#1. अपने आप को एक्सप्रेस करने के लिये सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करें?

सद्‌गुरु: आप में से वे लोग जो फेसबुक और ट्विटर पर बेनामी या दूसरे फ़र्ज़ी नाम से अकाउंट चला रहे हैं, कृपया उन्हें तुरंत बंद कर दें और वहां अपने नाम से काम करें। ‘मैं यह हूँ और मैं यह कहना चाहता/ती हूँ’, यह आप का तरीक़ा होना चाहिये। यदि आप अपना नाम भी देना नही चाहते तो आप को किसी विषय पर अपनी बात कहने का कोई हक नहीं है। आप किसी के पीछे छुप कर किसी दूसरे पर पर मनमाने ढंग से चिल्ला नहीं सकते हैं। अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो उसके लिये जिम्मेदारी लीजिए।

 

 

#2. हम अपना जीवन सहजता से कैसे जिएं?

सदगुरु: एक सीधी बात यह है कि आप किसी को कम या नीचा मत समझिए, न ही किसी को अधिक या ऊंचा। यह बहुत सरल लगता है। इसका मतलब यह है कि आप अपने दिमाग में यह निर्णय कर के मत बैठिये कि क्या अच्छा है, क्या बुरा है, क्या ऊंचा है,क्या नीचा है, क्या पुण्य है, क्या पाप है? आप जीवन को इस प्रकार देखिये जैसा वह है। अगर जीवन को वैसा देखेंगे जैसा वह है तो आप सहजतापूर्वक जी सकेंगे।

 

#3. मुझे किसे वोट देना चाहिये?

सदगुरु: मेरी बेटी भी अगर मुझसे आ कर पूछे कि मुझे किसे वोट देना चाहिये? तो मैं नहीं बताऊंगा। मैं उससे कहूंगा, ‘तुम्हें यह देखना चाहिए कि तुम्हारे लिये और तुम्हारे आसपास के लोगों के लिये क्या अच्छा है और उसके अनुसार तुम्हें उस पार्टी के लिये वोट देना चाहिए’।

जब सभी लोग व्यक्तिगत स्तर पर ख़ुद विचार करें और फिर वोट डालें, सिर्फ किसी एक पार्टी से बंध कर नहीं, तभी लोकतंत्र जीवित रहेगा।

आज लोग धर्म, जाति, नस्ल और ऐसी ही ऊल जलूल बातों के आधार पर वोट देते हैं। यह बदलना चाहिए। जब सभी लोग व्यक्तिगत स्तर पर ख़ुद विचार करें और फिर वोट डालें, सिर्फ किसी एक पार्टी से बंध कर नहीं, तभी लोकतंत्र जीवित रहेगा। यदि कोई एक बात कहता है और लाखों लोग उसी आधार पर वोट देते हैं तो इसका अर्थ यह है कि आप ने लोकतंत्र को एक सामंतवादी प्रक्रिया बना दिया है।

लोकतंत्र की बहुमूल्य बात यह है कि इसमें खून खराबा किए बिना सत्ता परिवर्तन हो जाता है। मानवता के इतिहास में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। यदि परिवार में भी सत्ता बदलती थी तो एकाध का खून बहता था। पिछले 100-150 वर्षों में पहली बार हमने बिना खून बहाये नेतृत्व बदल दिया है। इसको कम कर के मत आंकिए।

Subscribe

Get weekly updates on the latest blogs via newsletters right in your mailbox.

 

 

#4. आदर्श शिक्षा व्यवस्था क्या है?

सदगुरु: आज देश में जिस तरह से शिक्षा व्यवस्था चल रही है, हमें निश्चित रूप से इस पर फिर से विचार करना चाहिए। हमने सभी के लिये एक ही शिक्षा प्रक्रिया रखी है, लेकिन हर कोई उसी एक प्रक्रिया से गुज़रने के क़ाबिल नहीं होता। जिनको ऊँचे दर्जे की पढ़ाई में रुचि है, उन्हें एक तरह की शिक्षा देनी चाहिए, जिनको सिर्फ जीवन-यापन के लिये कमाई करनी है उन्हें दूसरी तरह की शिक्षा लेनी चाहिए, किसी तीसरे के पास कोई और क्षमता है तो उसे अलग तरह की शिक्षा देनी चाहिए।

जरूरत इस बात की है कि छोटी उम्र में, लगभग 12 वर्ष की उम्र तक हरेक को दो भाषाएँ अच्छी तरह से सिखानी चाहिए। आप अंग्रेजी पढ़ें और अपनी मातृभाषा पढ़ें। हमें बच्चों को बहुत ज्यादा विषय नहीं रटाने चाहिए। सिर्फ भाषा और समझ। मैं जो पढ़ता हूँ, वह समझता हूँ – बहुत हो गया। 12 वर्ष की उम्र होने पर आप मूल्यांकन कर सकते हैं कि किसे स्किल-ट्रेनिंग देनी चाहिए, किसे अपनी क्षमताओं में ऊँचे स्तर की विशेषज्ञता हासिल करनी चाहिये और किसे ऊँची शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहिए।

 

#5. एक वकील के तौर पर मुझे क्या किसी गुनाहगार का बचाव करना चाहिए?

सदगुरु: आपका पेशा एक संवैधानिक जिम्मेदारी है। यह देखना आप का काम नहीं है कि क्या सही है और क्या गलत? आप का काम है, जो इंसान आप के पास आता है, उसकी खुशहाली के लिए कानून का इस्तेमाल करना। हो सकता है, वह दोषी हो, उसने कोई गुनाह किया हो। कभी-कभी गुनाह इतना भयंकर हो सकता है कि एक मानवतावादी प्रश्न खड़ा हो जाय, ‘क्या मुझे इस व्यक्ति को बचाना चाहिए’? आप इसे अपनी दुविधा, अपना नैतिक धर्मसंकट न बनाएं, यह न सोचें कि ‘इसने ऐसा कुछ किया है जो मुझे नापसंद है, उसे सजा होने दो’। आप का काम यह तय करना नहीं है। आप का काम है कि आप सिर्फ कानून के मतलब निकालें और उसका इस्तेमाल करें जिससे सभी को बराबर मौक़ा मिले।

 

#6. हम जीवन में सही निर्णय या सही चुनाव कैसे करें?

सदगुरु: आप को ख़ुद पर अपनी निराशाएं और चिंताएं नहीं लादनी चाहिए। जब ऐसा कोई सवाल आप के जीवन में बहुत गंभीर मुद्दा बन जाए तब कम से कम 3 से 10 दिनों के लिये अवकाश ले लें। यह 3 से 10 दिन का समय इस तरह बितायें कि आप पर अपने साथियों, शिक्षकों, माता पिता या समाज का कोई दबाव न हो। अपना फोन भी बंद कर दें। यह कुछ समय अपने आप के साथ गुज़ारें और देखें, शांत मन से विचार करें।

मुझे एक बात सच्चाई से बताइये, ‘क्या आप का जीवन आप के लिये कीमती है?’ अगर ऐसा है तो आप अपना यह जीवन किसमें लगा रहे हैं, यह आप के लिये चिंता का विषय होना चाहिए। आप को कोई काम सिर्फ इसलिए नहीं करना चाहिए कि कोई और वैसा कर रहा है या कह रहा है। यदि यह जीवन आप के लिए कीमती है तो आप को देखना चाहिये कि आप के लिये वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है और आप को वही करना चाहिए।