विषय सूची
1. ऐश गॉर्ड का मूल?
2.ऐश गॉर्ड क्या है?
3. भारत में ऐश गॉर्ड को क्या कहते हैं?
4. ऐश गॉर्ड दिखता कैसा है?
5. ऐश गॉर्ड के चार फायदे
5.1 दिमाग को पैना बनाना
5.2 ऊर्जा बढ़ाना
5.3 कब्ज़, भगंदर, फोड़ों का इलाज
5.4 कब्ज़, भगंदर, फोड़ों का इलाज
6. ऐश गॉर्ड के और ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी फायदे
7. ऐश गॉर्ड के पोषक तत्व
8. स्वाद और उपयोग
9.अच्छा ऐश गॉर्ड खोजना और चुनना
10. ऐश गॉर्ड रस के फायदे
11. ऐश गॉर्ड के 5 खाद्य पदार्थ बनाने की विधियाँ
11.1 रस
11.2 ऐश गॉर्ड और तरबूज की स्मूदी
11.3 रायता
11.4 नींबू और ऐश गॉर्ड का ठंडा शर्बत
11.5 ऐश गॉर्ड का हलुआ

अपने आहार में ऐश गॉर्ड या तरबूज को शामिल करने से आप गर्मी को आसानी से हरा सकते हैं और साथ ही, अपने तंत्र में आप एक शक्तिशाली ऊर्जा बढ़ा सकते हैं। इससे आप सलाद, रस, नाश्ता और मिठाईयाँ भी बना सकते हैं। इसके स्वास्थ्य संबंधी और खुशहाली बढ़ाने के फायदों की सूची काफी लंबी है। आइये, हम इन फायदों के बारे में और कुछ स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ बनाने की विधियों के बारे में और ज्यादा जानें। 

#1. ऐश गॉर्ड का मूल ?

ऐश गॉर्ड की जड़ें इतनी प्राचीन हैं कि उसका एकदम सही मूल ढूँढना मुश्किल है पर वनस्पतिशास्त्रियों का अनुमान है कि ये जापान, इंडोनेशिया, चीन, भारत या मलेशिया में मूल रूप से पैदा हुई। इन सभी क्षेत्रों में ये हज़ारों सालों से इस्तेमाल हो रही है। चीनी शास्त्रों में 5वीं - 6ठवीं शताब्दियों से ऐश गॉर्ड के औषधीय गुणों का वर्णन मिलता है।

सदगुरु यहाँ हमें ऐश गॉर्ड के गुणों और भारतीय परंपराओं में उसके इस्तेमाल के बारे में बता रहे हैं।

सदगुरु:आपने सुना होगा, पढ़ा होगा कि सफेद पेठे के बहुत फायदे हैं, कि ऐश गॉर्ड बहुत शुभदायक सब्जी है। जब आप नया मकान बनाते हैं तो इसे अपने मकान के सामने, प्रवेश द्वार पर लटकाते हैं। जब आप कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं तो आपके घर में इसे लाया जाता है। पारंपरिक रूप से यह नियम था कि अगर आप अपने घर में भी ऐश गॉर्ड उगाते हैं तो आप इसे नहीं खायेंगे। आपको इसे किसी ब्राह्मण को दान में देना चाहिये। ब्राह्मण को देने से आपको  तो पुण्य मिलेगा ही पर उसे तो उसी समय भोजन मिल जायेगा। पुराने जमाने में नियम था कि शूद्र इसे नहीं खायेंगे। अगर कोई शूद्र इसे खाता हुआ मिल जाये तो उसे मार देते थे क्योंकि लोग ऐसा मानते थे कि इसे खाने से बुद्धि तेज हो जाती है और इसे खाने वाला अपने आपको अच्छी तरह से अभिव्यक्त कर सकता है। इसीलिये, शूद्रों को इसे खाने से मनाही थी। आजकल ऐसी कोई समस्या नहीं है और जो चाहे इसे खा सकता है। 

पारंपरिक रूप से ये सब्जी कई तरह से इस्तेमाल होती  है। नये घरों के सामने इसे लटकाने का कारण यह है कि जब आप नये मकान में गृह प्रवेश करते हैं तो वहाँ कभी कभी, कुछ नकारात्मक उर्जायें फँसी हुई हो सकती हैं। तो ऐश गॉर्ड को लटकाने से, उसके सकारात्मक कंपन इतने ज्यादा होते हैं कि वे नकारात्मकता को खत्म कर देते हैं। पर, मुझे लगता है कि इसे लटका कर रखने की बजाय खा लेना ज्यादा अच्छा होगा क्योंकि इसे खा लेने पर, आप में से सकारात्मक कंपन ही बाहर आयेंगे और आप चाहे जहाँ जायें, आपके साथ सब सही होगा। 

#2. ऐश गॉर्ड क्या है?

