मॉरिशस के मनोरम द्वीप से हाल ही लौटा हूं। मॉरिशस एक ऐसी जगह है, जहां कई तरह और कई पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं। इसे अरबी नाविकों ने खोजा, पुर्तगाली यहां भ्रमण के लिए पहुंचे, डच, फ्रेंच, और अंग्रेज यहां बस गए। यहां की आबादी भारतीय, अफ्रीकी, फ्रेंच, अंग्रेज, चीनी लोगों का मिला-जुला समाज है। जहां का अद्भुत खान-पान तीनों महाद्वीपों का एक संगम है।

हमारे पास काम करने और खेलने के लिए चार दिन थे। भारतीय उच्च आयोग द्वारा आयोजित परिचय वार्ता को सुनने के लिए काफी लोग आये थे। इसे सफल बनाने में मॉरिशस के पूर्व शिक्षा मंत्री व अन्य स्थानीय लोगों ने काफी मेहनत की। मॉरिशस के लोगों की इच्छा है कि यहां भी एक ईशा केंद्र बने। उचित मदद मिलने से वह इच्छा साकार भी हो सकती है। इस नए इलाके में ईशा क्रिया - आध्यात्मिकता की एक बूंद - के माध्यम से हम पहला कदम रखने जा रहे हैं। यह आगे चलकर एक ठोस नींव डालने का काम करेगी। जब यह साकार होने लगेगा, तब मेरे पास फिर से वापस आने का अच्छा एक बहाना होगा।

मॉरिशस के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात काफी अच्छी रही। ‘ग्रॉन्ड बेसिन'  की यात्रा काफी रोचक रही। ग्रांड बेसिन को यहां बसे भारतीय मूल के मॉरिशसवासी ‘गंगा तलाब' भी कहते हैं। झील जैसा यह जलाशय एक ज्वालामुखी के मुहाने पर बना है, यहां का पूरा नजारा काफी लुभावना है। कहा जाता है कि इस जलाशय का पानी गंगा से संवाद स्थापित करता है। स्थानीय लोग यहां एक लिंग की प्रतिष्ठा करने की योजना पर काम कर रहे हैं, जहां हमें आने के लिए निमंत्रित किया गया था। जिस लगन और श्रद्धा से इस जगह का रखरखाव किया गया जाता है, वो दिल को छू लेने वाला था। हमारा आदर सत्कार जिस गर्मजोशी से किया गया, वह भी काबीले तारीफ था।

गोल्फ खेलने के वे तीन दिन असाधरण थे। अनोखा, हैरतअंगेज प्राकृतिक सौंदर्य, झीलें और बेहतरीन मौसम .....

कहा जाता है कि मॉरिशस के ज्वालामुखी मृत न होकर सुप्तावस्था में हैं, जो कुछ हजार सालों में फिर से जीवंत हो सकते हैं। तब तक गोल्फ की बाजियों के लिए अपने पास पर्याप्त समय है।

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