सद्‌गुरुसद्‌गुरु हमें बता रहे हैं की हमारा व्यक्तित्व या मैं का भाव बस अतीत का संग्रह है। वे बताते हैं की आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने के लिए हमें हर पल अतीत के बोझ को खुद से दूर करना होगा।

व्यक्तित्व सिर्फ अतीत का संग्रह है

अभी जिसे आप ’मैं’ कहते है, वह मात्र मन की एक खास बनावट है, जिसे आपने इकट्ठा कर रखा है। आपके मन में यह एक खास तरह की जानकारी है।

जब आप एक मृत देह को अपने कंधों पर ढो रहे हैं, तब आप बहुत दूर तक नहीं चल सकते। मृत देह के साथ आप किधर जा सकते हैं? केवल श्मशान घाट, है कि नहीं?
जब आप कहते हैं, “मैं एक अच्छा आदमी हूँ”, “मैं एक बुरा आदमी हूँ”, “मैं निडर हूँ”, “मैं नम्र हूँ” इत्यादि - यह सब मात्र मन की एक खास बनावट हैं। दूसरे शब्दों में यह मात्र अतीत का संग्रह है। आप बस अपने अतीत के माध्यम से जिये जा रहे हैं अगर अतीत को हटा दिया जाए तो बहुत सारे लोग अपने आप को बिल्कुल खोया महसूस क रेंगे। हर चीज़ अतीत पर निर्भर करती है। बीता हुआ क्षण हर चीज़ पर शासन करता है। यह क्षण महत्वपूर्ण नहीं होता। जब तक व्यक्तित्व महत्वपूर्ण है, इसका अर्थ है कि पिछला क्षण महत्वपूर्ण है। वर्तमान क्षण महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि व्यक्तित्व अतीत का है। इस क्षण वास्तव में आपका कोई व्यक्तित्व नहीं है, इसे ज़रूर समझें। आप जिस व्यक्तित्व को ढो रहे हैं, वह एक मृत वस्तु है। जब आप एक मृत देह को अपने कंधों पर ढो रहे हैं, तब आप बहुत दूर तक नहीं चल सकते। मृत देह के साथ आप किधर जा सकते हैं? केवल श्मशान घाट, है कि नहीं? अगर आप एक लाश को बहुत लंबे समय तक ढोते रहेंगे तो आपको भयानक दुर्गन्ध सहनी होगी। आपका व्यक्तित्व जितना ज़्यादा सशक्त होगा उतना ही ज़्यादा दुर्गन्धयुक्त होगा।

अतीत से मुक्त व्यक्ति पर हर कोई विश्वास करने लगता है

आप जीवन में दूर तक तभी जा सकते हैं जब आप अतीत को छोड़ सकें। यह वैसा ही है जैसा कि साँप का केंचुल छोडऩा। क्या आप यह जानते हैं कि एक साँप केंचुली कैसे छोड़ता है?

वह व्यक्ति जो इस क्षण में पिछले क्षण को नहीं ढोता, केवल वही व्यक्ति हर चीज़ से मुक्त होता है और वह गुण सभी जगह महसूस किया जाता है।
एक क्षण वह उसके शरीर का हिस्सा होती है और अगले ही क्षण वह केंचुली छोड़ कर बिना पीछे मुड़े चला जाता है। विकास केवल तभी होगा जब हर पल हम साँप की तरह केंचुली पीछे छोड़ते चलें। वह व्यक्ति जो इस क्षण में पिछले क्षण को नहीं ढोता, केवल वही व्यक्ति हर चीज़ से मुक्त होता है और वह गुण सभी जगह महसूस किया जाता है। आप से मिलने के कुछ ही पलों में लोग आप पर इस हद तक विश्वास करने लगेंगे जितना वे अपने माता-पिता पर या पति या पत्नी पर भी विश्वास नहीं करते; मात्र इसलिये क्योंकि आप अपने साथ अतीत का बोझ नहीं ढो रहे हैं। अगर आप अपने साथ अतीत को ढोते हैं, तब आप अन्य लोगों की तरह दुर्गंध फैलाने लगते हैं।

ये व्यक्तित्व आपस में टकराते रहते हैं

व्यक्तित्वों की बदबू से दुनिया में दुर्गंध फैली हुई है। हरेक के पास अपनी खुद की एक तीव्र गंध या व्यक्तित्व है।

आपके जीवन में कुछ पल रहे होंगे जब आपने किसी चीज़ या किसी व्यक्ति के लिए सच्ची करुणा महसूस की होगी। उन पलों में आपका संपूर्ण व्यक्तित्व, आप कौन हैं, आप क्या हैं, हर चीज़ पिघल गई होगी।
दुनिया में भाँति-भाँति की दुर्गन्धें हैं और वे हर समय टकराती रहती हैं। जब आप इस गंध को नहीं ढोते, आप इस अस्तित्व को सहज पार कर सकते हैं। आप न केवल इस संसार को सहज पार कर जाते है, बल्कि आप जीवन और मृत्यु की इस प्रक्रिया को भी बेप्रयास पार कर जाएँगे। आप इस भव-सागर को बिना प्रयास के पार कर जाएँगे। कोई चीज़ जो किसी दूसरे व्यक्ति के लिये दुरूसाध्य लगती है, वह आप के लिये बिना प्रयास के घटित होती है। हर चीज़ बिल्कुल सहज हो जाती है। आपके जीवन में कुछ पल रहे होंगे जब आपने किसी चीज़ या किसी व्यक्ति के लिए सच्ची करुणा महसूस की होगी। उन पलों में आपका संपूर्ण व्यक्तित्व, आप कौन हैं, आप क्या हैं, हर चीज़ पिघल गई होगी। वहाँ कुछ भी नहीं बचा होगा। उस क्षण में आप वहाँ सहज मौजूद होते हैं।

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