ज्ञान और आत्मज्ञान क्या है

आत्मज्ञान क्या है ? और ये ज्ञान से कैसे अलग है ? शायद ये साधकों द्वारा सबसे अधिक बार पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक हैं। क्या आध्यात्मिक अभ्यास ज्ञान दे सकते हैं? तीन जीवनों में आत्मज्ञान का अनुभव करने वाले योगी और दिव्यदर्शी सद्गुरु इन सवालों के जवाब दे रहे हैं।
 
 

आत्म ज्ञान क्या है?

आप जिसे ‘आत्म-बोध’ कहते हैं, वह जागरूकता से किया गया आत्म-विध्वंस है।

सद्‌गुरु:भारत में, आत्म-बोध को प्राप्त हुए मनुष्य द्विज कहलाते आए हैं, द्विज का अर्थ है दो बार जन्म पाने वाला। एक बार आप अपनी माता के गर्भ से जन्म पाते हैं; जो कि अचेतन रूप से होता है। आप इसे खुद नहीं करते - प्रकृति आपके लिए ऐसा करती है। जब आपका जन्म हुआ था तो आप एक निश्चित प्रकार की मासूमियत और आनंदी स्वभाव के साथ जन्मे थे। एक बालक स्वभाव से आनंदी और निश्चल होता है। परंतु यह भाव जागरूकता से नहीं प्राप्त हुआ है, इसलिए इसे कोई भी नष्ट कर सकता है, वे इसे पल भर में आपसे छीन सकते हैं। आपमें से कुछ लोगों से तो, इसे 12 या 13 वर्ष की आयु में छीन लिया गया था। कई लोगों से इसे 5 या 6 साल की आयु में ही ले लिया गया था। बच्चे आजकल छह साल की आयु में तनावग्रस्त हो रहे हैं क्योंकि उनकी निश्चलता नष्ट हो जाती है। ये निश्चलता किस हद तक नष्ट होगी, ये उनके आसपास के लोगों द्वारा, उन पर डाले जा रहे प्रभाव पर निर्भर करता है।

यह पूरा लेख ईशा ब्लॉग पर पढ़ें: