Sadhguru

‘लीला’ की इस श्रृंखला में आप पढ़ रहे थे कहानी कौरवों और पांडवों के जन्म की। चुंकि ये घटनाएं और पात्र कृष्ण के जीवन से इस तरह जुड़े हुए हैं कि कृष्ण की कहानी जानने और समझने के लिए इन्हें भी जानना जरुरी हो जाता है। आइए अब वापस चलते हैं वृंदावन और देखते हैं कि वहां क्या चल रहा है। आखिर ऐसा क्या हो गया कि राधा कृष्ण से मिलकर बेहोश हो गईं ?

वृंदावन के नजदीक एक तालाब था, जिसमें कालिया नाम का एक विशालकाय नाग अपने तमाम दूसरे सर्प साथियों के साथ रहता था। फिर राधे आईं। कृष्ण को देखकर वह चीख पड़ीं। उन्होंने कृष्ण को गले लगाया, फिर वह गिर गईं और मूर्छित हो गईं। गांव के बड़े बुजुर्गों को राधे का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा।

Subscribe

Get weekly updates on the latest blogs via newsletters right in your mailbox.
No Spam. Cancel Anytime.

कालिया नाग

आसपास के इलाके में रहने वालों के लिए ये नाग एक तरह का आतंक बन गए थे, क्योंकि जो कोई भी उनके नजदीक जाता, वे उसे काट लेते। इन सांपों के जहर से लोगों की मौत हो जाती। इंसान ही क्या, तालाब में पानी पीने के लिए आने वाले जानवरों को भी ये नाग काट लेते थे।
एक दिन की बात है। कुछ ग्वाले अपनी गायों को चराने तालाब के नजदीक ले गए। कुछ गायों ने जैसे ही तालाब का पानी पिया, सांपों ने उन्हें डस लिया और वे वहीं ढेर हो गईं। ग्वाले घबरा गए और उन्होंने रोना शुरू कर दिया क्योंकि मर चुकी गायों को लेकर घर जाने की उनके अंदर हिम्मत नहीं थी। यह सब देखकर कृष्ण ने कहा, ‘बस बहुत हो चुका। अब मैं जरा देखता हूं इस नाग को।’ जैसे लोगों से निपटने का उनका अपना एक खास अंदाज था, वैसे ही जानवरों से निपटने का भी उनका एक तरीका था। वे उस तालाब के अंदर घुसे और उन्होंने उस नाग को बाहर निकाला और उसके पीछे बाकी नाग भी बाहर आ गए।
तमिलनाडु में ऐसे कई कबीले हैं, जो सांपों को पकडऩे का काम करते हैं। ये लोग एक जगह बैठकर सांपों को सम्मोहित करते हैं। मान लीजिए, आप ऐसे किसी व्यक्ति को यहां बुलाते हैं, वह बैठ जाएगा, कुछ मंत्र बोलेगा, कुछ खास तरह की क्रियाएं करेगा और सैकड़ों नाग वहां इकठ्ठे हो जाएंगे। उन सब सांपों को पकडक़र वह अपनी झोली में डालेेगा और अपने साथ ले जाएगा। एक ही शाम में वह अपना पूरा का पूरा झोला सांपों से भर लेगा। जो लोग प्रकृति के नजदीक रहते हैं, उन्हें इस तरह की चीजों की जानकारी रहती है। इस संस्कृति में ऐसे बहुत सारे लोग रहे हैं।
खैर, कालिया एक भयानक विशाल नाग था। उससे निपटने के लिए कृष्ण ने तालाब में छलांग लगा दी। लोगों को लगा कि बस अब उनका अंत हो जाएगा। ग्वाले घबरा गए और उन्होंने रोना शुरू कर दिया क्योंकि मर चुकी गायों को लेकर घर जाने की उनके अंदर हिम्मत नहीं थी। यह सब देखकर कृष्ण ने कहा, ‘बस बहुत हो चुका। अब मैं जरा देखता हूं इस नाग को।’ कृष्ण के कूदने की वजह से पानी में जो लहरें पैदा हुईं, उनके चलते नाग तुरंत ही बाहर आ गए और मौका देखकर कृष्ण ने कालिया को दबोच लिया। उसके साथ किनारे तक तैरते हुए आए, कुछ देर तक संघर्ष चलता रहा और अंत में वे उस पर हावी हो गए। इस तरह से कृष्ण ने इस तालाब को जहरीले सांपों से मुक्त कर दिया, जिसके चलते वहां के लोग परेशान रहते थे। लोगों को लगा कि यह तो जबर्दस्त चमत्कार हो गया।
जिस वक्त कृष्ण कालिया नाग के साथ संघर्ष कर रहे थे, कुछ ग्वालों ने गांव में जाकर सबको बता दिया कि कृष्ण ने खतरनाक सांपों से भरे उस तालाब में छलांग लगा दी है। पूरा का पूरा गांव वहां इकठ्ठा हो गया। वहां जो कुछ भी हो रहा था, उसे देखकर हर कोई डरा हुआ था। माता यशोदा भी वहां आईं और जोर-जोर से रोने लगीं।

फिर राधे आईं। कृष्ण को देखकर वह चीख पड़ीं। उन्होंने कृष्ण को गले लगाया, फिर वह गिर गईं और मूर्छित हो गईं। गांव के बड़े बुजुर्गों को राधे का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा। उन्हें लगा कि कृष्ण के प्रति राधे का जबर्दस्त लगाव सही नहीं है और उस दिन के बाद से राधे को घर से निकलने पर ही रोक लगा दी गई। राधे भीतर ही भीतर घुटी जा रही थीं, क्योंकि अब वह कृष्ण के साथ न तो खेल सकती थीं और न नृत्य कर सकती थीं। जब कभी भी उन्हें बांसुरी की आवाज सुनाई देती या पता चलता कि रासलीला चल रही है तो वह खुद को रोक नहीं पातीं और वह भागने की कोशिश करतीं। घरवालों को जब यह पता चला तो उन्होंने राधे को खाट से बांध दिया, जिससे कि वह कहीं बाहर न जा सकें।

एक दिन की बात है। कुछ ग्वाले अपनी गायों को चराने तालाब के नजदीक ले गए। कुछ गायों ने जैसे ही तालाब का पानी पिया, सांपों ने उन्हें डस लिया और वे वहीं ढेर हो गईं।
पूरा का पूरा गांव वहां इकठ्ठा हो गया। वहां जो कुछ भी हो रहा था, उसे देखकर हर कोई डरा हुआ था। माता यशोदा भी वहां आईं और जोर-जोर से रोने लगीं।

आगे जारी ...

Photo Courtesy: Shivani Naidu