क्या जेनेटिक इंजीनियरिंग से सुपरमानव को जन्म देना संभव है?

 

 सद्‌गुरु

यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां हमें थोड़ा धीमे और संभलकर चलना होगा। हमें रुकना नहीं है, लेकिन हमें इसे लेकर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए, जिससे कल को हमें पछताना पड़े।

डॉ किरण मजूमदार शॉ: सद्गुरु, अगर ऐसी कोई महिला है जो आनुवांशिक रूप से विकृत बच्चे को जन्म देने जा रही हो, तो ऐसे में आज हमारे पास ऐसी तकनीक आ चुकी है, जिससे उन आनुवांशिक कमियों को दुरुस्त किया जा सके, और वह एक सामान्य बच्चे को जन्म दे सके। लेकिन, इन ‘डिजाइनर बच्चों’ का एक डरावना पहलू भी है। हो सकता है कि लोग सबसे अधिक आईक्यू वाले ‘सुपरह्यूमन’ पैदा करना चाहें। हो सकता है कि कुछ देश कहें, ‘हम इन तकनीकों की मदद से अपने देश में एक ‘सुपर रेस’ का निर्माण क्यों नहीं करें?’ आपके अनुसार इससे कैसे निपटा जा सकता है?

जेनेटिक इंजीनियरिंग महाभारत के समय से चली आ रही है

सद्‌गुरु: जब हम यह सोचते हैं कि हम सुपर बैंगन या सुपर कपास उगा सकते हैं तो फिर उस दिशा में सुपर चूहा, सुपर गाय, सुपर मानव तो लगातार आगे बढ़ने की प्रक्रिया होगी। 

जैसे पशुपालन में आप बेहतर नस्ल पैदा करना चाहते हैं। आज हर मां-बाप की इच्छा होती है कि वे ऐसी संतान पैदा करें, जो उनसे एक कदम आगे हो। यह एक स्वाभाविक इच्छा है और ऐसा होना भी चाहिए। 

मैं इसे नैतिकता के तौर पर नहीं देख रहा हूं। ‘जेनेटिक इंजीनियरिंग’ या जीवन को मनचाहे अंदाज में बदलने की चाह कोई नई बात नहीं है। हमेशा से इंसान की यह चाहत रही है। अतीत में हम लोग इस देश में कहीं आगे तक जा चुके हैं। आपको महाभारत में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे। राजा चाहता था कि उसकी पत्नी किसी महान इंसान द्वारा गर्भवती हो। तो फिर वह ऐसे किसी व्यक्ति को चुनता था। व्यास ने महाभारत की पहली पीढ़ी की सारी रानियों को गर्भवती किया था। यह क्रिया ‘नियोग’ कहलाती थी।

इसके पीछे वजह थी कि वह सावधानी से संतान पैदा करना चाहते थे। यह कुछ उसी तरह की बात है कि जैसे पशुपालन में आप बेहतर नस्ल पैदा करना चाहते हैं। आज हर मां-बाप की इच्छा होती है कि वे ऐसी संतान पैदा करें, जो उनसे एक कदम आगे हो। यह एक स्वाभाविक इच्छा है और ऐसा होना भी चाहिए।

तो इसके लिए हमने एक पूरी प्रक्रिया तैयार की, जिसमें गर्भाधान के पहले से लेकर गर्भधारण के दौरान तक, साढ़े नौ - दस महीने, आपको क्या करना चाहिए, एक बच्चा अपनी मां के गर्भ में कैसे रहे, इसको लेकर हमारे यहां हर दिन के लिए बाकायदा स्थापित परंपराएं और प्रक्रियाएं हैं। ताकि सेहत, कल्याण और प्रतिभा के लिहाज से एक बेहतर बच्चा पैदा हो सके। हमने उन सारी प्रकियाओं को अनदेखा कर दिया है और अब हम बायोटेक्नोलॉजी की मदद ले रहे हैं। बुनियादी तौर पर आप आप पीढ़ी दर पीढ़ी वंश से आने वाले एक से प्रभावों को निकालकर उसमें नई विशेषता भरने की कोशिश कर रहे हैं। है न?