ऐश गॉर्ड या बेनिनकेसा हिस्पिडा एक खास प्रकार का खरबूजा है जो ज्यादातर भारत और चीन में खाया जाता है। एशियन भोजन के शोरबों (सूप) में इसके टुकड़े डाले जाते हैं। इसे भारत के योगी बहुत पुराने समय से  एक उर्जात्मक खाद्य पदार्थ मानते रहे हैं क्योंकि इसमें वो ऊर्जा बहुत ज्यादा मात्रा में होती है जिसे यौगिक विज्ञान 'प्राण' कहता है और जो एक बहुत जरूरी जीवन ऊर्जा है। 

#3.भारत में ऐश गॉर्ड को क्या कहते हैं?

भारत की अलग अलग भाषाओं में इसके अलग अलग नाम ये हैं :

अंग्रेज़ी : व्हाइट गॉर्ड, विंटर मेलन, वैक्स गॉर्ड

संस्कृत : कुष्मांडा, वृहतफल, घृणावया, ग्राम्यकर्कटी

हिंदी : पेठा, कद्दूपेठा

मणिपुरी : टोरोबोट

मराठी : कोहळा

तमिळ : नीर पुसनीकाई

मलयालम : कुंभालंगा

तेलुगु : बुडीज गुम्माडिक़्क़ाया

कन्नडा : बुडायकुम्बलकायी

बंगाली : कुमरा, चलकुमरा

असमिया : कोमोरा

#4.ऐश गॉर्ड दिखता कैसा है?

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अधपका ऐश गॉर्ड बारीक रेशों से ढँका रहता है और जैसे जैसे ये पकता है, रेशे गायब होते जाते हैं। बाहरी सतह का रंग गहरे हरे से हल्के राखी तक के कई प्रकारों का होता है।पके हुए पेठे सफेद राख से रंगे जैसे दिखते हैं। इस सफेद राख की वजह से ही इस खरबूजे को ऐश गॉर्ड कहा जाता है। इसका आकार भी अलग अलग जैसे गोल, अंडाकार, लंबा होता है।

#5. ऐश गॉर्ड या सफ़ेद पेठे के चार फायदे

#5.1 दिमाग को पैना बनाना

 सुबह एक गिलास ऐश गॉर्ड या सफ़ेद पेठे का रस पीने से आपके शरीर में बहुत ज्यादा ठंडापन महसूस होगा और साथ ही आपकी सतर्कता, सजगता बढ़ जायेगी। रोजाना के अपने आहार में ऐश गॉर्ड को शामिल करने से बुद्धिमत्ता, बुद्धि की काबिलियत बहुत ज्यादा बढ़ती है। खास तौर पर बच्चों को रोज ऐश गॉर्ड का रस पीना चाहिये। एक सप्ताह तक इसे पीने से आप अपने दिमाग के पैनेपन में, स्पष्टता में एक खास तेजी महसूस करेंगे। इसमें प्राणशक्ति बहुत है। रोज सुबह इसका एक गिलास पीने से बुद्धिमत्ता में अद्भुत फर्क आता है। ये ज़्यादा तेज, पैनी, स्पष्ट बनेगी और आपके तंत्र में बिना कोई अशांति लाये, ये आप में खूब ऊर्जा लायेगी। रोज ऐश गॉर्ड का रस आपके लिये जादू करेगा।

#5.2 ऊर्जा बढ़ाना

ऐश गॉर्ड खाने से जबर्दस्त ऊर्जा मिलती है और साथ ही आपकी तंत्रिकायें शांत रहती हैं। कॉफी पीने से आपको ऊर्जा तो मिलती है पर तंत्र में अशांति भी पैदा होती है । जब कि एक गिलास ऐश गॉर्ड रस आपको खूब सारी ऊर्जा के साथ साथ शांति भी देता है।

