सद्गुरु बता रहे हैं कि हमारा मन लगातार चलता क्यों रहता है। “विचारशून्यता” और “विचारहीनता” जैसे शब्दों, जिनका एक लंबे अरसे से प्रयोग किया जाता रहा है, का ज़िक्र करते हुए सद्गुरु पूछते हैं कि लाखों सालों के विकास के बाद मिले इस शानदार मन को कोई रोकना क्यों चाहेगा। वे याद दिलाते हैं कि मन समस्या नहीं है, समस्या बस इतनी है कि मन “अपनी खुद की कहानियां” बताते रहता है।

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Feb 8, 2022
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