योग के माध्यम से वंश के प्रभावों से मुक्त हुआ जा सकता है

आज बड़ी मात्रा में ऐसे अध्ययन मौजूद हैं, जो यह दर्शाते हैं कि सही तरीके के योगाभ्यास और ध्यान से आप अपने ऊपर पडऩे वाले आनुवांशिक असर से खुद को पूरी तरह से दूर करके एक बिलकुल नए जीवन के रूप में काम कर सकते हैं। 

हमें बेहद सौम्यता से धीरे-धीरे आगे बढऩा होगा। हमें इसे लेकर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए, जिससे कल को हमें पछताना पड़े। 
मैं आपको यह दिखाऊंगा। अगर मैं कुछ खास लोगों को कुछ खास तरह की दीक्षा-प्रक्रिया में रखूं, तो अगले चौबीस घंटों में आप देखेंगे कि उनके चेहरे की आकृति बदल जाएगी। उसकी वजह सिर्फ इतनी होगी कि उन्होंने खुद को आनुवांशिक प्रक्रिया से दूर कर लिया है। मैं आपको हजारों ऐसे लोग दिखा सकता हूं, जो अपने भीतर मौजूद स्वाभाविक आईक्यू से कहीं परे जाकर काम कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने खुद को जैविक छाप से दूर कर लिया।

लेकिन आप जिस चीज का जिक्र कर रही हैं, अगर उसे वाकई में करने लगें, तो ऐसा लगेगा कि किसी को उसकी बीमारियों से निजात दिलाकर हमलोग महान सेवा कर रहे हैं। लेकिन हम जानते हैं कि हमारे शरीर का लगभग बावन प्रतिशत हिस्सा बैक्टीरिया है। मान लीजिए कि वे सब हमें खारिज कर दें, क्योंकि हम उनके लिए बहुत ज्यादा बदले हुए रूप हैं, तो जानते हैं क्या होगा? निश्चित तौर पर हम जिंदा नहीं रह पाएंगे।

सूक्ष्म कीटाणुओं से खतरा हो सकता है

मान लीजिए कि आपने खुद को मोडिफाई कर लिया तो आपके शरीर के वे सारे सूक्ष्म कीटाणु, जो फिलहाल आपके जीवन का सहयोग कर रहे हैं, वे सब आपके खिलाफ खड़े हो जाएं - अगर ऐसा होता है तो आपका खेल तो खत्म। हालाँकि आपको यह पता नहीं होगा कि वे कब विरोध करने जा रहे हैं। हम जैनेटिक रूप से रूपांतरित फसलों के आधार पर जानते हैं कि हर अठ्ठारहवें महीने आपको उन्हें फिर से रूपांतरित करना होता है, वर्ना इस अवधि में जो कीड़ा है, वह खुद को बदले हुए रूप के हिसाब से ढाल लेता है। इस तरह से बग, सुपरबग यानी एक कीट, पराकीट बन जाता है। तो बग, सुपरबग बन रहे हैं, भले ही आप परामानव बनें या न बनें।

धीरे-धीरे आगे बढना होगा

सवाल उठता है कि आप इन सुपरबग का सामना कैसे करेंगे? मैं जानता हूं कि कई ऐसी डरावनी फिल्में हैं, जिनमें ऐसे सुपर बग दिखाए जाते हैं, जो दस फीट लंबे होते हैं और वो किसी को खा सकते हैं। हो सकता है कि ऐसा कुछ न हो। अगर आप उस कीड़े को मार न सकें, तो वो कीड़ा आकार में विशालकाय हुए बिना भी मुश्किल पैदा कर सकता है। आप इसे कुचलकर मार सकते हैं, लेकिन अगर आप अपने स्प्रे या एंटीबायोटिक से इसको खत्म नहीं कर पाए, मान लीजिए कि उन्हें मारने वाली ये चीजें एक साल के लिए काम न करें, तो आधी मानव जाति तो खत्म हो जाएगी। तो जब ऐसी चीजें मौजूद हैं, जहां एक खास जगह में हर कोई किसी दूसरे पर अपना कब्जा करना चाहता है, तो मुझे लगता है कि यह एक ऐसा क्षेत्र होगा, जहां हमें थोड़ा धीमे और संभलकर चलना होगा। हमें रुकना नहीं है, लेकिन हमें बेहद सौम्यता से धीरे-धीरे आगे बढऩा होगा। हमें इसे लेकर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए, जिससे कल को हमें पछताना पड़े।

 
 
 
 
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