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अच्छी तरह से जीने का मतलब ऐशो-आराम नहीं है। अच्छी तरह जीने का मतलब है कि अगर आप किसी पत्थर पर भी बैठें, तब भीआप आनंदपूर्वक बैठना जानते हों।
आपको अपने मन के साथ खेलना चाहिए। आपके मन को आपके साथ नहीं खेलना चाहिए।
अगर आपकी एक आँख लक्ष्य पर टिकी है, तो रास्ता खोजने के लिए आपके पास केवल एक ही आँख बची है। जीवन जीने का यह कुशल तरीका नहीं है।
लोग इस्तेमाल किए जाने के लिए नहीं हैं। लोग प्रेम करने और साथ निभाने के लिए हैं। वस्तुएं इस्तेमाल के लिए होती हैं – लोग नहीं।
लोग हमेशा दुनिया के सबसे अद्भुत व्यक्ति से मिलने की कोशिश करते हैं। आप खुद ही वह अद्भुत व्यक्ति क्यों नहीं बन जाते।
अगर आप सचेत होकर रिस्पॉन्ड करते हैं, तो वह होगा जो आप चाहते हैं। अगर आदतन प्रतिक्रिया देते हैं, तो वह होगा जो कोई और चाहता है।
अगर जीवन में आपको कड़वे अनुभव होते हैं, तो आपके पास दो विकल्प होते हैं – या तो आप बुद्धिमान बन सकते हैं या उनसे आहत हो सकते हैं।
ऊपर उठें और चमकें। जब आप आनंदित और उल्लास से भरे होते हैं, तब लोग अपने-आप ही आपसे प्रेम करने लगते हैं।
जो आनंदित है, उसके लिए जीवन बहुत छोटा है। जो दुखी है, उसके लिए यह बहुत ही लंबा और कष्टदायक है।
विश्वास सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक शराब है। शराब आपके शरीर पर असर करती है; विश्वास आपके मन पर असर करता है।
मन बहुत ही बुरा मालिक है, लेकिन एक शानदार सेवक है। आपको इसे इसी तरह रखना चाहिए।
भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ करना नहीं है। भक्ति का अर्थ है 'मैं' के भाव को विलीन कर देना।