एक आसन बदल सकता है आपकी जिंदगी
ईशा चाहता है कि प्राचीन योग को उसके सबसे शुद्ध रूप में लोगों तक पहुंचाया जाए– उस रूप में नहीं जो आप टीवी पर देखते हैं या किताबों में पढ़ते हैं। योग के साथ हो रहे वो नए-नए प्रयोग भी नहीं, जो दुनिया भर में योग के बुनियादी सिद्धांतों को समझे बिना किये जा रहे हैं...
 
 

Sadhguruईशा चाहता है कि प्राचीन योग को उसके सबसे शुद्ध रूप में लोगों तक पहुंचाया जाए– उस रूप में नहीं जो आप टीवी पर देखते हैं या किताबों में पढ़ते हैं। योग के साथ हो रहे वो नए-नए प्रयोग भी नहीं, जो दुनिया भर में योग के बुनियादी सिद्धांतों को समझे बिना किये जा रहे हैं। हम तो योग के विशुद्ध प्राचीन रूप से, जो एक जबरदस्त और शक्तिशाली विज्ञान है, जिसे आप क्लासिकल योग कह सकते हैं, से दुनिया का परिचय कराना चाहते हैं। यह बड़ी सावधानी और बारीकी से तैयार की गयी एक प्रणाली है जिसके जरिए जीवन के ऊंचे आयामों तक पहुंचा जा सकता है। ‘क्लासिकल योग’ श्रृंखला के तहत सबसे पहले हम नजर डाल रहे हैं हठ योग पर और साथ ही आपसे यह भी साझा कर रहे हैं कि इस दिशा में ईशा की सोच और काम क्या-क्या हैं।

आइए सबसे पहले आसन पर गौर करें, जिसको हठ योग की बुनियादी कड़ी माना जा सकता है। आजकल लोगों का आसनों के बारे में यह ख्याल है कि ये शरीर को ऐंठने-मरोड़ने वाली मुद्राएं हैं, जिनका मकसद शरीर में चुस्ती-फुर्ति, लचीलापन और मांसपेशियों में मजबूती लाना है। पर ‘योग’ की परिभाषा कहती है कि यह एक ऐसी प्रणाली है जो आपको जिंदगी के ऊंचे आयामों या आत्मबोध की राह पर आगे बढ़ाती है। हठ योग में शरीर, मन, ऊर्जा और अंतर की गहराई- सबको एक निश्चित तरीके से शामिल होना होता है। दुर्भाग्यवश इतने अहम पहलू को दरकिनार कर हठ योग को महज शारीरिक कसरत में बदल दिया गया है।

सीधे सरल शब्दों में ‘आसन’ का मतलब होता है ‘शारीरिक मुद्रा’। हम जैसे भी बैठें या खड़े रहें, अपने हाथों को किसी भी तरह से रखें, वह एक आसन ही है। इसलिए अनगिनत आसन संभव है। पर एक ऐसी शारीरिक मुद्रा जो आपको एक ऊंची संभावना की तरफ ले जाए उसको ‘योगासन’ कहा जाता है। ऐसे चौरासी बुनियादी योगासन बताए गए हैं जिनके जरिए कोई अपनी चेतनता को ऊंचाई तक ले जा सकता है। सद्‌गुरु कहते हैं, “जब हम चौरासी आसन कहते हैं तो उसका यह मतलब नहीं कि ये चौरासी शारीरिक मुद्राएं हैं। ये चौरासी प्रणालियां हैं- ऊंची चेतनता हासिल करने के चौरासी रास्ते।”

सद्‌गुरुबताते हैं कि इस शरीर की ज्यॉमेट्री का ब्रह्मांड की ज्यॉमेट्री से मेल मिलाना ही आसन सिद्धि है। अगर सही ढंग से ये मेल मिल जाए तो आप पूरे ब्रह्मांड को डाउनलोड कर सकते हैं। यही योग है।

यह आराम का मामला है

योगसूत्र में पतंजलि कहते हैं: सुखम स्थिरम आसनम । जो बहुत आरामदेह और स्थिर हो वही आपका आसन है। इसका क्या मतलब है? सद्‌गुरु समझाते हैं, “इसका बस यही मतलब है कि आपका शरीर आराम की अवस्था में है, आपका मन विश्राम कर रहा है और आपकी ऊर्जा पूरी तरह से जीवंत और संतुलन में है। तब आप कुदरती रूप से ध्यानमग्न हैं।” आसन कुदरती रूप से ध्यान में तल्लीन होने का पहला कदम है। एक तरह से कहा जाए तो आसन ध्यान में लीन होने का सक्रिय तरीका है।

यह समझ लेना बहुत जरूरी है कि आसन कसरत नहीं हैं। योगियों ने हमेशा से इस बात को समझा और माना है कि हमारे भौतिक शरीर के भीतर याद्दाश्त की एक पूरी प्रणाली है। शून्य से ले कर आज तक इस ब्रह्मांड का विकास कैसे हुआ – यह सब इस शरीर में अंकित है। जब हम आसन करते हैं तो याददाश्त की उस पिटारी को खोल देते हैं और इस जीवन को फिर से गढ़ने की कोशिश करते हैं ताकि यह परम संभावना की तरफ मुड़ सके। यह एक बहुत सूक्ष्म वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो आपको विराट का अनुभव करा सकती है।

केवल एक आसन

आम तौर पर हठ योग में ऐसे कई आसनों का अभ्यास शामिल होता है जो सामूहिक रूप से हमें कई लाभ पहुंचाते हैं। इसका यह मतलब नहीं कि सिर्फ एक आसन का महत्व कुछ कम होता है। बहुत से योगी सिर्फ एक ही आसन में महारत हासिल कर लेते हैं। इसे ‘आसन सिद्धि कहा जाता है। धीरे-धीरे होने वाली इस प्रक्रिया में शरीर पूरी तरह से आराम की अवस्था में पहुंच जाता है। सद्‌गुरु बताते हैं कि इस शरीर की ज्यॉमेट्री का ब्रह्मांड की ज्यॉमेट्री से मेल मिलाना ही आसन सिद्धि है। अगर सही ढंग से ये मेल मिल जाए तो आप पूरे ब्रह्मांड को डाउनलोड कर सकते हैं। यही योग है। अगर आप बस सीधे बैठे रहें तो जो कुछ भी जानने लायक है वह आप अपने अंतरतम से ही पा सकते हैं।”


सम्पादकीय टिपण्णी :
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