विषय सूची
1. रागी : इसका इतिहास
2.रागी के फायदे
2.1 रागी में प्रोटीन की कातरा काफी ज़्यादा होती है
2.2 रागी में खनिजों की मात्रा काफ़ी ज़्यादा होती है
2.3 रागी डायबीटीज़ में फायदेमंद होता है
2.4 रागी में बैक्टीरिया को मारने की शक्ति होती है
2.5 रागी में कैंसर से लड़ने की ताकत होती है
2.6 रागी आपका जवान बनाए रखता है
2.7 रागी ‘बुरे’ कोलेस्ट्रोल को कम करता है, दिल की बीमारियों से बचाता है
3. आजकल रागी की खेती की स्थिति
4. रागी की रेसिपी

एक पीढ़ी पहले, बहुत सारे भारतीय, खास तौर पर दक्षिण भारत में, रागी या फिंगर मिलेट (फ्लेयुसीन कोराकेना
एल) से परिचित थे। पर एक समय का जाना माना अनाज आज अधिकतर लोगों के आहार में से गायब हो चुका है। ये बहुत ही अचरज भरा और दुर्भाग्यपूर्ण है - क्योंकि मनुष्य के शरीर के लिये इसके पोषक और
मेडिकल फायदे बहुत हैं। इसके अलावा ये बहुत ही अनुकूल फसल है जो भारत की जलवायु के हिसाब से
एकदम सही है। इस तरह, इसका दुगुना महत्व है। आइये, हम फिंगर मिलेट के कुछ फायदों की चर्चा करें और
रागी के लड्डू, कुकीज़ और पकोड़ों जैसे कुछ पदार्थों को बनाने की विधि जानें।   

#1. . रागी : इसका इतिहास

फिंगर मिलेट की शुरुआत अफ्रीका से हुई और इसकी फसल उगांडा और इथोपिया में हज़ारों सालों से उगायी जा रही है। भारत में ये लगभग 4000 साल पहले आयी, और हड़प्पन सभ्यता की पुरातत्व खुदाईयों में इसके होने के संकेत मिले हैं।

#2. . रागी के 7 फायदे</h2

#2.1 रागी में प्रोटीन की मात्रा बहुत है

रागी में मिलने वाले प्रोटीन की मात्रा चावल में मिलने वाले प्रोटीन के लगभग बराबर ही है पर रागी की कुछ किस्मों में ये दुगुनी भी होती है। ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि ये प्रोटीन एक अलग ही तरह का है जो दूसरे अनाजों में नहीं होता। मुख्य प्रोटीन भाग ऐलेयूसिनीन है, जिसका जैविक गुण काफी ज्यादा होता है, जिससे ये आसानी से शरीर में घुल मिल जाता है। इसमें ट्रिप्टोफैन, सिस्टाइन, मैथियोमाइन और ऐरोमैटिक एमिनो एसिड्स की मात्रा भी काफी होती है। अगर आपको ये बहुत कठिन लग रहा है तो यूँ समझिये कि ये, मनुष्य के स्वास्थ्य के लिये बहुत ज़रूरी माने गये हैं, और दूसरे ज्यादातर अनाजों में नहीं मिलते। ज्यादा प्रोटीन कि ये मात्रा फिंगर मिलेट को कुपोषण दूर करने के लिये बहुत महत्वपूर्ण बनाती है। शाकाहारी लोगों के लिये खास तौर से ये अनाज प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है क्योंकि इसमें मेथियोनाइन होता है, जो प्रोटीन का 5% भाग देता है।

