बिना विज्ञान के कैसे मिला आयुर्वेद का ज्ञान

आयुर्वेद में लगभग एक लाख से ज्यादा औषधियां हैं, जो किसी ने प्रयोगशाला में बैठकर तैयार नहीं की हैं। वे लोग जंगलों में सहज रूप से घूमते थे और पौधे उनसे बात करते थे।
बिना विज्ञान के कैसे मिला आयुर्वेद का ज्ञान
 

पौधे करते हैं बात

अगर कोई इंसान अपने स्वाधिष्ठान और मूलाधार दोनों पर एक साथ महारत हासिल कर ले तो पौधे तक उससे बात करने लगते हैं। ‘पौधे बात करने लगते हैं’, इस बात को समझने के लिए आपको आयुर्वेद का सिस्टम समझना होगा। आयुर्वेद में लगभग एक लाख से ज्यादा औषधियां हैं। यह आधुनिक औषधि-विज्ञान से कहीं ज्यादा विस्तृत और विशाल है। ये फार्मूले किसी ने प्रयोगशाला में बैठकर तैयार नहीं किए। वे लोग जंगलों में सहज रूप से घूमते थे और पौधे उनसे बात करते थे। इस धरती पर मौजूद दूसरे जीवन की भाषा आपको तब समझ आने लगती है, जब आपके ‘स्व’ की एक खास तरह की मिठास आपको शरीर की बाध्यताओं से मुक्त कर देती है। जब ऐसा होता है तो आपके आसपास मौजूद हर चीज की भाषा आपकी अपनी भाषा बन जाती है।

कभी-कभी जब आप टहल रहे होते हैं तो आपने गौर किया होगा कि अचानक कोई गंध आपको मोहित कर देती है। बहुत सारे लोग अपने दिमाग में भरे कचरे में इस कदर खोए रहते हैं कि वह किसी गंध को महसूस ही नहीं कर पाते।

पौधों ने उन लोगों से बात की, इसका ये मतलब नहीं कि पौधे उनसे यह कह रहे थे, ‘कृपया आप मुझे खाइए, मैं आपकी डायबिटीज ठीक कर दूंगा।’ पौधे उनसे ऐसा कुछ नहीं कह रहे थे, लेकिन उन लोगों के सामने पौधों की विशिष्टताएं और वह क्या कर सकते हैं, जैसी सारी चीजें खुद-ब-खुद सामने आ जातीं।

 

 

आप अपने शरीर व मन के स्तर पर कैसे हैं, उसी के मुताबिक कोई गंध आपको अपनी ओर आकर्षित करती है। कभी-कभी जब आप टहल रहे होते हैं तो आपने गौर किया होगा कि अचानक कोई गंध आपको मोहित कर देती है। बहुत सारे लोग अपने दिमाग में भरे कचरे में इस कदर खोए रहते हैं कि वह किसी गंध को महसूस ही नहीं कर पाते। तेलगु में कहावत है - ‘भला कोई गधा चंदन की महक को कैसे समझ सकता है?’ किसी भी उम्दा महक को महसूस करने के लिए एक खास तरह की संवेदनशीलता की जरूरत होती है।

आपके भीतर एक खास तरह का आनंद होना चाहिए, ताकि जब आप बाहर निकलें तो पौधे आपसे बात करें। यही वो तरीका था, जिसके जरिए प्राचीन काल में लोगों ने हजारों किस्म की पत्तियों और जड़ों का पता लगाया कि ये चीजें हमारे लिए क्या कर सकती हैं।

 

