क्या नशा करना एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है?

क्या ड्रग्स लेना आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है? क्या पेड़-पौधों से मिलने वाले भांग, चरस इत्यादि जैसे नशीले पदार्थ एक आध्यात्मिक खोज में लगे व्यक्ति के लिए सही हैं?
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एक अमेरिकन दुःस्वप्न

सद्गुरु : कहते हैं कि न्यूयॉर्क शहर में 70 प्रतिशत लोग नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं और 20 प्रतिशत अत्यधिक शराब पीते हैं। न्यूयॉर्क शहर के लोगों का ऐसा हाल होते हुए भी हर कोई वहाँ जाना चाहता है।

कोई भी व्यक्ति, समाज या देश समृद्धि चाहता है क्योंकि पहले स्तर पर यह हमें अपने पसंद का आहार चुनने के विकल्प देती है। अगले स्तर पर यह हमें अपनी पसंद की जीवनशैली चुनने की क्षमता प्रदान करती है। अमेरिका जैसे समृद्ध देश में जहाँ अपनी पसंद के खान-पान और जीवनशैली के कई प्रकार मौजूद हैं, 70 प्रतिशत जनसंख्या चिकित्सीय इलाज पर है। बाकी 30 प्रतिशत इसे गलत तरीके से खरीदते हैं। अमेरिका में 30 करोड़ की जनसंख्या के लिए तीन लाख करोड़ डॉलर स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होते हैं।

अगर खान-पान और रहन-सहन के इतने विकल्प मौजूद हों तो अच्छे स्वास्थ्य की आशा करना स्वाभाविक ही है। लेकिन ऐसा अगर नहीं हो रहा है तो हमें इस पर गौर करना होगा। क्योंकि यह सवाल केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि हर जगह लागू होगा। क्योंकि अमेरिका आज सबके लिए एक महत्त्वाकांक्षा बन गया है तो हर कोई प्रयास कर रहा है बस वहाँ तक पहुँचने के लिए और परिणामस्वरूप बीमार होने के लिए।

उदाहरण के लिए, 40-50 साल पहले जब लोगों को अपनी बेटियों का ब्याह करना होता था तो वो कहते थे, "ओह, उस घर के लोग शराब पीते हैं, वहाँ हम अपनी बेटियों का ब्याह नहीं करेंगे।" लेकिन आज अगर शराब न हो तो आपके यहाँ शादी में कोई नहीं आएगा। इतना बदलाव हम इस दुनिया में पिछले पचास वर्षो में ही देखने लगे हैं।

विस्तार का कृत्रिम अनुभव

दरअसल हम उस जगह पहुंच रहे हैं जहाँ स्वस्थ रहने के लिए हमें केमिकल्स चाहिए, खुश रहने के लिए केमिकल्स चाहिए, शांति के साथ रहने के लिए केमिकल्स चाहिए, और तो और, परमानंद के लिए तो एक्स्टैसी नाम की ड्रग है ही।

क्या आपको लगता है कि आप अपनी क्षमताओं को कम करके अपने जीवन को ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं?

लोग आतंरिक अनुभव के लिए किसी प्रकार के केमिकल्स की तरफ क्यों जा रहे हैं? चाहे वो भांग, चरस, शराब, गांजा, कोकेन, एलएसडी या कुछ और हो, यह सब हमारी आतंरिक रुकावटों को कुछ देर के लिए समाप्तकर हमें आजादी का अनुभव कराती हैं। मान लीजिये किसी को ‘मेथ’ केमिकल की आदत है, उसे इतने शानदार अनुभव होते हैं कि वो इसे छोड़ नहीं सकता। लोगों के दिमाग में इतना मैल भरा है कि उन्हें थोड़ा खुलने के लिए केमिकल्स की जरूरत पड़ती है। आपको ये समझना चाहिए कि ये आपकी क्षमताओं की कीमत पर आता है। क्या आपको लगता है की आप अपनी क्षमताओं को कम करके जीवन की ऊंचाइयों को छू सकते हैं?

ये केमिकल आपको अपने अंदर विस्तार का एक अनुभव तो कराते हैं किन्तु यह अनुभव कृत्रिम है। अगर आप यह सोचते हैं कि "कम से कम मुझे यह तो ज्ञात हुआ कि मेरा विस्तार संभव है," तो इसका यह उद्देश्य फिर भी ठीक है। लेकिन एक बार आप इसे लेना शुरू कर दें तो अपनी क्षमताओं को कुछ समय के बाद कम करने लगते हैं। कुछ दिनों के बाद अगर कुछ बाकी रहता है तो वह है केवल ड्रग्स।

अगर कोई चीज़ काम करती है तो उसे हमेशा काम करना चाहिए। आप आयहुआस्का रोज लीजिए और देखिये क्या होता है। हो सकता है एक समय इसने आपकी सीमाओं और रुकावटों को समाप्त कर दिया हो जिसकी वजह से आपने कुछ अनुभव किया हो। लेकिन क्या ये हमेशा आपके लिए वही अनुभव ला सकता है? नहीं, जब आप एक गोली खाते हैं केवल तभी आपको अनुभव होता है और जब ये आपके पास नहीं होता तब आप कुछ भी नहीं रहते। तब आप केवल एक मंदबुद्धि बनकर रह जाते हैं।

समस्या केवल यह नहीं है कि केमिकल आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और आपको मार सकते हैं। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि ये आपको आजादी का एक बनावटी अनुभव कराते हैं - आपको ये अगर कुछ दे रहा है तो केवल एक व्यसन, एक विवशता।

 

