कहानी: एक ज़ेन गुरु और उनके शिष्य एक बार नदी में नहाने के लिये गये। नहाने के बाद गुरु बाहर आये और जब वे चलने लगे तो उनके सभी शिष्य उनके पास आ गये।

तब एक शिष्य ने पूछा, "प्रिय गुरुजी, मैं आत्मज्ञान पाने के लिये क्या करूँ?"

"वहीं पास में ही एक कुत्ता खड़ा था, उसकी ओर इशारा करते हुए गुरु बोले, "उस कुत्ते से सीखो" और वे आगे चलते रहे।

शिष्य बहुत निराश हुआ और मन ही मन नाराज़ भी, क्योंकि गुरु ने उसके प्रश्न को अनदेखा कर दिया था। उसने फिर पूछा, "गुरुजी, मैं उस कुत्ते से क्या सीख सकता हूँ?"

बिना कुछ बोले, गुरु आगे चलते रहे।

शिष्य ने अपनी बात जारी रखी, "मैं उस कुत्ते से कुछ सीखना नहीं चाहता।कृपा कर के आप ही बताइये गुरुजी"।"

तब, अगली गली में खेल रहे एक दूसरे कुत्ते की ओर इशारा करते हुए गुरु बोले, "तो इस कुत्ते से सीख लो"।"

लो"। अब शिष्य ने कहा, "आप मेरा मजाक बना रहे हैं, गुरुजी। मैं किसी कुत्ते से क्या सीख सकता हूँ? वो खाने, सोने और बच्चे पैदा करने के सिवा कुछ नहीं करता। मैं इस सब से मुक्त होने के लिये ही तो आपको खोजता हुआ यहाँ आया हूँ"।

"तो तुम भी खाओ और सोओ!" गुरुजी ने कहा और वे अपनी झोंपड़ी में चले गये।

शिष्य गहरे सदमें में बस खड़ा ही रह गया!

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सद्‌गुरु: एक औसत आदमी आजकल क्या करता है? वो खाता है पर उसे खाना नहीं कह सकते। वो सोता है पर उसे सोना नहीं कह सकते। क्यों? वो जब खाता है तो खाना खाने में पूरी तरह से शामिल नहीं होता। अगर वो कुछ बहुत जायकेदार चीज़ भी खा रहा हो तो भी स्वाद की ओर उसका ध्यान बस पहले कौर तक ही रहता है। बाकी का सारा खाना उसके मुँह और गले से उतर कर पेट में पहुँचता रहता है पर उसका मन इधर-उधर भटकता रहता है। मैं अपने जीवन की एक घटना बताना चाहूँगा। मैं लगभग 20 साल का था। एक बार मैं खाना खाने बैठा। मैंने खाने का एक कौर मुँह में रखा और अचानक मुझे ऐसा लगा कि मेरे अंदर का पूरा सिस्टम विस्फोटित हो रहा हो। ये कोई ऐसी बात नहीं थी जो मैंने तर्क की नज़र से देखी हो, बल्कि ये मेरा वास्तविक अनुभव था - मेरी थाली में जो कुछ था वो 'मैं' बन रहा था, और इस रूपांतरण को मैं महसूस कर रहा था।

पर अगर आप खाने के एक कौर के साथ भी एक नहीं हो सकते तो फिर सारे ब्रह्मांड के साथ एक कैसे हो सकेंगे?

ये कोई साधारण बात नहीं है। जीवन के हर रूप के लिये, ये हर पल वास्तव में हो रहा है। पहले जो 'आप' नहीं था, वो 'आप' बन रहा है। योग भी बस यही है - आप किसी ऐसी चीज़ के साथ एक हो जाते हैं, जो आप नहीं है। योग का मतलब है मिलन, या अस्तित्व के साथ एक होना! लोग इस एकता का स्वाद लेना चाहते हैं, पर अगर आप खाने के एक कौर के साथ भी एक नहीं हो सकते तो फिर सारे ब्रह्मांड के साथ एक कैसे हो सकेंगे? इस ब्रह्मांड का एक छोटा सा हिस्सा आप के अंदर जा रहा है और आप बन रहा है। इससे ज्यादा अचंभे की बात और क्या हो सकती है?