एक खास स्तर की भीतरी मधुरता

आपने इसे अपने साथ भी महसूस किया होगा। जब आपका मन अपनी ही बेकार की बातों से भरा होता है तो आप फूलों की सुगंध भी महसूस नहीं कर पाते। लेकिन जब आप कभी प्रसन्नता से टहल रहे होते हैं तो अचानक वही फूल आपको महकते हुए लगते हैं। फूल तो हमेशा से ही महक रहे थे, बात सिर्फ इतनी है कि उस महक को महसूस करने के लिए किसी और चीज की जरूरत थी, जो तब आपके पास नहीं थी। चाहे फूल हों या न हों, पेड़ों की, जीवन की, इस धरती की, हर चीज की अपनी एक महक होती है। उनकी सिर्फ महक ही नहीं होती, बल्कि उनकी एक अपनी गूंज भी होती है। लेकिन उसे महसूस करने के लिए आपके भीतर एक खास स्तर की मधुरता का होना जरुरी है।

आपके पास कहने के लिए कुछ तभी नहीं होगा, जब आप अपने अस्तित्व की सीमाओं को महसूस कर लेंगे। अगर आपको लगता है कि आप बहुत बड़े हैं, तो आपके पास हमेशा कहने के लिए कुछ न कुछ रहेगा।

आपके भीतर एक खास तरह का आनंद होना चाहिए, ताकि जब आप बाहर निकलें तो पौधे आपसे बात करें। यही वो तरीका था, जिसके जरिए प्राचीन काल में लोगों ने हजारों किस्म की पत्तियों और जड़ों का पता लगाया कि ये चीजें हमारे लिए क्या कर सकती हैं। उनमें से कोई भी व्यक्ति पत्तियों या जड़ों को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर घंटों निहारते नहीं बैठा रहा, यह जानने के लिए कि ये हमारे लिए क्या कर सकती हैं, इनकी संरचना कैसी है, इनका हमारे डीएनए पर क्या असर होता है, आदि। हमें ये सारी चीजें सिर्फ इसलिए पता चलीं, क्योंकि पौधों ने हमें बताया। पौधे हम से तभी बात करेंगे, जब हम पूरी तरह से चुप होंगे, जब हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं होगा। आपके पास कहने के लिए कुछ तभी नहीं होगा, जब आप अपने अस्तित्व की सीमाओं को महसूस कर लेंगे। अगर आपको लगता है कि आप बहुत बड़े हैं, तो आपके पास हमेशा कहने के लिए कुछ न कुछ रहेगा।

 

 

देखिए आज से बस बीस-पच्चीस साल पहले ज्यादातर लोग साल में एकाध बार फोन किया करते थे। लोग किसी एक दिन पोस्ट-ऑफिस जाते थे, जहां एक काला सा दानव बैठा होता था और वह उसे डायल करते थे। वो एक बड़ा मौका हुआ करता था। क्योंकि फोन तभी किया जाता था, जब कोई बड़ी बात हो जाए। मसलन आप की मां बीमार हैं, आपकी दादी गुजर गईं या ऐसा ही कुछ हुआ हो। जब ऐसी कोई घटना घटती, तभी आप फोन का इस्तेमाल करते थे। लेकिन आज अचानक हर व्यक्ति के पास कहने के लिए बहुत कुछ है। बेशक तकनीक ने हमें सक्षम बनाया है, हम इसका इस्तेमाल अपनी भलाई के लिए कर सकते हैं, इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन आपको लगता है कि इन गैजेट्स की वजह से आप बहुत बड़े बन गए हैं, लेकिन जैसे ही इनकी बैटरी खत्म होती है, अचानक आप भी गायब हो जाते हैं। आपके पास उसे चार्ज करने के लिए अगर कोई उपाय नहीं है, तो जैसे सबकुछ खत्म हो गया। अचानक ही आप मूर्ख नजर आने लगते हैं, क्योंकि आपका स्मार्टफोन अब काम नहीं कर रहा। तो जाहिर सी बात है कि स्मार्टनेस का बड़ा कारण आपका फोन ही था।

तो स्वाधिष्ठान और मणिपूरक दो ऐसे आयाम हैं, जिनकी मदद से इंसान कई तरह की चीजें कर सकता है। हम जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाते हैं, यह कम से कम सक्षम, लेकिन ज्यादा से ज्यादा भेदक होता जाता है। एक तरीके से मणिपूरक स्वाधिष्ठान और मूलाधार का परिणाम है।

 

 
 
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