अगर आप किसी पहाड़ की चोटी पर चढ़ें और वही खड़े रहें तो एक क्षण के लिए आपको सब कुछ बहुत शानदार लगेगा लेकिन ये बहुत देर नहीं रहेगा। चाहे वो पहाड़ हो या ड्रग्स, इसका असर ज्यादा देर नहीं रहेगा। प्रश्न यह नहीं है कि आपका अनुभव कितना बड़ा है, प्रश्न है कि यह आपमें कितना रूपांतरण लाता है। आप ज़रा उन लोगों को देखिये जिन्होंने इन ड्रग्स का इस्तेमाल किया है - क्या वे सचमुच रूपांतरित हुए हैं? क्या ड्रग्स आपकी समझ को इतना बढाते हैं कि आप जीवन के हर पहलू को जान जाएं? नहीं, ज्यादातर इनका अनुभव लोगों के सामने शेखी बघारने तक ही सीमित रहा है।

कुछ अलग प्रकार का आनंद

अगर ड्रग्स या शराब में मज़ा नहीं आता तो लोग इस राह पर नहीं जाते। लेकिन ये मज़ा कुछ इस प्रकार का है कि लिफाफे के ऊपर "सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है" लिखा होने के बावजूद लोग सिगरेट पीते हैं, नतीजा चाहे जो हो।

अगर आप यह जान जाएं कि इंसान का शरीर किस तरह काम करता है तो स्वाभाविक ही आप अपने लिए उच्चतम श्रेणी का आनंद उत्पन्न करेंगे। प्रश्न केवल इस बात का है कि क्या आपने इस सम्भावना का पता लगाया है?

हमारा शरीर इस दुनिया की सबसे परिष्कृत और जटिल केमिकल फैक्ट्री है। अगर कोई आपको इतना जटिल यंत्र दे दे तो क्या आप वही नहीं बनाएंगे जो आप चाहते हैं? अभी आप अप्रसननता पैदा करने में जुटे हुए हैं क्योंकि आपको अपनी शारीरिक प्रणाली को ठीक तरह से चलाना नहीं आता।अगर आप इसे ठीक प्रकार से चलाएं तो आप अपने अंदर ऐसा आनंद उत्पन्न करेंगे कि आपको ड्रग्स जैसी चीजों को छूने तक की जरूरत नहीं पड़ेगी। असल में केवल जीवित होना ही अपने आप में इतना सुंदर है। बदकिस्मती से हमने लोगों को खुशी को जानने का कोई और तरीका नहीं सिखाया, इसलिए आज वे लोग केमिकल्स ले रहे हैं।

जबरन किसी को ड्रग्स की आदत से छुटकारा दिलाने का प्रयास कभी काम नहीं करता। आपको उन्हें ऐसे आनंद से अवगत कराना होगा जो ड्रग्स के आनंद से कहीं अधिक हो। मनुष्य की चेतना इस सब के परे है। इस ब्रह्मांड में सबसे सशक्त अगर कुछ है तो वो है चेतना। आप सोचते हैं कि कोई पत्ती, फल, केमिकल या शराब इससे बेहतर हो सकती है। अगर आप यहाँ केवल बैठकर परमानन्द में जा सकते हैं तो आप सिगरेट, शराब या कुछ और नहीं लेंगे क्योंकि आपके शरीर में ही आपको इतने केमिकल्स मिलेंगे जो और कहीं नहीं मिल सकते।

 

अगर आप यह जान जाएं कि इंसान का शरीर किस तरह काम करता है तो स्वाभाविक ही आप अपने लिए उच्चतम श्रेणी का आनंद उत्पन्न करेंगे। प्रश्न केवल इस बात का है कि क्या आपने इस सम्भावना का पता लगाया है?

आने वाली पीढ़ियों को बचाएं

इंसान को केवल सुख ही नहीं, जीवन में एक उद्देश्य भी चाहिए।

कृत्रिम वस्तुओं से आतंरिक अनुभव पाने की यह जो क्रांति आयी है, मुझे लगता है कि अगर हम अगले 15 से 30 वर्षो में कुछ महत्त्वपूर्ण कदम नहीं उठाते हैं, तो 90 प्रतिशत जनसंख्या केमिकल्स पर होगी। अगर हम सब आतंरिक अनुभव के लिए केमिकल्स लेने लगे तो हम जो अगली पीढ़ी को जन्म देंगे वो हमसे कमतर होगी। ये मानवता के खिलाफ एक अपराध होगा। हमारी अगली पीढ़ी हमेशा हमसे एक कदम आगे होनी चाहिए।

इंसान का मन जिस प्रकार का है, अगर ये केमिकल्स का उपयोग बेकाबू हो गया तो आपको हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर अगले 60-70 वर्षो में जनसंख्या का एक बड़ा भाग आत्महत्या करने लगे। इंसान को केवल सुख ही नहीं, जीवन में एक उद्देश्य भी चाहिए। केमिकल्स के प्रयोग से आपको सुख तो मिलता है लेकिन आप अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं। जब ऐसा होता है तो आप देखेंगे कि दुनिया में आत्महत्या का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

हमें ऐसा नहीं होने देना चाहिए। इसके लिए केवल यही उपाय है कि हम सचेतन मानवता का निर्माण करें। मानव चेतना को ऊपर उठाना सबसे ज्यादा जरूरी है।

 

Editor's Note:इनर इंजीनियरिंग खुशहाली के लिए योग विज्ञान से निकली एक टेक्नॉलोजी है। अपने जीवन को रूपांतरित करें - सद्गुरु के साथ। ऑनलाइन कोर्स में सद्गुरु द्वारा संचालित 90-मिनट के सात सत्र हैं। इनर इंजीनियरिंग आत्म-खोज और रूपांतरण का एक अनोखा अवसर प्रदान करता है, जिससे जीवन में तृप्ति और आनंद आता है। 50% की छूट 5 जुलाई तक। अभी रजिस्टर करें: https://isha.co/ieo-hindi