मानव चेतना को ऊपर उठाना, आज पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिससे कि तकनीक सशक्तिकरण का एक साधन बने, न कि विनाश का।

अगर हम दुनिया में चेतना की एक लहर पैदा कर दें, तो धरती को बचाना एक स्वाभाविक परिणाम होगा।

चेतनता व जागरूकता भौतिक से अभौतिक आयाम में एक बहुत बड़ी छलांग है।

शरीर व्यक्तिगत है, मन भी व्यक्तिगत है पर, चेतना व्यक्तिगत नहीं हो सकती, ये सिर्फ सर्व समावेशी ही हो सकती है।

वो हर काम, जो आप बिना जागरूकता के करते हैं, वो आप जागरूकता के साथ भी कर सकते हैं और इससे बहुत फर्क पड़ता है।

समाज को व्यक्तिगत चेतना को आकार नहीं देना चाहिये। मनुष्य की चेतना को समाज को आकार देना चाहिये।

अस्तित्व में सबसे बड़ी शक्ति है चेतना, और आप वही हैं।

चेतना कोई काम नहीं है, ये कोई विचार नहीं है और गुण भी नहीं है – चेतना पूरी सृष्टि की रचना का आधार है।

मनुष्य की चेतना पर काम किये बिना, सामाजिक, राष्ट्रीय या वैश्विक वास्तविकतायें बदली नहीं जा सकतीं।

अभी जिस चीज़ की सबसे ज्यादा जरूरत है, वो है मनुष्य की चेतना का विकास। चेतना के विकास के बिना विज्ञान, तकनीकें, विकास सब कुछ व्यर्थ हो जायेगा।

समय और स्थान बस आपकी चेतना के प्रक्षेप हैं।

Subscribe

Get weekly updates on the latest blogs via newsletters right in your mailbox.

आपको अपनी चेतना ऊपर उठाने की ज़रूरत नहीं है। आपको खुद को ऊपर उठाने की ज़रूरत है जिससे आप उस तक (चेतना तक) पहुँच बना सकें।

चेतना भौतिक नहीं है। जो भौतिक नहीं है, स्वाभाविक रूप से वह ‘एक’ है।

मनुष्य की चेतना को ऊपर उठाये बिना इस संसार में हम जो कुछ भी करेंगे, उससे बस दर्द और पीड़ा बढ़ते जाएंगे।

आपकी चेतना की प्रकृति, आपके जीवन में हर क्षण, आपके शरीर की हर कोशिका में जाहिर होती है।

हम जो कुछ भी हैं, उसका स्रोत चेतना ही है। हमारे विचार, इरादे और सभी काम उसी के परिणाम हैं।

चेतना कोई विचारों का समूह या समझ का कोई खास स्तर नहीं है। चेतना वो आयाम है जो हमारी भौतिकता से परे है।

अगर आप पर्याप्त ध्यान दें तो अस्तित्व में जो कुछ भी है, उसे मनुष्य की चेतना के आगे झुकना, खुलना और स्पष्ट होना ही होगा।

आज मनुष्यों के पास ज़रूरी योग्यतायें, साधन और तकनीकें हैं, जिससे वे धरती पर हर समस्या से निपट सकते हैं। सिर्फ एक ही बात नहीं है और वो है सर्व समावेशी चेतना। हम सभी को इसे एक सच्चाई बनाना है।

चेतना आपके अस्तित्व की, या आपके ‘होने’ की स्वाभाविक अवस्था है। आप अपनी पहचान अपने शरीर, विचारों और अपनी भावनाओं के साथ जोड़ कर उस अवस्था को खो देते हैं।

अगर हम चाहते हैं कि सारी मानवता विज्ञान और तकनीकों का लाभ ले, और उसका उपयोग धरती को बर्बाद करने में न करे, तो आज जो सबसे महत्वपूर्ण काम हमें करना चाहिये, वो है मनुष्य की चेतना को ऊपर उठाना।

आपकी चेतना तीव्रता से जिस चीज़ पर केंद्रित रहती है, वही आपके जीवन में और आपके आसपास के संसार में अभिव्यक्त या प्रकट होता है।

चेतना कोई विचारों का समूह या समझ का कोई खास स्तर नहीं है - यह एक असीमित आयाम है।

अगर मनुष्य चेतन अवस्था में हो, जागरूक हो तो दूसरों पर हावी होने की, दूसरों से संघर्ष करने की बात ही खत्म हो जायेगी।

चेतना सुरक्षित रखी जाने वाली कोई चीज़ नहीं है। चेतना का विस्तार होना चाहिए और इसे दुनिया में जिंदा रहना चाहिए।