देवी उल्लास की अभिव्यक्ति हैं। मेरी कामना है कि आप इस नवरात्री में भरपूर उल्लास को जानें।

जीवन एक रहस्य है, इसे समझने की कोशिश मत करें, इसका आनंद लें। नवरात्रि का त्योहार इसी मूल सूझ-बूझ पर आधारित है।

नवरात्रि मनाने का सबसे उत्तम तरीका है कि इसे उत्सव-भावना में मनाया जाए। जीवन का यही रहस्य है : बिना गंभीर हुए, खुद को पूरी तरह झोंक देना।

देवी एक चीख की तरह हैं - एक उन्माद, जो न तो पागलपन है और न ही विवशता, बस एक विशुद्ध आनन्द है।

देवी का उत्सव मनाने से आप जीवन की सच्ची सुंदरता को जान जाएंगे।
 

“स्त्री-प्रकृति या 'शक्ति' जीवन का एक शक्तिशाली आयाम है। 'शक्ति' के बिना किसी चीज़ का अस्तित्व नहीं होगा। ।

जो व्यक्ति देवी की कृपा हासिल करता है वह एक धन्य प्राणी है। आप एक ऐसा जीवन जीने लगते हैं, जो आपकी कल्पना, काबिलियत, और क्षमताओं से कहीं परे होता है। ।

“अगर आप देवी को खुद से ऊपर रखते हैं, तो आप उनकी कृपा के प्रति उत्तम रूप में उपलब्ध होंगे।" - सद्गुरु।

“अगर भक्ति से आपका हृदय पिघल गया है, तो देवी आपको ऐसे लाखों अलग-अलग तरीकों से मदद करेंगी, जिन्हें आप समझ भी नहीं सकते। ।

“जब आप खुद को खाली कर देते हैं, तब देवी के पास आपकी मदद करने के सिवाए कोई चारा नहीं रहता। और, अगर देवी आपके साथ हैं तो मेरे पास भी कोई चारा नहीं है (सिवाय इसके कि मैं भी आपका साथ दूं)। ।

“लिंग भैरवी के संपर्क में आने के कुछ दिनों के भीतर, देवी की ऊर्जाएँ आपको अनुभव के स्तर पर और बाहरी स्तर पर बेहतर बना सकती हैं।" ।

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“लिंग भैरवी के पास बस आधा हृदय ही है। वे प्रेम नहीं कर सकतीं, पर उनमें बहुत ज्यादा करुणा और शक्ति है। ।

“लिंग भैरवी आपको इतनी शक्ति दे सकती हैं कि आप अपनी व्यक्तिगत काबिलियतों से परे जाकर काम कर सकें। उनका कोई भौतिक या बाहरी शरीर नहीं है - यह चीज़ उन्हें और भी शक्तिशाली बनाती है। ।

लिंग भैरवी एक ही साथ उग्र भी हैं, और बहुत ज्यादा करुणामयी भी। ।

लिंग भैरवी बिल्कुल शुद्ध और निरंकुश जीवन हैं – वे खुद जीवन की उच्चतम संभावना हैं। ।
 

लिंग भैरवी में स्त्रीत्व है - आपको उन्हें आकर्षित करना होगा। आपको समर्पण के भाव के साथ उनसे जुड़ना चाहिये। ।

सिर्फ लिंग भैरवी की उपस्थिति में बैठने से, उनकी ऊर्जा की तीव्रता आप पर ज़बरदस्त असर डालती है। ।

लिंग भैरवी अग्नि हैं - एक स्त्री को ऐसा ही होना चाहिए। अग्नि का मतलब लड़ाई, क्रोध या ईर्ष्या नहीं है - अग्नि का मतलब है, रचना करने वाली आग। ।
 

अगर इस धरती पर स्त्रीत्व न रहे तो इस धरती पर न तो सुंदरता बचेगी, न ही कोमलता और न ही सच्ची सौंदर्य भावना - कुछ भी नहीं बचेगा। ।
  

 लिंग भैरवी आपको भौतिकता का आनंद इतनी जल्दी और पूरी तरह लेने देती है, कि आप स्वाभाविक रूप से अपना ध्यान किसी ऊँची चीज़ पर ले जायें।
 

 भक्ति अपने आपको मिटा देने का साधन है। लिंग भैरवी की ऊँची तीव्रता की ऊर्जा से आप एक आनंदित बेफिक्री महसूस कर सकते हैं।
 

जब हमारे जीवन में पुरुषत्व और स्त्रीत्व की भूमिका में समानता होती है, तब ही हमारे जीवन में सुंदरता और उद्देश्य हो सकता है। तो फिर, हम भैरवी के बिना कैसे रह सकते हैं?
 

लिंग भैरवी, दिव्यता की स्त्री-प्रकृति की अभिव्यक्ति हैं, पर वे एक लिंग के आकार में हैं। लिंग ही सृष्टि का सबसे मूल रूप है, जिसमें पुरुषत्व और स्त्रीत्व, ये दोनों ही पहलू होते हैं।
 

जिन्हें भैरवी की कृपा प्राप्त होती है, उन्हें न तो जीवन या मृत्यु, न ही गरीबी या असफलता के डर में जीना पड़ता है। वे सभी चीज़ें जिसे मनुष्य खुशहाली मानता है वह उनकी होगी, अगर वे सिर्फ भैरवी की कृपा प्राप्त कर लें।"
 

ईश्वर का उद्देश्य आपको यह चीज या वह चीज देना नहीं है। लिंग भैरवीआपमें पूर्णता लाकर आपको मुक्तिकी ओर बढ़ने में सहायता करती हैं।