#5.3 कब्ज, पाइल्स (भगंदर), फोड़ों का इलाज

थोड़ा सा भी ऐश गॉर्ड का रस आपके तंत्र को ठंडा करता है। ये उन लोगों के लिये बहुत फायदेमंद है जिनके शरीर में गर्मी ज्यादा होती है और जिससे उन्हें कब्ज, फोड़े और भगंदर (पाइल्स) जैसी तकलीफें होती हैं।

#5.4 ठंडक में सावधानी

जिन लोगों को सर्दी, अस्थमा, जुकाम आदि की समस्यायें जल्दी होती हैं, उन्हें ऐश गॉर्ड या सफ़ेद पेठे के उपयोग में थोड़ा सावधान रहना चाहिये क्योंकि ये तंत्र में बहुत ज्यादा ठंडक पैदा करता है। ऐसे लोगों को इसमें शहद या काली मिर्च मिला कर इसे पीना चहिये जिससे कुछ हद तक इसकी ठंडक कम हो जाये।

#6.ऐश गॉर्ड या सफ़ेद पेठे के और ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी फायदे

एथेनोफॉर्मेकोलॉजी जर्नल में 2001 में प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि चूहों पर परीक्षण से ये पता चला कि ऐश गॉर्ड का रस अल्सर्स को बढ़ने नहीं देता और इस रस में कोई नशा भी नहीं होता। इसी जर्नल में 2005 में प्रकाशित एक दूसरे लेख में बताया गया कि ऐश गॉर्ड के बीजों के अर्क में एन्टी अंजिओजेनिक गुण हैं यानी ये कैंसरग्रस्त ट्यूमर्स में जरूरी खून को जाने से रोकता है।

साल 2000 में, फिटोटेरेपिया में किये गये परीक्षणों से पता चला कि ऐश गॉर्ड रस चूहों में मॉर्फिन विड्रॉवल लक्षणों को महत्वपूर्ण ढंग से खत्म करता है यानी ऐसे रोगी जो गांजा/ भांग लेने के आदी हैं, उनको ऐश गॉर्ड रस दे कर ठीक किये जाने की संभावना है। जियांग्सू जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज में 1995 में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था कि खराब गुर्दों वाले चूहों पर परीक्षणों से पता चला कि गुर्दों को बचाने के लिये लाभदायक ज़रूरी तत्व ऐश गॉर्ड में उपलब्ध हैं।

ईरानियन जर्नल ऑफ फोर्मेकोलोजी एंड थेरेप्यूटिक्स के 2005 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार ये बात सिद्ध हो चुकी है कि ऐश गॉर्ड को पारंपरिक रूप से जुलाब रोकने के लिये इस्तेमाल किया जाता रहा है। 2003 में इंडियन जर्नल ऑफ फोर्मेकोलॉजी ने बताया कि चूहों पर परीक्षणों में पाया गया कि ऐश गॉर्ड अर्क अवसाद को कम करता है।

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फॉर्मेकोलॉजी ने 2010 में छपे एक लेख में बताया कि ऐश गॉर्ड के बीजों के अर्क में सूजन और दर्द को कम करने के गुण पाये गये हैं। 2003 में कोरियन जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन के एक लेख ने डायबिटीज़ की रोकथाम के लिये ऐश गॉर्ड के पारंपरिक उपयोग को सही बताते हुए कहा कि इस सब्जी के पाउडर ने चूहों में ग्लूकोज़, इन्सुलिन, कोलोस्ट्रॉल, फ्री फैटी एसिड और एचडीएल कोलोस्ट्रॉल के स्तरों को कम करने में सकारात्मक भूमिका निभायी।