#2.2रागी में खनिज पदार्थ बहुत हैं

रागी खनिजों का भी एक अच्छा स्रोत है। दूसरे अनाजों की तुलना में इसमें कैल्शियम की मात्रा 5 से 30 गुना ज्यादा होती है। इसमें फॉस्फोरस, पोटैशियम और लोहा भी अच्छी मात्रा में होता है। हड्डियों की घनता और उनके स्वास्थ्य के लिये कैल्शियम तो बहुत महत्वपूर्ण है ही। तो भोजन के अलावा फूड्स सप्लीमेंट्स लेने वाले लोगों के लिये फिंगर मिलेट एक ज्यादा स्वास्थ्यप्रद विकल्प है, खास तौर से उन लोगों के लिये जिन्हें ऑस्टियोपोटोसिस है, या हीमोग्लोबिन की कमी की समस्या है। यूनाइटेड स्टेट नेशनल एकेडेमीज़ द्वारा प्रकाशित अध्ययन "द लास्ट क्रॉस ऑफ अफ्रीका" में बताया गया है कि फिंगर मिलेट एक सुपर अनाज बन सकता है और ये भी कहा गया है, "इस फसल के बारे में दुनिया का दृष्टिकोण बदलने की ज़रूरत है। सभी मुख्य फसलों में ये अनाज सबसे ज्यादा पोषण देने वाला है"। और आगे, ये बताया गया कि उगांडा और दक्षिणी सूडान में लोग दिन में एक ही बार खाना खाते हैं, पर उनका शरीर स्वस्थ्य और गठीला रहता है जो फिंगर मिलेट की वजह से है।

#2.3 रागी डायबिटीज़ पर काबू पाने में सहायक है

लोगों में डायबिटीज़ बहुत बड़े स्तर पर होने की वजह से ऐसे आहार की माँग बढ़ रही है, जिसमें रेशों का स्तर ऊँचा हो और जिसमें फायदेमंद फायटोकेमिकल्स और जटिल कार्बोहाइड्रेटस हों। फायटोकेमिकल्स पौधों से मिलने वाले रासायनिक यौगिकों का एक बड़ा समूह है, जो रोगों से लड़ने की हमारी योग्यता के लिये महत्वपूर्ण हैं। ये सभी रसायन सामान्य रूप से अनाज की बाहरी परत में या बीज के खोल में मिलते हैं, और इसीलिये अनाज के दानों को उनके पूरे रूप में खाया जाना चाहिये। खास तौर से, ज्वार, चावल, मक्का और गेहूँ की तुलना में, रागी के दानों के खोल में पॉलीफेनोल्स ज्यादा मात्रा में होते हैं। इसकी फेनोलिक की मात्रा चावल के मुकाबले 40 गुनी और गेहूँ के मुकाबले 5 गुनी होती है। सभी मिलेट्स में रागी की तुलना फॉक्सटेल मिलेट से की जा सकती है, और कोडो मिलेट के बाद इसका दूसरा नंबर आता है। शुरुआती अध्ययनों से पता चला है कि फिंगर मिलेट खून में ग्लूकोज़ की मात्रा पर काबू पाती है, और हायपरग्लिसेमिक और ऑक्सिडेटिव दबाव को भी कम करती है। डायबिटीज़ के रोगियों को होने वाले घावों के ठीक होने की प्रक्रिया को भी फिंगर मिलेट तेज करती है।

#2.4 नुकसानदेह बैक्टीरिया को मारनेके गुण रागी में होते हैं

फिंगर मिलेट में ऐसे गुण पाये गये हैं जो बहुत सारे बुरे बैक्टीरिया को खत्म करतें हैं। इनमें खाने में ज़हर बनाने वाले बैसिलम सेरेअस, टॉयफ़ाइड जैसे बुखार फैलाने वाले सेल्मोनेला एसपी और चमड़ी में ऐब्सकेसेस, फुरुनकल्स और सेल्युइटिस वायरस फैलाने वाले स्टेफीलोकोक्कस भी शामिल हैं।

#2.5 रागी में कैंसर के खिलाफ काम करने की क्षमता है

फिंगर मिलेट में एन्टीऑक्सीडेंट्स खूब अच्छी मात्रा में होते हैं और ये शब्द तो सेहत की किताबों में एक कहावत जैसा इस्तेमाल होता है। एन्टीऑक्सीडेंट्स ज्यादा ऑक्सीडेशन को रोकते हैं( जो एक अचरज भरी बात है) और इस तरह कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को रोकते हैं नहीं तो कोशिकायें कमज़ोर पड़ कर कैंसरग्रस्त हो जाती हैं। फिंगर मिलेट के दानों की छाल में छुपे फेनोलिक एसिड्स, टैनिन्स और फ्लेवोनॉइड्स में बहुत असरदार एन्टीऑक्सीडेंट्स गुण होते हैं। सामान्य रूप से ये देखा गया है कि बाजरा या गेहूँ खाने वालों की तुलना में मिलेट खाने वालों में ग्रासनली का कैंसर होने की घटना कम होती है।

