भीतरी खुशहाली चाहते हैं तो थोड़ा समय निकालिए

 
 
 
 

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 सद्‌गुरु आज के स्पॉट में सद्‌गुरु इस बात को समझाते हुए स्पष्ट कर रहे हैं कि अगर हमें अपने भीतर ख़ुशहाली चाहिए तो हमें उसके लिए समय निकालना पड़ेगा।

कोई भी व्यक्ति, लोग, समाज और राष्ट्र, संपन्न होने के लिए मेहनत इसलिए करते हैं ताकि वे अपने जीवन में चुनने की आजादी पा सकें। जब इंसान को अपने जीवन में कोई काम की चीज या कहें बहुमूल्य चीज़ मिले, तो उसे अपने जीवन की दिशा उसी के अनुसार तय करने में सक्षम होना चाहिए। अगर आपको कोई बहुत महत्वपूर्ण चीज मिलती है, तो क्या यह जरूरी नहीं है कि आप उसी के अनुसार अपनी दिशा बदलने में सक्षम हों? लेकिन दुर्भाग्यवश दुनिया के अधिकतर खुशहाल समाजों ने अपना जीवन इस तरह बना लिया है कि वे ऐसा नहीं कर सकते।

हमारे जीवन के पल सीमित हैं

लोगों के लिए आध्यात्मिक संभावनाएं लगभग हमेशा के लिए नष्ट हो चुकी हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे अपने हिसाब से अपने जीवन की दिशा नहीं बदल पाए।

चाहे आपके पास कितना भी बीमा हो, फिर भी आप कल सुबह मर सकते हैं। यह एक संभावना है। हमेशा इस बारे में चेतन रहना कि ‘मैं नश्वर हूं, यहां स्थायी तौर पर नहीं रहना है,’ एक ज़बरदस्त आजादी है।
किसी व्यक्ति को सच्चा साधक बनने से सिर्फ एक ही समस्या रोकती है कि जब भी आध्यात्मिक संभावना निकट आती है, तो वो किसी वजह से उससे जुड़ नहीं पाता। हर दिन मैं बहुत से लोगों को आध्यात्मिकता के करीब आते और फिर उसमें बाधा आते देखता हूं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनका घर तीस साल के लिए बैंक में गिरवी है। खास तौर पर अमेरिका में - वे अपनी जिंदगी की योजना इस तरह बना रहे हैं मानो वे हजार साल यहां रहने वाले हों। लेकिन दूसरे देश भी धीरे धीरे ऐसा करने लगे हैं। मान लीजिए कल सुबह ईश्वर आपको मिल जाएँ, लेकिन आप अपने जीवन की दिशा नहीं बदल सकते क्योंकि आपके पास स्टुडेंट लोन, हाउस लोन और पैंतालीस साल का हेल्थकेयर प्लान है। ये सारी योजनाएं बीमा कंपनी, बैंक, सरकार और हर किसी ने मिलकर बनाई है और आप उस योजना को नहीं बदलेंगे। लेकिन आपके लिए स्रष्टा की येाजना यह है कि आप एक पूर्ण विकसित जीवन बनें। जीवन के इस अंश, जो आप हैं, के लिए सिर्फ सृष्टि के स्रोत की योजना ही मायने रखती है। आपकी बीमा कंपनी जिन योजनाओं का प्रस्ताव देती रहती है, हम उसे मान सकते हैं, अगर वह हमारे लिए कारगर हों। लेकिन अगर आपने अपने पूरे जीवन की योजना सिर्फ इस डर के आधार पर बनाई हो कि ‘मेरे साथ क्या होगा’ - तो यह बहुत दुखद है।

चाहे आपके पास कितना भी बीमा हो, फिर भी आप कल सुबह मर सकते हैं। यह एक संभावना है। हमेशा इस बारे में चेतन रहना कि ‘मैं नश्वर हूं, यहां स्थायी तौर पर नहीं रहना है,’ एक ज़बरदस्त आजादी है। मैं गुजरने वाले हर पल के प्रति जागरूक हूं और जानता हूं कि और कितने पल बाकी हैं – वे असीम नहीं, सीमित हैं। मैं चाहता हूं कि आप अपने समय की गिनती करें कि आपके पास कितने पल बाकी हैं। अगर आप जो करना चाहते हैं, उसके लिए समय की अहमियत को नहीं समझते, अगर आपका जीवन सिर्फ क़र्ज़ चुकाने के लिए है, तो आपके क़र्ज़ चुकाने से पहले आपकी मौत हो सकती है। फिर आपने उसे ‘एक सेल्समैन की मौत’ की तरह बना दिया। आपको लगता है कि आप उनसे अधिक स्मार्ट हैं क्योंकि वे मरे लोगों से क़र्ज़ नहीं वसूल सकते।

कुछ भी गलत न होना भी त्रासदी बन सकता है

आप अपने जीवन की ऊर्जा और समय ऐसी कितनी ही चीजों में बर्बाद कर रहे हैं, जो वास्तव में आपके लिए फायदेमंद नहीं हैं। आपको रोज इस बात पर विचार करना चाहिए और लेखा-जोखा रखना चाहिए।

पैसा आता-जाता रहेगा, बाकी चीजें भी आती-जाती रहेंगी। समय ही एक ऐसी चीज है, जो सिर्फ जाता है, कभी वापस नहीं आता। 
यह बहुत महत्वपूर्ण है, वरना आप कोई चीज करते रहेंगे और पच्चीस साल बाद आपको पता चलेगा कि वह सब बेकार है। बेकार का मतलब यह नहीं है कि कोई चीज गलत हो गई है। अगर वैसा हुआ, तब तो आप जाग ही जाएंगे। अगर वाकई कोई चीज बहुत गलत हो जाती है, तो आप बैठकर देखेंगे कि यह क्या हो रहा है। असली गड़बड़ तब होती है जब कुछ भी गलत नहीं होता – जब सब कुछ यूं ही चलता रहता है, बस सिर्फ जीवन नहीं घटित होता। आपको अपने साथ यह त्रासदी नहीं होने देना चाहिए। त्रासदी किसी बम के धमाके की तरह नहीं घटित होती। वह चुपचाप घटित होती है। चाहे आप व्यस्त हों, चाहे बोर हो रहे हों, दोनों रूपों में जिंदगी आपको छोड़कर आगे निकलती रहती है। अगर कोई बस आकर आपको धक्का मार दे, तो यह त्रासदी नहीं बल्कि सिर्फ एक दुर्घटना है क्योंकि एक बार कुछ हड्डियां टूटने के बाद आप अत्यंत सतर्क हो जाते हैं। आप सोचने लगते हैं कि ‘इस जीवन का मकसद क्या है?’ लेकिन जब आप बैठे रहते हैं, तो जीवन बस फिसलता रहता है, यह एक त्रासदी है।

समय सिर्फ आगे ही बढ़ता जाता है

फिलहाल, व्यावसायिक ताक़तें लोगों के जीवन की गुणवत्ता को तय कर रही हैं। क्रूज का टिकट बेचने वाले लोग कहते हैं, ‘आपको इस क्रूज पर चलने पर पचास फीसदी छूट है।’ जो कपड़े बेचते हैं, वे आपको बताएंगे, ‘यह तो आपको खरीदना ही पड़ेगा, नब्बे फीसदी छूट है।’ कम से कम आपको समझना चाहिए कि नब्बे फीसदी छूट का मतलब है कि यह धूर्तता है। आप अपने पैसे का निवेश कैसे करते हैं, यह आपके ऊपर है मगर आप अपने जीवन का निवेश कैसे करते हैं, यह व्यावसायिक ताक़तों को तय नहीं करना चाहिए। क्योंकि जीवन समय की अर्थव्यवस्था है, वह फिसल रहा है। अपनी खुशहाली के लिए हम इस पल का लाभ कितनी अच्छी तरह उठा पाते हैं, बस यही मायने रखता है। पैसा आता-जाता रहेगा, बाकी चीजें भी आती-जाती रहेंगी। समय ही एक ऐसी चीज है, जो सिर्फ जाता है, कभी वापस नहीं आता। तो जो चीज हमेशा सिर्फ जाती है, अगर आप उसका ध्यान नहीं रखेंगे, तो आपको एहसास होने से पहले वह चली जाएगी।

भीतरी खुशहाली के लिए समय निकालना होगा

तो आपको अपनी भीतरी खुशहाली के लिए थोड़ा समय देना चाहिए। अगर आप अपने आप में एक संपूर्ण जीवन के रूप में यहां बैठ सकते हैं, यही खुशहाली है। आप क्या करते हैं और क्या नहीं, यह बाद की बात है। जब हम खुशहाल होते हैं, तो जो भी उच्चतम संभावना होती है, हम उसके लिए कोशिश करेंगे। जब हम बीमार होते हैं, तो हम आम तौर पर सबसे हल्की चीज के लिए कोशिश करते हैं जिसे हम ज्यादा जोखिम उठाए बिना कर सकें। तो क्या यह आपका काम नहीं है कि आपके जीवन का पहला और सबसे प्रमुख काम यह हो कि आप वास्तव में खुशहाल हों? ‘खुशहाल’ का मतलब सिर्फ सेहत से नहीं है। ‘खुशहाल’ का मतलब है कि आप एक संघर्ष नहीं हैं, आप अपने जीवन में ख़ुद एक समस्या नहीं हैं। दुनिया में दूसरी समस्याएं हैं, अपनी काबिलियत के अनुसार हम उनसे निपट लेंगे। मगर आपको खुद कभी समस्या नहीं बनना चाहिए। ऐसा होने के लिए, एक निवेश करना पड़ेगा। आपको कुछ समय निकालना होगा, जो सिर्फ उसी के लिए है। या तो आप यह अपने घर में करें, अगर ऐसा करना संभव हो, या फिर आश्रम में थोड़ा समय बिताएं, जहां इसी के लिए सुविधाएं बनाई गई हैं। अगर आप खुद इसका प्रबंध कर सकते हैं, तो बढ़िया है। अगर आपको व्यवस्था की जरूरत है, तो वह उपलब्ध है। मगर आपको अपनी आंतरिक खुशहाली के लिए समय जरूर लगाना चाहिए। वरना, वह आपको मिलेगी नहीं। निवेश नहीं तो लाभ नहीं।

Love & Grace

 
 
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