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जीवन सहज है। केवल मन तनाव में है।
दुनिया में ज्यादातर लोग व्यस्त नहीं हैं - वे बस अपनी ही चीजों में उलझे हुए हैं।
ईश्वर को आपकी भक्ति की जरूरत नहीं है। यह तो मनुष्य का हृदय है जिसमें भावनाओं के चरम का अनुभव करने की चाह होती है।
मोह प्रेम नहीं है। किसी के प्रति आसक्त होना उस दूसरे व्यक्ति के बारे में नहीं है – यह आपके अपने अधूरेपन की भावना का परिणाम है।
उम्र के साथ, आपकी शारीरिक फुर्ती कम हो सकती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आपकी जीवंतता कम होने लगे।
आपके जो सबसे करीबी और प्रिय हैं, उन्हें ही आपके सबसे बुरे रूप झेलने पड़ते हैं। सड़क पर चलते किसी अजनबी को आपके ऐसे भयंकर रूप नहीं झेलने पड़ते।
जागरूकता कुछ ऐसा नहीं है जो आप करते हैं। आप स्वयं जागरूकता हैं।
मन, समाज का कूड़ेदान है। जो कोई भी यहां से गुजरता है, इसमें कुछ न कुछ डाल देता है।
दूसरों से तुलना करके अपना जीवन बर्बाद मत कीजिए। बस ये देखिए कि क्या आप कल के मुकाबले आज थोड़े बेहतर हुए हैं।
आप जो करते हैं, उसे यह तय नहीं करना चाहिए कि आप कौन हैं। बल्कि आप कौन हैं, उसे यह तय करना चाहिए कि आप क्या करते हैं।
अगर आप उन सीमाओं को पार करना चाहते हैं जिनमें आप अभी हैं, तो आपके दिल में पागलपन और दिमाग में पूर्ण संतुलन होना चाहिए।
जब दो लोग साथ आते हैं, तो यह खुशियां साझा करने के लिए होना चाहिए, एक-दूसरे से खुशियां निचोड़ने के लिए नहीं।