हमारे शरीर और मन के परे का आयाम है, हमारी जीवन-ऊर्जा। आइये जानते हैं इसकी प्रकृति और इससे जुड़ी साधनाओं के बारे में कुछ सूत्र...

1. जब आप अपनी ऊर्जा-प्रणाली को बचे हुए कर्मों से मुक्त कर देते हैं, सिर्फ तभी आप अपनी नियति बदल सकते हैं। इसीलिए योग-क्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।

रूपांतरण

 

2. अगर आप कोई योग करते हैं और वह आपके भीतर ऊर्जा-ढांचे को नहीं बदल देता, तो मैं कहूंगा कि आप उसमें वक्त बरबाद न करें।

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3. जीवन-ऊर्जा डाल कर आप एक भौतिक रूप को ईश्वरीय शक्ति बना सकते हैं। यही देवी-देवताओं और यंत्रों के सृजन का विज्ञान है।

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4. बढ़ती उम्र के साथ आपका भौतिक-शरीर बूढ़ा होता जाएगा। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आपका ऊर्जा-शरीर भी बूढ़ा हो- आप इसे वैसा ही रख सकते हैं, जैसा यह पैदा होने के समय था।

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5. मेरा सपना है कि मैं सारे विश्व को ऊर्जा से प्रतिष्ठित करूँ। किसी भी इंसान को उपेक्षित और कम ऊर्जा वाले स्थानों में नहीं रहना चाहिए।

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6. अगर आप अपने शरीर, मन, और भावनाओं को खुला रखते हैं तो आपका जीवन काफी अच्छा हो जाएगा। अगर आप अपनी ऊर्जा प्रणाली को खोलते हैं तो यह जादुई हो जाएगा।

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7. हर चीज जो मैं जानता हूं, जो मेरे गुरु जानते थे, और जो संपूर्ण आध्यात्मिक परंपरा जानती थी, वह ध्‍यानलिंग में ऊर्जा के रूप में मौजूद है।

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संपादक की टिप्पणी:

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ईशा क्रिया परिचय, ईशा क्रिया ध्यान प्रक्रिया