ग्रामीण कायाकल्प कार्य योजना

ग्रामीण कायाकल्प कार्य, एक अग्रणी सामाजिक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत की ग्रामीण और गरीब आबादी के जीवन को रूपांतरित करना है।
 
 
 
 

एक सार्थक पहल

70 लाख लोगों को लाभ 4200 गाँव शामिल 20 लाख स्वयंसेवक 150 से अधिक ग्रामीण जड़ी-बूटी वाटिकाओं का निर्माण योग कक्षाओं से 100,000 लोगों को लाभ

एक्शन फॉर रूरल रिजुनवेशन (एआरआर) या ग्रामीण कार्याकल्प कार्य योजना, गाँवों तक पहुँच बनाने वाला एक बहुआयामी और सम्पूर्ण कार्यक्रम है, जिसकी स्थापना सद्गुरु द्वारा वर्ष 2003 में की गई। एआरआर का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण निर्धनों की सेहत और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके अंतर्गत सुनियोजित कल्याणकारी प्रयासों के द्वारा मौजूदा विकास योजनाओं को योगदान दिया जा रहा है। ये योगदान स्वास्थ्य के देसी मॉडल, सहयोगी शासन तथा सामुदायिक उल्लास को बढ़ावा देने के माध्यम से दिया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रशिक्षित व योग्यता प्राप्त स्वयंसेवकों का समर्पित दल काम कर रहा है, और ये परियोजना तमिलनाडू, कर्नाटक व पांडिचेरी के लगभग 4200 गाँवों में अपनी सेवाएँ दे रही है।

एआरआर ग्रामीण लोगों के जीवन में सकारात्मक लहर लाने में सफल रहा है। स्वास्थ्य की देख-रेख, खेल, योग, सामुदायिक विकास व सामाजिक संपर्क वाली इसकी बहु-आयामी पहल को इसकी सफलता का श्रेय दिया जा सकता है। एआरआर ग्रामीणों के अल्पकालीन हितों और प्रकल्पों को लम्बे समय तक सहारा देने के लिए काम करता है। इसके अंतर्गत समुदाय को परियोजनाओं में शामिल करते हुए, स्वामित्व भाव देने का प्रयास किया जाता है ताकि वे स्वयं अपनी भलाई के लिए कदम उठा सकें। ईशा फाउंडेशन द्वारा ग्रामीण इनर इंजीनियरिंग प्रोग्राम व क्रिया अभ्यास, ग्रमीणों को स्वास्थ्य की देख-रेख, जीवन शक्ति, मानसिक शांति व आनंद की अवस्था पाने में सहायक हैं। जब इन कार्यक्रमों के बाद स्वयंसेवियों काल दल तैयार हो जाता है, तब एआरआर गाँव के सभी लोगों को सामुदायिक खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।

देख-रेख की संस्कृति

एआरआर ग्रामीणों के मानसिक स्वास्थ्य को भी अच्छा रखने के लिए कार्यरत है। बड़ी संख्या में किसानों द्वारा आत्महत्या करने के प्रयासों को देखते हुए, ‘वॉंम्ब्स ऑफ़ कंपेशन’ यानी ”करुणा के गर्भ” की स्थापना की गई है, इसके अनुसार हर गाँव में एक व्यक्ति को ग्राम सलाहकार के तौर पर प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि किसान अपने मन का भार हल्का कर सकें और उन्हें अपनी समस्याओं के लिए संभावित हल सुझाए जा सकें।

एआरआर एचआईवी या एड्स ग्रस्त लोगों की देख-रेख भी करता है। एआरआर मोबाइल हेल्थ क्लीनिकों में ऐसे मरीज़ों को सलाह और निदान के लिए भेजा जाता है। ईशा ग्रामीण स्वास्थ्य क्लीनिकों में जाँच करवाने के लिए सहमत मरीज़ों के लिए जाँच की सुविधा भी उपलब्ध है। एआरआर तमिलनाडू राज्य स्टेट एड्स सोसायटी से भी जुड़ा है और कोयंबतूर के पल्लडम नामक इलाके में, इन मरीज़ों की सलाह व उपचार के लिए सामुदायिक देख-रेख केंद्र भी चला रहा है।