12 चीज़ें जो शायद आप 112 फीट के आदियोगी के बारे में नहीं जानते

article आध्यात्मिकता और रहस्यवाद
1 मार्च, 2022 को आने वाली महाशिवरात्रि के साथ, ईशा योग केंद्र आदियोगी की मौजूदगी में होने वाले इस उल्लासमय रात भर चलने वाले उत्सव के लिए तैयारी में जुटा है। वहाँ की यात्रा से पहले आपको 112 फीट के आदियोगी के बारे में ये 12 चीज़ें जाननी चाहिए।

1. गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने आदियोगी को दुनिया में ‘सबसे विशाल बस्ट’ के रूप में मान्यता दी है जो 112 फीट ऊँची है। पहले योगी की यह अद्भुत मूर्ति 150 फीट लंबी, 25 फीट चौड़ी है और लगभग 500 टन स्टील वे बनी है।

 

2. आदियोगी दिव्य दर्शनम

एक अद्भुत 3डी लेजर शो में आदियोगी आकाश को जगमगा देते हैं, जिसमें यह दिखाया जाता है कि आदियोगी ने कैसे मानवता को योग विज्ञान की भेंट दी। सप्ताहांतों, पूर्णिमा, अमावस्या और दूसरे शुभ दिनों पर शाम 8 बजे से 8:15 बजे यह शो देखिए।

3. आदियोगी वस्त्र भेंट

आदियोगी के चारो ओर लगे 621 त्रिशूलों में से किसी एक पर काला कपड़ा बांधते हुए भक्त आदियोगी को वस्त्रम भेंट कर सकते हैं।

4. आदियोगी प्रदक्षिणा

आदियोगी प्रदक्षिणा ध्यानलिंग और आदियोगी की दो किलोमीटर लंबी प्रदक्षिणा है। इसे सद्गुरु द्वारा आदियोगी की कृपा के प्रति ग्रहणशील बनने के लिए बनाया गया था, जो चरम मुक्ति के प्रति व्यक्ति की लालसा को तीव्र बना सकता है। एक मंत्र का जाप करते हुए और एक मुद्रा को धारण करते हुए प्रदक्षिणा करना ईशा योग केंद्र के तमाम प्राणप्रतिष्ठित स्थानों की ऊर्जा को ग्रहण करने का एक तरीका है।

5. योगेश्वर लिंग भेंट

योगेश्वर लिंग की ऊर्जा के प्रति ग्रहणशील बनने के लिए, भक्त लिंग पर जल और नीम की पत्तियों की भेंट चढ़ा सकते हैं।

6. पूर्णिमा संगीत समारोह

हर पूर्णिमा की रात को, आदियोगी का स्थान आधीरात तक खुला रहता है और रात 10:30 से 11:30 तक साउंड्स ऑफ ईशा द्वारा आदियोगी को एक संगीत प्रस्तुति की भेंट दी जाती है।

7. अमावस्या

हर अमावस्या को, नजदीकी गाँवों के लोग योगेश्वर लिंग पर पारंपरिक चढ़ावा चढ़ाते हैं। पारंपरिक संगीत और नृत्य की भेंट भी होती है, जिसके बाद प्रसादम बाँटा जाता है। यह पूरे परिवार के लिए परफेक्ट है!

8. सद्गुरु का विजन

आदियोगी के आज के चेहरे को बनाने में ढाई साल और दर्जनों डिजाइन लगे। सद्गुरु के दिमाग में एक कल्पना थी कि आदियोगी के चेहरे को कैसे दिखाया जाना चाहिए और सद्गुरु उस कल्पना के साकार होने से ज़रा भी कम पर राज़ी नहीं थे। और क्या अद्भुत परिणाम सामने आया!

 

9. आदियोगी की बेशकीमती संपति

योगेश्वर लिंग के चारों ओर पीतल के फर्श की टाइलें हैं। इनमें बहुत बारीकी से की गई कलाकृतियों की छोटी नक्काशियां है, जो योग परंपरा में वर्णित आदियोगी की सबसे बेशकीमती संपत्तियों को दर्शाती है। बालियां हैं, चंद्रमा का पतला अर्धचंद्र जो उनके उलझे हुए बालों को सुशोभित करता है, एक रुद्राक्ष की माला, एक नीम का पत्ता, एक डमरू, धनुष, कुल्हाड़ी और एक घंटी है।

10. ‘बहुभाषी’ लिंग

अगर आप योगेश्वर लिंग को ध्यान से देखें, तो आप चार अलग-अलग दक्षिण भारतीय भाषाओं : तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में ‘शंभो’मंत्र अंकित किया हुआ देखेंगे।

11. सप्तऋषि मूर्तियाँ

योगेश्वर लिंग स्थान की एक महत्वपूर्ण विशेषता सप्तऋषियों की मूर्तियों को दर्शाता काले पत्थर का पैनल है, जिसे सद्गुरु द्वारा प्रतिष्ठित किया गया है। इस पवित्र पैनल को कभी भी कोई हाथ से नहीं छूता, यहाँ तक कि इसे साफ करने वाले भी।

12. रुद्राक्ष मनके की भेंट

आदियोगी के गले में दुनिया की सबसे बड़ी रुद्राक्ष माला है, जिसमें 100,008 रुद्राक्ष मनकों की माला है। मनके बारहों महीने दिव्य ऊर्जा में डूबे रहते हैं, और हर महाशिवरात्रि को, इस शुभ रात को उन्हें भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

महाशिवरात्रि के दौरान सद्गुरु द्वारा दी जाने वाली ऊर्जा और खुशहाली की संभावनाओं को प्राप्त करना एक दुर्लभ सौभाग्य है। महाशिवरात्रि व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास और कल्याण के लिए प्रकृति की शक्तियों का लाभ उठानसे का एक अनूठा मौका देती है। आदियोगी की उपस्थिति में ईशा योग केंद्र में रात भर चलने वाला यह उत्सव एक गहन आध्यात्मिक अनुभव को सामने लाने के लिए आदर्श वातावरण है।

आपके आगमन की आशा में!

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