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अगर आप 'खुद' से बहुत अधिक भरे हुए हैं, तो जीवन को आपको गूंथना ही होगा। इसका और कोई इलाज नहीं है।
पूरी तरह जिन्दा होना शानदार है। आधा जिन्दा रहना टॉर्चर है।
आनंद कोई लक्ष्य नहीं है – यह दुख के डर को मिटा देता है। जब 'मेरा क्या होगा' की फिक्र मिट जाएगी, तभी आप जीवन को गहराई से जानने की हिम्मत करेंगे।
आध्यात्मिक प्रक्रिया का मतलब है कि आपकी भीतरी बुद्धिमत्ता जागी हुई है। समय कम है। जो कुछ भी होना है, वो अभी होना चाहिए।
मैं इस तरह नहीं बना हूं कि प्रशंसा मुझे ऊपर उठा दे और अपमान मुझे नीचे गिरा दे। मैंने यह अधिकार किसी को नहीं दिया है।
आपका जीवन आपका कर्म है – इसे आप बनाते हैं। जब तक आप ये नहीं देख पाते, तब तक आपका जीवन असल में आपका नहीं है।
शरीर और मन को ऊपर चढ़ने की सीढ़ियां बनना चाहिए था। इसके बजाय, वो ऐसा दलदल बन जाते हैं जिसमें लोग जिंदगी भर धंसे रहते हैं।
प्रेम बन जाएं। यह जीने का एक बुद्धिमानी भरा तरीका है।
वासना एक प्रबल जरूरत है। प्रेम जरूरत नहीं, बल्कि एक गहरी चाहत है। जब आप प्रेम में होते हैं, तो आप ठहर जाते हैं — फिर किसी और चीज की जरूरत नहीं रह जाती।
जो मरने के लिए तैयार है, केवल वही इंसान पूरी तरह जी सकता है।
जब कोई काम बिना समर्पण के किया जाता है, तो वह आपको उलझाता है। जब उसे गहरे भक्ति-भाव के साथ किया जाता है, तो वह आपको मुक्ति की ओर ले जाता है।
अपने तर्क से परे जाना मुक्ति-दायक है, लेकिन इसे छोड़ देना मूर्खता है।