लीला सीरीज के पिछले अंक में हम पढ़ चुके हैं कि कैसे कृष्ण की कृपा से त्रिवक्रा का शरीर ठीक हो गया था। अब पढ़िए इससे आगे की कहानीः

त्रिवक्रा के चमत्कारी रूप से ठीक हो जाने की खबर पूरी मथुरा नगरी में फैल चुकी थी। हालत यह हो गई कि कृष्ण जहां-कहीं भी जाते, लोग उनके दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठे हो जाते। जब यह खबर कंस तक पहुंची तो वह बहुत डर गया। जिस भविष्यवाणी को वह नकार रहा था, वह उसे सच लगने लगी।त्रिवक्रा के चमत्कारी रूप से ठीक हो जाने की खबर पूरी मथुरा नगरी में फैल चुकी थी। हालत यह हो गई कि कृष्ण जहां-कहीं भी जाते, लोग उनके दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठे हो जाते। जब यह खबर कंस तक पहुंची तो वह बहुत डर गया।। कंस ने पूरब के एक बेहद महत्वकांक्षी राजा जरासंध की जुड़वां बेटियों से विवाह किया था, जिसकी वजह से जरासंध के साथ उसके गहरे व दोस्ताना संबंध बन गए थे। वह अपने साम्राज्य की असली सीमाओं से परे बहुत शक्तिशाली बन गया। राजा जरासंध की सेना के बल पर वह बहुत निर्दयी हो गया और लोगों पर दिन रात अत्याचार करने लगा, लेकिन किसी में भी उसका विरोध करने की हिम्मत नहीं थी।

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जरासंध की जिंदगी महत्वाकांक्षाओं और लालच की एक बहुत भयानक कहानी है। यह कहानी बताती है कि कैसे उसने चालाकी से खुद को एक शक्तिशाली राजा बनाया। उसके माता-पिता संतानहीन थे। पुत्र का न होना किसी भी राजा के लिए परेशानी की बात होती थी। ऐसी हालत में राजा का साम्राज्य किसी और को मिल जाता था। किसी ने जरासंध के पिता बृहद्रथ को बताया कि एक पहुंचे हुए साधु शायद उनकी मदद कर सकते हैं। वह उन साधु के पास पहुंचे। साधु ने राजा बृहद्रथ को मंत्र पढ़ कर एक आम दिया और कहा - राजन, यह आम अपनी पत्नी को खिला देना, वह गर्भवती हो जाएगी।  आम किसे दिया जाए, इसमें सत्ता-संघर्ष और भावना दोनों ही मुद्दे थे। ऐसे में अपनी उदारता का परिचय देते हुए राजा ने दोनों पत्नियों को आधा-आधा आम देने का फैसला किया। राजा बृहद्रथ आम लेकर महल लौट आये। अब उनकी परेशानी यह थी कि उन्होंने जुड़वां कन्याओं से शादी की थी और वह दोनों से बराबर प्यार करते थे। उन्होंने उन दोनों को इस तरह से रखा था कि कोई भी उपेक्षित महसूस न करे और न ही कोई अपने को दूसरे से अच्छा समझे। अब राजा समझ नहीं पा रहा थे कि वह यह आम किसे दें। इन रानियों का जीवन तब तक अधूरा था, जब तक कि वे राजा के लिए एक बेटा पैदा न करें। फिर उन्हें यह महत्वाकांक्षा भी थी कि उन्हीं का पुत्र आगे चलकर राजा बने। तो आम किसे दिया जाए, इसमें सत्ता-संघर्ष और भावना दोनों ही मुद्दे थे। ऐसे में अपनी उदारता का परिचय देते हुए राजा ने दोनों पत्नियों को आधा-आधा आम देने का फैसला किया।

राजा के निष्पक्ष न्याय से दोनों पत्नियां बहुत खुश हुईं। दोनों ही आधा आधा आम खाकर गर्भवती हो गईं। नौ महीने के बाद दोनों के शरीर से एक बच्चे का आधा-आधा हिस्सा पैदा हुआ। यह देखकर वे डर गईं और समझीं कि कोई अपशगुन हो गया है। उन्होंने दासियों को आज्ञा दी कि वे बच्चे के आधे-आधे हिस्सों को दो अलग-अलग कपड़ों में लपेटकर फेंक आएं। दासियों ने जहां बच्चे के हिस्सों को फेंका था, वहां जरा नाम की एक जंगली औरत घूमा करती थी, जिसे लोग चुड़ैल समझते थे। भोजन की तलाश में निकली जरा को पास में पड़ी पोटलियों से खून की गंध आई। उसने उन दोनों पोटलियों को उठाया और जंगल की तरफ चल दी। जब उसने उन्हें खोला तो उसे बच्चे के दो हिस्से दिखे। उत्सुकतावश उसने दोनों हिस्सों को एक साथ रख दिया। जैसे ही दोनों हिस्से एक दूसरे के संपर्क में आए, बच्चे में जान आ गई और उसने रोना शुरू कर दिया।

जीवित बच्चे को देख कर उसका मन उसे मारकर खाने का नहीं हुआ। जब उसने इस बच्चे के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि महल में क्या हुआ था।।जरा द्वारा जोड़े जाने के कारण बच्चे का नाम जरासंध रखा गया। संध का मतलब होता है दो चीजों को एक साथ जोडऩावह बच्चे को लेकर राजा के पास गई और बोली कि यह आपका बच्चा है। यह दो हिस्सों में बंटकर दो गर्भों से आया है और मैंने इसे जोड़ दिया है। राजा और दोनों रानियां बच्चे को जिंदा देखकर बहुत खुश हुए। उन्हें लगा कि उन्होंने उसे फेंककर कितनी बड़ी कायरता दिखाई थी। जरा द्वारा जोड़े जाने के कारण बच्चे का नाम जरासंध रखा गया। संध का मतलब होता है दो चीजों को एक साथ जोडऩा। बच्चे के शरीर के दो हिस्सों को इस तरह से जोडऩे का अपना एक महत्व है, जिसकी चर्चा हम बाद में करेंगे। खैर, बड़ा होकर जरासंध एक बहुत निर्दयी और ताकतवर शासक बन गया। वह बहुत सख्ती के साथ शासन करता था। वह दूसरे ताकतवर राजाओं से मित्रता के संबंध बनाना चाहता था, इसीलिये उसने कंस से रिश्ता बनाया।
आगे जारी...

कृष्ण की कहानियां

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