#2.6 रागी आपको युवा रखता है

उम्र बढ़ने के असर को कम करने के गुणों वाले फेनोलिक तत्व और एन्टी ऑक्सीडेंट्स तो फिंगर मिलेट में होते ही हैं, साथ ही फिंगर मिलेट और कोडो मिलेट में कोलेजेन की क्रॉस लिंकिंग रोकने की क्षमता भी है। कोलेजेन की क्रॉस लिंकिंग वह प्रक्रिया है जिससे चमड़ी, पेशियों और रक्त वाहिनियों में कोलेजेन के अणु, अपने ही अंदर या फिर दो या दो से ज्यादा अणुओं के बीच, एक दूसरे से जुड़ जाते हैं जिससे टिश्यूज़ का लोच कम हो जाता है, चमड़ी और पेशियाँ कड़ी हो जाती हैं और उम्र बढ़ने का असर शरीर पर दिखता है। तो, रागी का सेवन इस असर को कम करता है।

#2.7 रागी खराब कोलोस्ट्रोल को कम करता हैऔर हृदय रोगों की रोकथाम करता है

अभी के संशोधनों के परिणामों से यह बात सामने आ रही है, कि फिंगर मिलेट में हृदय रोगों के खतरे को कम करने की क्षमता है। तकनीकी भाषा में, ये सेरम टायग्लायसेरिड्स के जमाव को कम करता है, और लिपिड ऑक्सीडेशन और एलडीएल कोलेस्ट्रोल ऑक्सीडेशन को भी कम करता है। ये एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलोस्ट्रोल ही बुरा कोलोस्ट्रोल कहलाता है और ऑक्सीडाइज़्ड होने पर खास तौर से तकलीफ देता है। ऑक्सीडाइज़्ड एलडीएल आर्टरीज़ में सूजन ला देता है, जिससे आरटेरियोसेलेरोसिस हो जाता है और हृदयघात का खतरा बढ़ जाता है।

#3.रागी उगाने की अभी की परिस्थिति

इन सब फायदों को देखते हुए ये बहुत ही अचरज करने वाली बात है कि आजकल, जब सारी दुनिया स्वस्थ्य भोजन और चमत्कारिक इलाज ढूंढने के लिये परेशान है, तब ज्यादातर लोगों को रागी का नाम भी पता नहीं है। बहुत से इलाकों में, जहाँ ये उगाया जाता है, लोग इसे गरीबों का खाना या अकाल के समय की फसल मानते हैं। अमेरिका में इसे ज्यादातर पक्षियों को खिलाने के लिये इस्तेमाल करते हैं। हालाँकि अब अफ्रीका में भी इसका उत्पादन कम हो गया है, फिर भी महाद्वीप के पूर्वी भागों में ये एक महत्वपूर्ण फसल है, खास तौर पर गरीब किसानों के लिये, पर भारत में इसकी बहुत उपेक्षा हो रही है - और इसका उत्पादन तेजी से कम होता जा रहा है।

उदाहरण के लिये, सरकारी फसल उत्पादन आँकड़ो के अनुसार 1998 - 99 में 18 लाख हेक्टेयर जमीन में 27 लाख टन रागी पैदा की जाती थी पर 2013 -14 आते आते ये आँकडे 95% कम हो गये। सिर्फ 90000 हेक्टेयर जमीन में सिर्फ 90000 टन रागी पैदा हुई। ये तब है जब रागी एक ऐसी फसल है जो कम से कम पानी के साथ उगती है, रण प्रदेशों में भी उगती है। फिंगर मिलेट के बहुत सारे प्रकार हैं जो ज्यादा मानसून वाले इलाकों से ले कर एकदम सूखे इलाकों तक, सब जगह उग सकते हैं।

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हिमालय के 23000 मीटर ऊँचे इलाकों में भी इसे उगाया जा सकता है। ये आशा करनी चाहिये कि फिंगर मिलेट का भविष्य सुधरेगा। रागी के कुछ खाद्य पदार्थों को बनाने की विधियाँ नीचे दी जा रहीं हैं। अगर ये पदार्थ आपको अच्छे लगें तो अपने आहार में ज्यादा रागी लाईये। सही दिशा में ये एक छोटा कदम होगा। ईशा शोप्पी में रागी के कई पदार्थ मिलते हैं, जिन्हें आप भारत में घर बैठे मंगा सकते हैं।

#4.रागी की रेसिपी

#1. रागी माल्ट :