#7.ऐश गॉर्ड या सफ़ेद पेठे के पोषक तत्व

ऐश गॉर्ड का मुख्य, भाग पानी है जो 96% है पर इसमें बड़ी मात्रा में फायदेमंद विटामिन्स जैसे विटामिन बी, विटामिन सी और कुछ जटिल विटामिन्स जैसे निएसिन, थिएमाइन और रिबोफ्लेविन भी हैं। ऐश गॉर्ड में कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नेशियम, लोहा और ज़िंक जैसे खनिज पदार्थ भी अच्छी मात्रा में हैं। ये हमें प्रोटीन्स, कार्बोहाइड्रेटस और रेशे भी देता है। ऐश गॉर्ड के हर 100 ग्राम में पोषक तत्वों की मात्रा इस प्रकार है...... चर्बी 3.9 ग्राम्स, सैचुरेटेड चर्बी 0.5 ग्राम्स, कार्बोहाइड्रेट 12.5 ग्राम्स, रेशे 0.6 ग्राम्स, प्रोटीन्स 2 ग्राम्स, सोडियम 33 मिलिग्राम्स, पोटैशियम 359 मिलिग्राम्स, विटामिन ए 9.80%, विटामिन बी6 11.3%, विटामिन सी 30.50%, विटामिन ई 1.10%, कैल्शियम 5.10%, मैग्नीशियम 6.70%, फॉस्फोरस 5%, ज़िंक 7.20%, लोहा 5.70%, मेंगनीज़ 12.50%, आयोडीन 5.90%।

#8.स्वाद और उपयोग

ककड़ी की तरह ऐश गॉर्ड या सफ़ेद पेठे का स्वाद भी बहुत हल्का होता है। वास्तव में इसका खुद का कोई स्वाद ही नहीं है। इसीलिये, गर्मी के दिनों में ये हर तरह के सलाद, स्मूदी और रसों में मिलाया जा सकता है। सर्दियों में इसमें शहद या काली मिर्च मिलाने से इसके प्राकृतिक ठंडे गुणों को थोड़ा कम किया जा सकता है पर इसकी मूल ऊर्जा वैसी ही रहती है। इसकी ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा को बनाये रखने के लिये इसे कच्चा ही खाना चाहिये।

#9.खोजना और चुनना

भारत, बांग्लादेश, दक्षिणी चीन और दक्षिण पूर्वी एशिया के दूसरे भागों में इसकी खेती बहुत होती है। एशिया के बाहर के देशों में, जहाँ स्थानीय सुपरमार्केट में ये नहीं मिलता, इसे भारतीय, चीनी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय किसान बाजारों में खरीदा जा सकता है। ऐश गॉर्ड चुनते समय, ऐसा पसंद करें जिस पर कोई दबे, कटे हिस्से न हों। इसके आकार के हिसाब से ये भारी लगे और लगभग तरबूज के आकार और रंग का हो पर इसकी ऊपरी सतह सफेद राख से सनी हुई लगनी चाहिये। इस पर लगा हुआ पाउडर खाया जा सकता है पर गीला हो जाने पर ये चिकना हो जाता है। इसीलिये, इसे काटने से पहले अच्छी तरह धो लेना चाहिये। अंदर का भाग सभी तरफ एक जैसा अच्छा सफेद होना चाहिये। अगर इसे ठंडे, सूखे स्थान पर बिना काटे रखा जाये तो ये एक महीने तक खराब नहीं होता।

#10.ऐश गॉर्ड रस के फायदे

एक नर्स को सेहत के लिये फायदेमंद ऊर्जा देने वाला एक पदार्थ मिल गया। लॉस एंजेलिस में रहने वाली जेनिफर कार्लसन ने कुछ असामान्य यौगिक पदार्थ बनाने की विधियाँ सीख ली हैं। किसी उत्तेजक पदार्थ को इस्तेमाल किये बिना स्वास्थ्यप्रद ढंग से ये ऊर्जा बढ़ाते हैं। जेनिफर के लिये, रोज शाम्भवी महामुद्रा क्रिया के साथ , ये आसान विधियाँ, जो उसने इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम में सीखीं, बहुत फायदेमंद रही क्योंकि इससे सेहत को नुकसान करने वाली उसकी कैफीन लेने की आदत छूट गयी। ये ध्यान क्रिया और आहार में ये आसान चीजें उसको सारा दिन ऊँचे, अच्छे स्तर की ऊर्जा बनाये रखने में मदद करती हैं।

जेनिफर कहती है, "मैं रात को ड्यूटी करने वाली नर्स हूँ और रात में 12 - 12 घंटे काम करती हूँ। किसी आपातकालीन स्थिति में मरीज का जीवन हर पल मेरी सतर्कता और सजगता पर निर्भर करता है। मैं रात भर कॉफी और सोड़ा पीती रहती थी जिससे अपनी ड्यूटी सही ढंग से कर सकूँ पर जब मैं घर आती थी तो पूरी तरह से थकी हुई रहती थी, मुँह का स्वाद बहुत खराब होता था और मुझे घबराहट होती रहती थी। संतुलन के लिये मुझे कुछ भारी चीज़ें खानी पड़तीं और फिर कुछ घंटों की नींद के बाद, वापस ड्यूटी पर वही सब! रात की ड्यूटी मेरे शरीर पर बहुत खराब असर कर रही थी। मानसिक रूप से मैं अवसाद (डिप्रेशन) की हालत में थी। मुझे पता था कि इस तरह मैं और ज्यादा नहीं चल सकूँगी पर मेरे लिये मेरा काम भी महत्वपूर्ण था"।

