क्या दैनिक कामकाज से दूर रहने से आध्‍यात्मिक विकास होगा?

हमारी दिनचर्या ऐसी होती है कि अपने लिए समय निकालना बहुत मुश्किल लगता है। ऐसे में क्या अपने कामकाज से दूर हो जाना सही विकल्प है? क्या ये आध्यात्मिक प्रगति में मदद कर सकता है? जानते हैं
 

प्रश्न: जब मैं जानबूझकर खुद को अपने कामकाज से थोड़ा अलग कर लेता हूँ, तो इससे मिलने वाला आनंद साफ दिखता है। ऐसा क्यों है? और क्या ऐसा करना अच्छी बात है?

सद्‌गुरु:  कुछ समय के लिए किसी भी कामकाज से दूर होना अच्छी बात है, पर हो सकता है कि आपको यह न पता हो कि आपको उससे अलग कैसे होना है या हो सकता है कि आपके पास ज्यादा काम ही न हो, और इसीलिए आपको ऐसा करने का अधिकार ही न हो। ज्यादातर लोग जब ख़ुद को अलग करना चाहते हैं, तब उन्हें ऐसा करने का हक नहीं होता। उनके जीवन में ऐसा मौका नहीं बनता क्योंकि उन्हें मकान की किश्त अगले पैंतीस सालों तक अदा करनी है। कार का पंद्रह साल का लोन चुकाना है। बीमा की किस्त जमा करनी है, और उन्हें अपने लिए कब्रिस्तान में लिए गए प्लॉट की किश्त भी तो भरनी है।

सिर्फ कुछ समय के लिए ऐसा करना ठीक है

मिनेसोट्टा के एक इंसान के साथ ऐसा ही हुआ। उसने अपना सारा पैसा, अपने लिए एक ऐसी आलीशान जगह खरीदने में लगा दिया, जहाँ उसे मरने के बाद दफनाया जा सके।

जीवन की गतिधीमी करना कोई हल नहीं है। लेकिन कुछ दिन के लिए जानकर ऐसा करना ठीक रहेगा क्योंकि इस तरह आपको अपने लिए कुछ खास काम करने का समय मिल सकेगा।
कब्रिस्तानों में भी ऐसी जगहें होती हैं जिन्हें ‘खास’ कहा जाता है। जब वह सत्तर साल का हुआ तो वह समुद्री यात्रा पर निकला। उसका जहाज डूबा और वह उसी पानी में कहीं खो गया। आप कब्रिस्तान में खरीदी गई जगह बेच भी नहीं सकते। लोग कई तरह से उलझे हुए हैं, वे इन सभी बातों से छूट नहीं सकते, इसलिए शायद सिर्फ अपनी गति को थोड़ी धीमी कर लेना ही उनके लिए संभव है। अगर वे स्वयं को हर चीज से अलग कर भी लेते हैं तो उन्हें यह पता नहीं होता कि उन्हें उस दौरान ख़ुद को कैसे मैनेज करना है। धीमी रफ़्तार आपके लिए कारगर हो सकती है, पर अगर आपने हमेशा ऐसा किया तो आप अपने जीवन को मसल देंगे।

मिसाल के लिए, आपके पास एक कार है। अगर यह माह में एक बार सर्विसिंग के लिए जाती है, तो हम हर चीज को स्विच ऑफ करके पैसे बचा सकते हैं, और जब यह वापिस आए तो इसे ऐसा होना चाहिए कि यह नियमित गति से भाग सके। अगर इतना भी न हो पाए, तो ऐसी कार रखने से कोई फायदा ही नहीं होगा।

अगर आप जानकर कुछ दिन के लिए अपनी गतिविधियां धीमी कर रहे हैं, तो ठीक है। पर अगर आपको केवल स्लोडाउन करने से ही खुशी मिलती है तो आप अपने जीवन में एक जगह जाकर ठिठक जाएँगे। अगर यह शरीर, मन और जीवन आपको अपनी सीमाओं से पार जाने की इजाजत नहीं देता, तो कई तरह से आपका जीवन बरबाद ही माना जाएगा।

आप यहाँ खुद को संभालकर रखने नहीं आए हैं। अगर आप कोई दुर्लभ प्रजाति के होते तो आपके मरने के बाद आपको संभालकर रखने के बारे में सोचा जाता। पर जब आप जिंदा हैं तो आप को बचाकर रखने की जरूरत नहीं है। आपको जीवन को पूरे वेग के साथ बढ़ने देना होगा। जीवन की गतिधीमी करना कोई हल नहीं है। लेकिन कुछ दिन के लिए जानकर ऐसा करना ठीक रहेगा क्योंकि इस तरह आपको अपने लिए कुछ खास काम करने का समय मिल सकेगा। अगर हर चीज से अलग होना संभव न हो, तो स्लोडाउन (अपनी गतिविधियां धीमी) करना एक विकल्प हो सकता है, परंतु यह हमेशा के लिए नहीं बल्कि तयशुदा समय