बस उसके पास सुगंध है, जो आप को दिखती भी नहीं, जो सब कुछ अपनी ओर आकर्षित कर रही है। लोग कंटीली, सूखी झाड़ी से दूर रहते हैं क्योंकि वह एक अलग तरह की परिस्थिति तैयार करती है। शायद उन दोनों ही झाड़ियों को पता नहीं कि वे क्या बना रही हैं पर हो वही रहा है, जो होना चाहिए।

 

भाग्यशाली होने का अर्थ

तो अगर आप के लिये अच्छी बातें हो रही हैं और आप नहीं जानते कि क्यों ऐसा हो रहा है तो मैं कहूंगा कि आप बासी खाना खा रहे हैं। आपने अपना खाना कहीं और पकाया था, शायद बहुत पहले, और आज भी आप अच्छा खाना खा रहे हैं, लेकिन बासी और वो ज्यादा बासी होता जा रहा है। लेकिन यदि आप के लिये अच्छी चीजें हो रही हैं और आप जानते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है तो इसका मतलब यह है कि आप ने अपना खाना आज ही पकाया है, जागरूकता के साथ। अगर आप के लिये चीजें खराब हो रही हैं और आप नहीं जानते कि क्यों तो आप बासी खाना खा रहे हैं जो सड़ भी गया है।

भारत की लोक भाषाओं में, भाग्यशाली होने के लिये शब्द है, अदृष्ट या अदृष्टम। दृष्टि का मतलब है देखना, अदृष्ट का मतलब है - अनदेखा। आप की दृष्टि चली गयी है।

भारत की लोक भाषाओं में, भाग्यशाली होने के लिये शब्द है, अदृष्ट या अदृष्टम। दृष्टि का मतलब है देखना, अदृष्ट का मतलब है - अनदेखा। आप की दृष्टि चली गयी है। अगर आप देख सकते तो जान सकते कि जो कुछ हो रहा है वह क्यों हो रहा है? जब आप देख नही पाते तो आप को लगता है कि चीजें ऐसे ही हो रही हैं या अकस्मात हो रही हैं। आप को लगता है कि यह सौभाग्य है या दुर्भाग्य है। इसी को हम भाग्य कहते हैं।

 

 

आध्यात्मिक होने का अर्थ यह है कि आप ने अपना जीवन सौ फ़ीसदी अपने हाथ में रखा है। जब आप अपना जीवन सौ फ़ीसदी अपने हाथ में रखते हैं तब ही आप पूरी तरह जागरूक इंसान होते हैं और आप के जीवन में दिव्यता की संभावना होती है। समय आ गया है कि आप अपना जीवन होशपूर्वक, जागरूकता के साथ जियें। भाग्य, सितारों, ग्रहों पर निर्भर मत रहिये। ये निर्जीव वस्तुएँ हैं। बताइये, इंसान को बेजान वस्तुओं की नियति तय करनी चाहिये या बेजान वस्तुओं को इंसान की नियति का फैसला करना चाहिए? इंसान मनुष्य को तय करना चाहिये कि निर्जीव वस्तुओं का क्या हो? लेकिन यदि कोई सितारा, कोई ग्रह आपके भविष्य का निर्णय कर रहा है तो फिर निर्जीव वस्तुएं आप की नियति को बना रही हैं।

अपने आप को ऐसी बातों से प्रभावित मत होने दीजिये क्योंकि अगर एक बार आप इस चक्कर में पड़ गये तो आप इसमें फंस जायेंगे और अपने जीवन में आप जो कुछ कर सकते हैं, उसको सीमित कर लेंगे। आप उससे आगे नहीं जा पायेंगे। यह आप के विकास को, संभावनाओं को रोक देगा। कभी-कभी कुछ बातें अनायास हो जाती हैं लेकिन अगर आप ऐसे अवसरों की राह ही देखते रहेंगे तो अच्छी बातें, आप के लिये, हो सकता है, तब हों जब आप कब्र में पहुंच गये हों, क्योंकि इसके लिये वक्त लगता है।

जब आप भाग्य की, अवसर की राह देखते रहते हैं तो आप भय में, चिंता में जीते हैं। जब आप इरादे के साथ, योग्यता के साथ जीते हैं तो आप के साथ क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा, यह महत्वपूर्ण नहीं होता। आप, कम से कम , अपनी परिस्थितियों को अपने नियंत्रण में रखते हैं। यह ज्यादा स्थायी जीवन है।