1. Home/
  2. Blog/
  3. Video/
  4. पल कल-कल बह जाए रे

पल कल-कल बह जाए रे

सद्‌गुरु बहुत बार हमसे कहते हैं – “ज्यादातर समय आप जिंदगी के बारे में सोच रहे होते हैं, जिंदगी जी नहीं रहे होते”। हम अपनी जिंदगी को देखें तो यह बिलकुल सच लगता है। हम अपना ज्यादा समय बीते हुए कल के बारे में सोचते हुए या फिर आने वाले कल के बारे में चिंता करते हुए बिताते हैं। हिंदी भाषा में ‘कल’ शब्द आने वाले और बीते हुए कल – दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि दोनों का ही अस्तित्व नहीं है, अस्तित्व तो केवल इस पल का है।

video

Aug 19, 2022


Subscribe

Get weekly updates on the latest blogs via newsletters right in your mailbox.
Related Content
video  
पंचभूत आराधना
हर शिवरात्रि को होती है ध्यानलिंग मंदिर में पंचभूत आराधना। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर यह शक्तिशाली प्रक्रिया सद्‌गुरु खुद करते हैं।
Aug 16, 2022
Loading...
Loading...
video  
आदीयोगी प्रणमाम्यहम् - महाकाल शिव की स्तुति
डमरू एल्बम फ्री डाउनलोड करें: http://isha.co/Damaru
Jul 24, 2022
Loading...
Loading...
video  
ईशा आउटरीच - ग्रामीण कायाकल्‍प अभियान
साल 2004 में सद्गुरु द्वारा शुरू की गई योजना “एक्शन फ़ॉर रूरल रिजुवनेशन”, एक अनूठी और सुनियोजित परियोजना है, जिसमें गांव के लोगों में जोश और उत्साह को बढ़ाने के लिए, चिकित्सा सुविधा व सामुदायिक पुनर्वास की सुविधा दी जाती है। ‘मोबाइल हेल्थ क्लिनिक’ इस परियोजना का मुख्य आकर्षण है। इसे विशेष रूप से तैयार किया गया है, जहां स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ये मोबाइल क्लिनिक गांव के लोगों की तुरन्त मदद करते हैं और साथ ही साथ उनको स्‍थाई रूप से स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। गांवों में नशे की बढ़ती समस्या के चलते, खेल और मनोरंजन को एक स्वस्थ विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है। ग्रामीण जीवन में तरोताज़गी पैदा करने और उनका मनोबल बढ़ाने में ये छोटे-छोटे कदम बहुत कारगर सिद्ध हुए हैं।
Jul 20, 2022
Loading...
Loading...