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अपने तर्क से परे जाना मुक्ति-दायक है, लेकिन इसे छोड़ देना मूर्खता है।
अपने आसपास के लोगों को गुलाम बनाने की कोशिश मत कीजिए। वे जैसे हैं, वैसे ही हैं। बस इस एक जीवन की जिम्मेदारी लीजिए – खुद की।
कोई भी आपको मानसिक पीड़ा नहीं पहुंचा सकता। यह आप खुद ही हैं – जो अपने आसपास होने वाली घटनाओं पर प्रतिक्रिया देकर खुद को पीड़ा पहुंचाते हैं।
जीवन सहज है। केवल मन तनाव में है।
अपने भीतर डर पैदा करने के लिए, आपको उन चीजों की कल्पना करनी पड़ती है, जो अब तक हुई ही नहीं। डर से मुक्त होने के लिए, आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।
सच में मायने यह नहीं रखता कि लोग आपसे प्रेम करें, बल्कि यह कि आप प्रेममय हैं।
आप केवल उन लोगों से ही बंधे नहीं होते जिन्हें आप पसंद करते हैं या प्रेम करते हैं। जिन लोगों को आप नापसंद करते हैं या जिनसे नफरत करते हैं, उनसे आपका बंधन और भी अधिक गहरा होता है।
उम्र के साथ, आपकी शारीरिक फुर्ती कम हो सकती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आपकी जीवंतता कम होने लगे।
एक गुरु आपके भीतर के अंधकार को दूर करते हैं। वे भीतर से प्रज्वलित होते हैं। मेरी कामना है कि आप भी इसी लौ के साथ जलें, और हर उस चीज से पार निकल जाएं, जो आपको रोकती है।
अगर आपमें पूरी स्पष्टता है, तो साहस की कोई जरूरत ही नहीं, क्योंकि स्पष्टता आपको पार ले जाएगी।
हम सब आत्मज्ञानी पैदा हुए हैं। अज्ञान हमने चुना है।
दूसरों से तुलना करके अपना जीवन बर्बाद मत कीजिए। बस ये देखिए कि क्या आप कल के मुकाबले आज थोड़े बेहतर हुए हैं।