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प्रेम कोई लेन-देन नहीं है। प्रेम एक सुंदर अनुभूति है जो आपके भीतर घटित होती है। यह बाहर प्रकट हो सकता है, लेकिन इसका स्रोत भीतर ही है।
किसी को खुश करने की कोशिश न करें। यदि आप वास्तव में आनंदित हैं और आपके भीतर मानवता का प्रवाह है, तो आप हर किसी के साथ सहज रहेंगे।
अपराधबोध समाज द्वारा निर्मित भावना है - यह स्वयं को दिया जाने वाला एक जहर है।
जब आप अपनी यादों के दायरे में जीते हैं, तो आप उसे नहीं देख पाते जो ठीक आपके सामने है।
बिना किसी स्पष्टता के लोग अत्यधिक आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। यह एक आपदा है।
जब आपका दिल प्रेम से भरा हो और आपका मन स्वयं के बोध से मुक्त हो, तो आपके पैर अपने आप थिरक उठेंगे।
जीवनसाथी कोई मंजिल नहीं, बल्कि जीवन की यात्रा में एक सहयात्री है।
यह शरीर पृथ्वी का ही एक अंश है। एक स्वस्थ धरती के बिना खुशहाल जीवन संभव नहीं है।
आज ही के दिन गौतम बुद्ध को यह बोध हुआ था कि सत्य के लिए कहीं जाना नहीं होता। यदि आप उपलब्ध हो जाएं, तो यह यहीं है।
अगर आप हजार साल भी जिएं, तब भी मानवीय कल्पना और आकांक्षाएं पूरी नहीं हो सकतीं। तो आइए हम असफलता में भी आनंदित रहें।
आत्म-सुरक्षा की जो दीवारें आप अपने चारों ओर बनाते हैं, समय के साथ वही आपके लिए कारावास बन जाती हैं।
भरोसे का मतलब यह नहीं है कि दूसरे आपकी उम्मीदों के हिसाब से चलें। भरोसे का मतलब है पूरी जागरूकता के साथ खुद को असुरक्षित बनाए रखना।