नींद एक और चमत्कार है। जब आप गहरी नींद में होते हैं तो आप कौन हैं, यह बात गायब हो जाती है और आप इस अस्तित्व के साथ एक हो जाते हैं। जब आप सोते हैं तो वास्तव में क्या होता है? ज्यादातर लोग गहरी नींद का अनुभव नहीं लेते। आपके दिमाग में लाखों बातें चलती रहती हैं, जो नींद के दौरान सपनों या बड़बड़ाने के रूप में बाहर निकलती हैं।

आप जब खाना खा रहे होते हैं तब आप घर के बारे में सोच रहे होते हैं, जब आप अपने घर पर होते हैं तो अपने काम के बारे में सोच रहे होते हैं, काम के वक्त आप यात्रा के बारे में सोचते हैं, जब आप यात्रा में होते हैं तब ये सोचते हैं कि सोयेंगे कब? और जब सोने जाते हैं तो कुछ और सोच रहे होते हैं। आप का सारा जीवन बस ऐसे ही चलता है।

आपको अगर अपना जीवन पूरी तरह से समझना है तो आप जो कुछ भी कर रहे हों उसे 100% भागीदारी के साथ करिये, उसमें पूरी तरह शामिल होईये और अपने आपको उसके लिये पूरी तरह समर्पित कर दीजिये। चूंकि आप हमेशा ही अपनी विचार प्रकिया के साथ उलझे रहते हैं केवल आपके विचार और आपकी भावनायें ही आपके लिये जीवन बन गये हैं। गुस्सा, आनंद या संतोष ये सभी भावनायें तो आपका अपना मन बनाता है। अपने अस्तित्व की असली संवेदनाओं के बारे में तो आप बिलकुल ही उदासीन हो गये हैं।

जब आप खाते हैं, तब ब्रह्मांड आपका हिस्सा बन जाता है। और जब आप सोते हैं तब आप ब्रह्मांड का हिस्सा बन जाते हैं।

आप जीवन के साथ सिर्फ़ तब होते हैं जब आप जो कुछ भी कर रहे हों, उसमें पूरी तरह से शामिल हों। जब आप खाते हैं तब ब्रह्मांड आप का हिस्सा बन जाता है। और जब आप सोते हैं तब आप ब्रह्मांड का हिस्सा बन जाते हैं। अगर आप ये 100% भागीदारी के साथ करें तो अनुभव के ऊँचे स्तरों की ओर ले जाने वाले दरवाजे आप के लिये खुल जायेंगे।

सिर्फ वर्तमान क्षण ही जीवन में वास्तविक है, उसके पहले और बाद के क्षण हमारे अनुभव में नहीं हैं - वे काल्पनिक हैं। आप ये देखिये कि आप जो भी कर रहे हैं, उसे 100% भागीदारी के साथ कैसे करें? आप अगर सृष्टि या सृष्टिकर्ता का पूरा अनुभव करना चाहते हैं तो वह केवल इसी क्षण में संभव है। पर आप अधिकतर किसी और ही मायाजाल में उलझे हुए रहते हैं।

जब लोग कहते हैं कि सारा ब्रह्मांड ही “माया” या “भ्रम” है तो वे वह कह रहे होते हैं जो वे देख रहे होते हैं। आप का मन अस्तित्व को उस तरह से नहीं देखता जैसा वो है। ये उसे किसी ना किसी तरह से बिगाड़ कर भ्रम पैदा करके देखता है। इसी क्षण देखने का आपका अनुभव सिर्फ काल्पनिक है या भ्रम पैदा करने वाला है।

तो एक कुत्ते से सीखने का मतलब है कि जब आप कुछ खाते हैं तो आप के मुँह में जाने वाले हरेक कौर के साथ पूरी तरह से शामिल होईये, उसका पूरी तरह से मज़ा लीजिये और ध्यान दीजिये कि जब ये कौर आपका हिस्सा बनता है तब क्या होता है? पूरी तन्मयता से खाईये! जब आप सोते हैं तो ये विचार छोड़ दीजिये कि सारी दुनिया का भार आपके कंधों पर है। सब कुछ अलग हटा कर रख दीजिये और पूरी तरह से सोईये!

संपादक की टिप्पणी: अपने जीवन को रूपांतरित करें - सद्गुरु के साथ; चुनौती भरे वक्त के लिए इनर इंजीनियरिंग ऑनलाइन आधे दाम पर उपलब्ध है। शहाली के लिए योग विज्ञान से निकली एक टेक्नॉलोजी; रजिस्टर करने के लिए क्लिक करें : isha.co/ieo-hindi