जब आप सोते हैं तो आपकी सभी पहचान खत्म हो जाती है। और एक बार अगर आपकी पहचान मिट गई तो आप अपनी मूल प्रकृति में वापस लौट जाते हैं। यह एक शानदार प्रक्रिया है, लेकिन यह पूरी तरह बेखबरी की स्थिति में हो रही है। कभी किसी खास दिन आपको ऐसा महसूस हुआ होगा कि अगर आप एक दो घंटे की ही सही, गहरी नींद में सो जाते हैं, तो जब अगली सुबह आप उठते हैं तो आपको अपने भीतर एक नए तरह के जीवन का अहसास होता है। आपको एक नई तरह की जागरूकता और खुशी महसूस होती है।

सपने देखते हुए भी एक हमारी पहचान होती है

ज्यादातर लोग हर रोज इस तरह की नींद नहीं ले पाते। जब आप सो रहे होते हैं तो आप ज्यादातर समय सपने देख रहे होते हैं। जब आप सपने देख रहे हैं तब भी आपकी एक पहचान होती है। कभी गौर किया है कि सपनों के दौरान भी आप ‘आप’ ही रहते हैं। हो सकता है बहुत सारी काल्पनिक और शानदार परिस्थितियां हों, लेकिन आप इस दौरान भी आप ही हैं। यानी सपनों के दौरान भी आपकी पहचान मिटी नहीं है। वह वैसी की वैसी बनी हुई है। जिस दिन सोते समय आप सपनों की दुनिया से परे चले जाते हैं और पूर्ण निद्रा की अवस्था में आ जाते हैं, उस दिन गौर कीजिएगा। जागने के बाद आपको जबर्दस्त ताजगी का अहसास होगा। आपको अपने भीतर आजादी और खुशी का एक नया अहसास होगा, क्योंकि थोड़ी देर के लिए आप अपनी मूल प्रकृति के संपर्क में आ जाते हैं। आप एक ऐसे स्थान पर रहे हैं, जहां आपकी कोई पहचान नहीं थी। किसी परम तत्व ने आपको स्पर्श किया है, लेकिन ऐसा बेखबरी की अवस्था में हुआ। अगर आप इसी चीज को पूर्ण जागरूकता की अवस्था में कर पाते हैं, तो यह ध्यान है। जाग्रत अवस्था में अगर आप इस तरह से रह सकते हैं तो इसका मतलब है कि आप ध्यान की अवस्था में हैं।

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