पारंपरिक ढंग से, 'रागी माल्ट' के रूप में शिशुओं और बच्चों को रागी दिया जाता है, क्योंकि ये पचने में आसान है, हालांकि इसमें इसके पोषक गुण कुछ कम हो जाते हैं।

#2. रागी का माल्टेड आटा

रागी के दानों को 12 घंटे तक पानी में भिगो के रखिये, और फिर उन्हें 2 -3 दिनों तक पतले/मुसलिन कपड़े में बाँध कर अंकुरित कीजिये। इन अंकुरित दानों को सुखा कर, उनके अंकुरों को निकाल कर उन्हें सूखा सेंकिये। फिर उन्हें पीस कर बारीक पाउडर बनाईये और छान लीजिये। इस आटे से आप नमकीन और मीठा, दोनों तरह के पदार्थ बना सकते हैं।

नमकीन : 3 - 4 चम्मच माल्टेड आटे को थोड़े पानी में मिला कर पेस्ट बनाईये। इसमें नमक मिला कर 1 कप उबले पानी में इसे मिला कर 2 - 3 मिनट उबालिये। आप चाहें तो इसे ठंडा कर के इसमें छाछ या योगर्ट मिला सकते हैं। मीठा : 3 - 4 चम्मच माल्टेड आटे को थोड़े पानी में मिला कर पेस्ट बना लें। इसमें 3 - 4 चम्मच गुड़ पाउडर और 1/4 चम्मच इलायची पाउडर मिला कर, इसे गर्म या ठंडा, जैसा चाहें, खा सकते हैं।

#3. रागी लड्डू :

सामग्री > 1 कप रागी का आटा, 1/2 कप घी, 1/2 कप शक्कर, 1/4 कप कसा हुआ ताजा नारियल, 2 चम्मच काले तिल, 2 चम्मच मूंगफली के दाने, 8 - 10 बादाम, 1/4 चम्मच इलायची पाउडर।

विधि : उथले तवे पर मंद आँच में मूंगफली के दाने, काले तिल और कसा हुआ ताजा नारियल अलग-अलग सेंक लें, और उन्हें ठंडा करने के लिये अलग रख दें। मूंगफली के दानों के छिलके अलग कर लें। तवे पर एक चम्मच घी ले कर बादामों को भी 1 मिनट सेंक लें और उन्हें भी अलग रख दें।

2 - 3 चम्मच घी के साथ रागी का आटा तवे पर रख कर 15 - 20 मिनट तक सेंकें। ज़रूरत लगे तो और घी डालें। फिर सेंके हुए बादाम, तिल, मूंगफली के दाने और कसा हुआ नारियल मिलायें और सब को अच्छी तरह हिला कर मिलायें। शक्कर और इलायची पाउडर मिला कर 2 मिनट और हिलायें। बर्नर बंद करके इसे ठंडा होने दें। अपने हाथों पर घी लगा कर उन पर 3 - 4 चम्मच तैयार मिश्रण रखें और हाथों से उसे गोलाकार बनायें। जरूरत लगे तो ज्यादा गोल, कड़े लड्डू बनाने के लिये और घी लें। एक-एक करके सारे मिश्रण से लड्डू बना कर थाली में रखते जायें।

#4. रागी लड्डू :

सामग्री > 1.5 कप रागी आटा, 1.5 कप गुड़, या नारियल शक्कर या शक्कर का पाउडर, 1/2 कप घी या नारियल तेल, 4 इलायची का पाउडर, 3 कप पानी, 1/2 कप काजू, काजू को तलने के लिये 1 चम्मच घी।

सूचना : गुड़ और नारियल शक्कर नारियल के तेल के साथ अच्छे रहते हैं और गुड़ घी के साथ अच्छा रहता है। विधि : काजुओं को 1 चम्मच घी या नारियल के तेल में तल लें और अलग रख दें। रागी के आटे में पानी मिला कर पेस्ट बना लें। मोटे तले के बर्तन में मिश्रण को गरम करें, लगातार हिलाते रहें। 3 मिनट बाद इलायची पाउडर और शक्कर मिलायें।

नारियल तेल या घी मिलाना शुरू करें, एक समय दो चम्मच डालें जब तक पूरा न हो जाये और हिलाते रहें। आँच कम करके 3 - 4 मिनट हिलाते रहें। मिश्रण धीरे-धीरे गेंद जैसा बनता जायेगा।

