ये विभाजन
इस हफ्ते के सद्‌गुरु स्पॉट में, सद्‌गुरु ने एक कविता लिखी है, जिसका शीर्षक है 'विभाजन' " क्या ये रेखाएं और लकीरें, किसी अदृश्य हाथ ने खींची, क्या ये रेखाएं और लकीरें..
 
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ये विभाजन

क्या ये रेखाएं और लकीरें

किसी अदृश्य हाथ ने खींची

क्या ये रेखाएं और लकीरें

ग्रहों और सितारों ने बनाई घूम-घूम कर

क्या ये रेखाएं और लकीरें

बनाई सामाजिक कायदों और बंदिशों ने

क्या ये रेखाएं और लकीरें

उकेरी गई हैं हमारे हाथ-पांव पर

क्या ये रेखाएं और लकीरें

हैं हमारे पक्षपात और अभिमान की

बेकार की गुत्‍थीयों में उलझकर

दुर्बल होता है हमारा जीवन

       दिखते कहां  है

अपने अस्तित्व की असीमता को

        तलाशने वाले लोग

फिजूल हैं सभी रेखाएं और लकीरें

प्रेम में धुत एक बावरे के लिए। 

प्रेम व प्रसाद

 
 
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