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कोई भी आपको मानसिक पीड़ा नहीं पहुंचा सकता। यह आप खुद ही हैं – जो अपने आसपास होने वाली घटनाओं पर प्रतिक्रिया देकर खुद को पीड़ा पहुंचाते हैं।
जीवन सहज है। केवल मन तनाव में है।
दुनिया में ज्यादातर लोग व्यस्त नहीं हैं - वे बस अपनी ही चीजों में उलझे हुए हैं।
ईश्वर को आपकी भक्ति की जरूरत नहीं है। यह तो मनुष्य का हृदय है जिसमें भावनाओं के चरम का अनुभव करने की चाह होती है।
आप केवल उन लोगों से ही बंधे नहीं होते जिन्हें आप पसंद करते हैं या प्रेम करते हैं। जिन लोगों को आप नापसंद करते हैं या जिनसे नफरत करते हैं, उनसे आपका बंधन और भी अधिक गहरा होता है।
उम्र के साथ, आपकी शारीरिक फुर्ती कम हो सकती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आपकी जीवंतता कम होने लगे।
आपके जो सबसे करीबी और प्रिय हैं, उन्हें ही आपके सबसे बुरे रूप झेलने पड़ते हैं। सड़क पर चलते किसी अजनबी को आपके ऐसे भयंकर रूप नहीं झेलने पड़ते।
जागरूकता कुछ ऐसा नहीं है जो आप करते हैं। आप स्वयं जागरूकता हैं।
हम सब आत्मज्ञानी पैदा हुए हैं। अज्ञान हमने चुना है।
दूसरों से तुलना करके अपना जीवन बर्बाद मत कीजिए। बस ये देखिए कि क्या आप कल के मुकाबले आज थोड़े बेहतर हुए हैं।
आप जो करते हैं, उसे यह तय नहीं करना चाहिए कि आप कौन हैं। बल्कि आप कौन हैं, उसे यह तय करना चाहिए कि आप क्या करते हैं।
अगर आप उन सीमाओं को पार करना चाहते हैं जिनमें आप अभी हैं, तो आपके दिल में पागलपन और दिमाग में पूर्ण संतुलन होना चाहिए।