उसमें तले हुए काजू मिला कर 2 - 3 मिनट पकायें और लगातार मिलाते/हिलाते रहें। जैसे जैसे मिश्रण पकेगा, रागी के गोले में से तेल/घी अलग होता जायेगा। सारे तेल/घी को अलग कर के हलवे को गरम गरम परोसें।

#5. रागी पकोड़ा :

सामग्री > 2 कप रागी आटा, 1/4 कप बेसन, 2 कप बारीक कटी हुई पत्ता गोभी, 1/2 कप महीन काटी हुई शिमला मिर्च या बेल कालीमिर्च, 1 चम्मच करी पत्ते, 1/4 कप धनिया, 1 इंच अदरक का टुकड़ा, 1/2 कप काजू के टुकड़े, 1 चम्मच सफेद तिल, 200 मिली लीटर मूंगफली का तेल, 1 चम्मच नमक, 1/2 चम्मच चाट मसाला

विधि : अदरक के टुकड़े के छिलके को उतार कर उसे बारीक कूट लें। धनिया और करी पत्ते की पत्तियों को मोटा मोटा काट लें। पाता गोभी, सिमला मिर्च, अदरक, धनिया, करी पत्ते को एक कटोरे में मिला लें।

सूखी सामग्रियों - रागी का आटा, बेसन, काजू के टुकड़े, तिल, काली मिर्च/ लाल मिर्च पाउडर को एक बड़े पतीले में मिला लें। पकोड़े तलने के लिये तेल को गरम कर लें। अब सब्जियों, पत्तियों को दूसरी सामग्रियों के सूखे मिश्रण में अच्छी तरह मिला लें। पर्याप्त पानी डालते हुए इसे अच्छी तरह मल लें। मध्यम आकार के पकोड़े बनाकर उन्हें तेल में टालें। तैयार पकोड़ों पर चाट मसाला छिड़क कर परोसें।

सामग्री > 2/3 कप रागी आटा, 2/3 कप गेहूँ का आटा, 1/2 कप मक्खन, 1 चम्मच योगहर्ट, 1/2 कप ब्राउन शुगर, 1/4 चम्मच बेकिंग पाउडर, 2 चम्मच ताजी पीसी हुई इलायची, 1 चम्मच वेनिला अर्क।

विधि : रागी और गेहूँ के आटे को मिला कर उन्हें एक चपटे तवे पर फैला लें। पहले से गरम किये हुए ओवन में इसे 180° C. पर इसे सेंकें। तवे को थोड़े थोड़े समय पर हिलाते रहें जब तक ये अच्छी तरह से सिंक न जाये (6 -7 मिनट)। इसी बीच मक्खन और शक्कर को मिला कर अच्छी तरह फेंटें जब तक ये चिकना और क्रीमी न हो जाये। योगहर्ट में बेकिंग पाउडर मिला कर उसमें इलायची पाउडर, वेनिला आदि मिला लें। जब आटे का मिश्रण ठंडा हो जाये तो उसमें सभी सामग्रियाँ मिला कर एक गोला बना लें।

इस गोले के 4 बराबर के टुकड़े काटें, और फिर हर टुकड़े में से 5 गोले बनायें। इन सकभी गोलों को चिकनाई लगे तवे पर रखें और एक फॉर्क से गोलों को चपटा बनायें। इनकी ऊपरी सतह पर एक दूसरे को काटती हुई रेखायें बनायें। अब इन्हें 180°पर 12 मिनट तक सेंकें। उन्हें ठंडा होने दें, फिर हटायें। एयरटाइट टिन में 1 दिन तक बंद रखें, जिनसे उनमें स्वाद तैयार हो। हाँ, ईशा शोप्पी से आप तैयार कुकीज़ घर पर ही मंगा सकते हैं।

#7. रागी डोसा :

सामग्री > रागी डोसा मिक्स ( ईशा शोप्पी में तैयार मिलता है। विधि : तवे को गरम कर के डोसा मिक्स को उस पर करछुल से डालें और धीरे-धीरे तवे को उठाकर, घुमाकर, उसे एक पतले गोलाकार रूप में फैलायें। रागी डोसे आसानी से नहीं फैलते क्योंकि वे फट जाते हैं। किनारों पर और बीच में कुछ तेल से चिकनाई लगायें। कुछ मिनट बाद दूसरी ओर पलट दें। कुछ मिनट बाद डिश में परोसें।