इनसाइट - सफलता का डी. एन. ए. - तीसरा दिन

इनसाइट, ईशा फाउंडेशन के ईशा एजुकेशन पहल का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो उद्योगपतियों को ऐसे व्यावहारिक तरीके सिखाता है, जो बाहरी हालातों के साथ-साथ अंदरूनी विकास के प्रबंधन की उनकी क्षमता को बढ़ाते हैं।
इनसाइट - सफलता का डी. एन. ए - 4
 

इनसाइट, ईशा फाउंडेशन के ईशा एजुकेशन पहल का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो उद्योगपतियों को ऐसे व्यावहारिक तरीके सिखाता है, जो बाहरी हालातों के साथ-साथ अंदरूनी विकास के प्रबंधन की उनकी क्षमता को बढ़ाते हैं।

आइये पढ़ते हैं इनसाइट के तीसरे दिन के सत्र के बारे में…

तीसरे दिन के सत्र में श्री जी वी प्रसाद ने मंच संभाला...

जी वी प्रसाद: प्रसाद उस कोर टीम का नेतृत्व करते हैं, जो डॉ.रेड्डी लैबोरेट्रीज में विकास और कार्य प्रदर्शन को बढ़ावा देती है।

अधिकार सौंपने की बात करते हुए, श्री प्रसाद ने कहा, ‘अक्सर हमें लगता है कि सिर्फ हम सही निर्णय ले सकते हैं मगर मेरे अनुभव में, हम औरों जितनी ही गलतियां करते हैं।

उन्होंने बताया कि किस तरह डॉ.रेड्डी लैबोरेट्रीज छात्रों को उस समय भर्ती करते हैं, जब वे अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर चुके होते हैं।
अगर हम इस बात को पहचान लें और स्वीकार कर लें कि हम परफेक्ट नहीं हैं, तो सहज रहना और कार्य दूसरों को सौंपना आसान हो जाता है।’ उन्होंने प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ने देने की जरूरत पर जोर दिया, ‘जब आपके पास बुद्धिमान लोग होते हैं, तो आप उन्हें यह नहीं बता सकते कि उन्हें क्या करना है। मैं उनकी बात सुनता हूं और मेरे लिए यह कारगर होता है।’

उन्होंने बताया कि एक नेता को अपनी शख्सियत पर ध्यान देना चाहिए। वह बोले, ‘आपको आईने में देखकर खुद से पूछना चाहिए कि क्या आप दूसरों को पसंद आने लायक हैं। क्या किसी लिफ्ट में आपके साथ फंसे शख्स को आप दिलचस्प लगेंगे?’ उन्होंने आगे कहा, ‘हर संगठन अपनी पूर्ण क्षमता तक तभी पहुंच सकता है, अगर शीर्ष पर मौजूद उसका नेता उस संभावना को देख सकता है। कोई संगठन अपने नेता की काबिलियत तक सीमित होता है, इसलिए यह नेता की जिम्मेदारी है कि वह लगातार खुद को नया रूप देता रहे और अपनी क्षमता बढ़ाता रहे।’

श्री प्रसाद ने भारत के इतिहास और विरासत का लाभ उठाने की बात की। उन्होंने कहा कि हमें समस्या का हल ढूंढने वाले से आगे बढ़कर कल्पनाशील लोगों के रूप में विकसित होना चाहिए। ‘शिक्षा भारत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है,’ उन्होंने कहा।

अगर हम इस बात को पहचान लें और स्वीकार कर लें कि हम परफेक्ट नहीं हैं, तो सहज रहना और कार्य दूसरों को सौंपना आसान हो जाता है।
उन्होंने निराशा व्यक्त की कि हमने अपने डिजाइन इतिहास का फायदा नहीं उठाया है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है, जो इसमें मददगार हो।’

फिर उन्होंने सीएसआर की बात की और कहा कि किस तरह ‘अपने कारोबार को अच्छी तरह चलाना और अच्छा काम करना एक समाज सेवा है क्योंकि यह बहुत असरदार है।’ उन्होंने बताया कि किस तरह डॉ.रेड्डी लैबोरेट्रीज छात्रों को उस समय भर्ती करते हैं, जब वे अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर चुके होते हैं। उसके बाद उन्हें काम के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और स्नातक पाठ्यक्रमों में उनका दाखिला कराया जाता है ताकि वे एक साथ पढ़ाई और कमाई दोनों कर सकें। उन्होंने कहा कि इनमें से कई विद्यार्थी विदेश भी गए हैं। उन्होंने बताया कि वे एक मजबूत कार्य शक्ति हैं और कंपनी के लिए बहुत वफादार होते हैं। श्री प्रसाद ने कहा, ‘अगर हम सभी साझेदारों के लिए सही चीज करें, तो कामयाबी अपने आप आएगी।’

संपादक की टिप्पणी: इनसाइट ईशा में हर वर्ष आयोजित किया जाने वाला 4 दिवसीय कार्यक्रम है। इस वर्ष यह कार्यक्रम 27 से 30 नवंबर तक चलेगा और इसमें भारत के कुछ बेहद मशहूर नाम, जैसे रतन टाटा, जी मल्लिकार्जुन राव और किरण बेदी, शामिल होंगे…

 
 
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