क्या योग से आत्महत्या को रोका जा सकता है?

डिप्रेशन और मनोवैज्ञानिक परिस्थितियाँ लोगों को आत्महत्या करने के आख़िरी कदम तक ले जा सकती हैं। यहाँ सद्‌गुरु आत्महत्या के कारणों की चर्चा करते हुए समझा रहे हैं कि कैसे बाहरी परिस्थितियों के बावजूद, योग, व्यक्ति को स्वयं ही आनंदपूर्ण रहने में मदद कर सकता है?
क्या योग से आत्महत्या को रोका जा सकता है?
 

सद्‌गुरु: हर साल दुनिया में 8 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। यह हत्याओं और युद्ध के कारण मरने वाले लोंगों की कुल संख्या से भी ज्यादा है। इसका मतलब है कि हर 40 सेकंड में 1 व्यक्ति अपनी जान ले रहा है। लेकिन जब ऐसा कोई व्यक्ति जिसे आप जानते हों या फिर जो समाज में लोकप्रिय या महत्वपूर्ण हो, ऐसा करता है तभी हम इस बात पर ध्यान देते हैं।  

आत्महत्या के विचार आने के क्या कारण हैं?

कोई मनुष्य अपना ही जीवन क्यों खत्म कर देता है? कुछ लोग अपने जीवन की परिस्थितियों के कारण आत्महत्या कर सकते हैं, पर ज़्यादातर लोग अपनी मानसिक परिस्थितियों के कारण आत्महत्या करते हैं ।

जब वे अपने स्वभाव से ही शांतिपूर्ण हों तो कोई अपनी ही जान क्यों ले लेगा? कोई डिप्रेस्ड क्यों रहेगा?

हमारी शिक्षा व्यवस्था में हमने ऐसा कुछ नहीं रखा है जो हमें हमारे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक ढाँचे को संभालना सिखाये। ज्यादातर मनुष्यों को यह नहीं सिखाया गया है कि वे अपनी बुद्धिमत्ता को कैसे संभालें? आप के पास जितना दिमाग है, उसका सिर्फ आधा होता तो आपको कोई मानसिक बीमारी न होती। अब, आपके पास एक खास स्तर की बुद्धिमत्ता है पर न तो आपको कोई प्रशिक्षण दिया गया है, न ही आप ऐसी सामाजिक परिस्थितियों में रहते हैं जहाँ आपको ये सिखाया गया हो कि अपनी खुशहाली के लिये अपनी बुद्धिमत्ता का उपयोग कैसे करें? तो, आपकी अपनी ही बुद्धिमत्ता आपके खिलाफ जा रही है। आपको परिस्थितियाँ इतनी ख़राब लगने लगती हैं कि आत्महत्या के सिवा कोई चारा नज़र नहीं आता। और इसकी वजह से लोग आत्महत्या का क़दम उठाते हैं।

इसको आसानी से रोका जा सकता है, अगर कोई सही व्यवस्था हो जिसमें बचपन से ही सब को कुछ खास प्रक्रियाएँ सिखायी जायें जिससे वे अपने स्वभाव से ही शांतिपूर्ण रहें, और उनके जीवन के अनुभव स्वाभाविक रूप से सुखद हों। जब वे अपने स्वभाव से ही शांतिपूर्ण हो जायेंगे तो फिर कोई अपनी ही जान क्यों लेगा? कोई डिप्रेस्ड क्यों रहेगा?

डिप्रेशन से बाहर आना

डिप्रेशन का मतलब सिर्फ जिसे मेडिकल आधार पर डिप्रेशन कहते हैं, वही नहीं है। आज आपके जीवन के साथ अगर कोई दो बातें भी गलत हो जाती हैं तो आप हल्के से डिप्रेशन में आ ही जाते हैं। मुझे लगता है कि अधिकतर लोग कभी न कभी, जीवन की किसी परिस्थिति के कारण, डिप्रेशन में आना शुरू हो जाते हैं पर कुछ ही घंटों में वे अपने आपको इसमें से बाहर निकाल लेते हैं। वे किसी तरह की प्रेरणा का उपयोग करते हैं जैसे किसी के लिये उनका प्रेम, राष्ट्र या और कुछ भी जो उनके जीवन में उनके लिये कुछ महत्व रखता है, और वे इससे बाहर आ जाते हैं।या तो आप खुद ही सोच-विचार करके इसमें से बाहर आते हैं या फिर अपने किसी दोस्त को, परिवार में किसी को बताते हैं जो आपके साथ बात कर के आपको इसमें से बाहर निकालते हैं। अगर ऐसा कोई नहीं है तो आप किसी पेशेवर सलाहकार की मदद लेते हैं।

अगर डिप्रेशन से बाहर आने का रास्ता नहीं होता, तो कोई मनोवैज्ञानिक क्यों आपके साथ बैठ कर घंटों बात करेगा? स्पष्ट है कि वे जानते हैं कि वे आप से बात कर के आपको इससे बाहर निकाल सकते हैं। नहीं तो फिर दवाओं की मदद लेनी पड़ती है। जब बात दवाओं यानि रसायनों की आती है, तो हमारा मनुष्य शरीर इस धरती पर सबसे ज्यादा जटिल पर प्रभावशाली रासायनिक कारखाना है। सवाल यही है कि आप इस रासायनिक कारखाने के बढ़िया मैनेजर हैं या बेकार मैनेजर हैं? योग का मतलब ये है कि आप अपने खुद के रासायनिक कारखाने के कुशल मैनेजर हैं।

योग द्वारा आत्महत्या की रोकथाम

इसमें कोई संदेह नहीं है कि योग का फायदा लाखों लोगों ने लिया है। हमारे पास अनुभवों का पर्याप्त डेटा है जिससे हम जानते हैं कि ये काम करता है। अब तो खून के परीक्षण भी किये जा रहे हैं और हम साफ तौर पर देख रहे हैं कि अनुवांशिक समस्यायें भी योग क्रियाओं से ठीक हो रही हैं।

खून के परीक्षण भी किये जा रहे हैं और हम साफ तौर पर देख रहे हैं कि अनुवांशिक समस्यायें भी योग क्रियाओं से ठीक हो रही हैं

ये सही तौर से हमें बता रहा है कि यौगिक क्रियायें कर के आप न केवल मनोवैज्ञानिक बीमारियों को होने से रोक सकते हैं, बल्कि अगर इन क्रियाओं को सही ढंग से करें तो बीमार लोग भी अपनी बीमारी में से बाहर आ सकते हैं। एक ही समस्या है कि जब कोई मानसिक डिप्रेशन की अवस्था में हो तो उनसे यौगिक क्रियायें करवा पाना ही एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर उनके साथ समर्पित लोग नहीं हैं जो उन्हें सहायता दे कर ये करा सकें तो हर रोज़ उनसे ये करा पाना संभव नहीं होगा। मैं आपको ऐसे हज़ारों लोग दिखा सकता हूँ जो इन क्रियाओं को कर के अपनी कई तरह की मानसिक समस्याओं में से बाहर आये हैं, क्योंकि हम एक सहायक वातावरण तैयार करते हैं। ये हर घर में कर पाना संभव नहीं हो सकता। सवाल इसको करने का है। हालाँकि कुछ ऐसे रोगों के मामले भी होते हैं जो बहुत मुश्किल होते हैं। हमने कुछ ऐसे मामले भी देखे हैं और उन लोगों की दवाईयों की मात्रा में महत्वपूर्ण गिरावट लाये हैं।

 

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