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अगर आप उन सीमाओं को पार करना चाहते हैं जिनमें आप अभी हैं, तो आपके दिल में पागलपन और दिमाग में पूर्ण संतुलन होना चाहिए।
जब दो लोग साथ आते हैं, तो यह खुशियां साझा करने के लिए होना चाहिए, एक-दूसरे से खुशियां निचोड़ने के लिए नहीं।
तनाव जीवन की परिस्थितियों की वजह से नहीं होता। यह इसलिए होता है क्योंकि आप खुद को मैनेज करना नहीं जानते।
जब आपके भीतर मौजूद जीवन का स्रोत ही आपकी सर्वोच्च सत्ता बन जाता है, तब आपके आस-पास के लोगों की राय और उनके निष्कर्ष मायने नहीं रखते।
मोह प्रेम नहीं है। किसी के प्रति आसक्त होना उस दूसरे व्यक्ति के बारे में नहीं है – यह आपके अपने अधूरेपन की भावना का परिणाम है।
जो कुछ भी आप इकट्ठा करते हैं, वह आपका हो सकता है। लेकिन वह कभी "आप" नहीं हो सकता।
आपके विचार और भावनाएं आपके अपने बनाए भूत हैं। आप उन्हें बनाते हैं, फिर वे नियंत्रण से बाहर होकर आपको ही डराते हैं। यह एक खराब तरीके से निर्देशित हॉरर मूवी जैसा है।
जानकारी हासिल की जा सकती है। 'जानना' एक बोध है। लेकिन बुद्धिमानी आपको कमानी पड़ती है, और इसमें पूरा जीवन लग जाता है।
मन, समाज का कूड़ेदान है। जो कोई भी यहां से गुजरता है, इसमें कुछ न कुछ डाल देता है।
जब कोई खुद पर 'बहुत अच्छा' होने का ठप्पा लगा लेता है, तो यह तय है कि वह बहुत क्रूर हो जाएगा।
आजादी का अर्थ है अपने जीवन को स्वयं गढ़ने का सामर्थ्य होना, न कि इसे किसी और चीज के द्वारा तय होने देना।
जीवन तब सुंदर बनता है जब आप इसमें अपना सब कुछ झोंक देते हैं और इस बात की परवाह नहीं करते कि आपको क्या मिलता है और क्या नहीं। जीवन का आनंद खुद को अभिव्यक्त करने में है, भीख माँगने में नहीं।