फिर, जेनिफर को इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम में सीखे हुए, आहार संबंधी कुछ सुझाव याद आये। "सदगुरु ने सफेद खरबूजे (ऐश गॉर्ड) की बात की थी जो प्राकृतिक रूप से आपके शरीर को ठंडा करता है और कैफीन या कोई दूसरे उत्तेजक पदार्थ लिये बिना आपकी ऊर्जा बढ़ाता है। तब, कैफीन की जगह कुछ बेहतर लेने के लिये परेशान जेनिफर ने इसे आजमाया। "इसने मुझे नाटकीय ढंग से मदद की। ये मुझे बहुत ज्यादा उर्जात्मक बनाता है और बिल्कुल भी घबराहट नहीं होती, न ही मैं परेशान या डरी हुई महसूस करती हूँ, जैसे कॉफी पी कर होती थी। अब मैं बेचैन हो कर गिर नहीं पड़ती। ये मेरी सेहत को वाकई फायदा देता है, नशे की हालत नहीं"।

"मेरी रोज की ध्यान क्रिया के साथ साथ आहार में ऐश गॉर्ड को शामिल करने से मैंने अपनी रोज की ऊपर- नीचे होने की प्रक्रिया तोड़ दी है। ड्यूटी के दौरान मैं ऐश गॉर्ड रस के 2 - 3 गिलास पीती हूँ और सारी रात ऊर्जामय रहती हूँ। फिर, डयूटी खत्म होने पर 20 मिनिट की ध्यान क्रिया करती हूँ। इससे मुझे आराम भी मिलता है और मेरा सारा तंत्र फिर से तैयार हो जाता है। शाम्भवी क्रिया मेरी नींद की जरूरत को भी कम कर देती है। तो अब, घर आने पर मैं अच्छा, सेहत के लिये फायदेमंद खाना खाती हूँ और फिर 5 - 6 घंटे सोती हूँ"। जीवन शैली में इस बदलाव के साथ, अब, जेनिफर अपने बच्चों के स्कूल से घर लौटने पर, उनके साथ समय बिता सकती है और वापस रात में ड्यूटी पर जाने से पहले खाना भी बना सकती है। 

#11.ऐश गॉर्ड के 5 खाद्य पदार्थ बनाने की विधियाँ

#11.1 ऐश गॉर्ड रस

सामग्री : 4" से 5" का ऐश गॉर्ड का टुकड़ा, 6 चम्मच नींबू का रस, 3 चम्मच काली मिर्च पाउडर, 3 चम्मच नमक। विधि : ऐश गॉर्ड को काट कर उसके छिलके और बीजों को निकाल दें। ब्लेंडर में चला कर एक समान रस बना कर छान लें। नींबू का रस, काली मिर्च, नमक मिला लें।

#11.2 ऐश गॉर्ड और तरबूज की स्मूदी

विधि : ऐश गॉर्ड और तरबूज के समान भागों को ब्लेंडर में पानी या सादे योगहर्ट के साथ मिला कर ब्लेंड करें और स्वाद के लिये शहद या आग्वे शर्बत मिलायें।

#11.3 ऐश गॉर्ड का रायता

ऐश गॉर्ड को कद्दूकस करें और सादे योगहर्ट में मिलायें, नींबू का रस, नमक, काली मिर्च और भुने हुए जीरे का पाउडर मिलायें। किसी भी मसालेदार भारतीय या मेक्सिकन पदार्थ के साथ लेने के लिये ये रायता एक शानदार साथी है।

#11.4 ऐश गॉर्ड नींबू शर्बत  

ऐश गॉर्ड का 2 - 3 कप रस बनायें, उसमें ताजा नींबू का रस और स्वाद के लिये नमक मिलायें। अनोखे स्वाद के लिये पुदीने या धनिये की टहनी लगा कर ब्लेंड करें।

#11.5 ऐश गॉर्ड का हलुआ  

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