यक्ष – संगीत और नृत्य का उल्लासमय उत्सव

1-3 मार्च, 2019 (महाशिवरात्रि से पहले) ईशा योग केंद्र में

भारत में जो कलाएं हजारों सालों में विकसित हुई हैं, वे न सिर्फ इस देश की विविध संस्कृति का एक प्रतिबिंब हैं, बल्कि आध्यात्मिक प्रेरणा भी देती हैं। उन्होंने पीढ़ियों से इस देश को समृद्ध किया है मगर हम अपने जीवन के इस आयाम को तेजी से भूलते जा रहे हैं।

देश की ललित कलाओें की विशेषता और शुद्धता को बनाए रखने और उनकी विविधता को प्रोत्साहित करने की कोशिश के अंतर्गत, ईशा फाउंडेशन हर साल तीन दिवसीय उत्सव ‘यक्ष’ का आयोजन करती है। इस उत्सव में प्रसिद्द कलाकारों द्वारा शास्त्रीय संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों दी जाती हैं।
इस त्योहार का नाम यक्षों के नाम पर रखा गया है, जिनकी चर्चा भारतीय मिथक में की गई है। यक्ष उत्सव एक ऐसा मंच है जो न सिर्फ कलाकारों को विभिन्न तरह की प्राचीन कलाओं को पेश करने का मौका देता है, बल्कि कला प्रेमियों को प्रख्यात कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इन प्राचीन कलाओं का रस लेने का अवसर भी देता है।

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हम आपको भारत की शानदार प्राचीन संस्कृति की विरासत को जानने और एक गहन अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

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प्रस्तुतियां

Yaksha is a spectacular and colorful feast of music and dance hosted annually by Isha Foundation. Celebrated in February/March, Yaksha features some of the greatest artistes in India and attracts thousands of ardent spectators.

 

मार्च 1

श्रीमती कलापिनी कोमकली

हिन्दुस्तानी गायन

कलापिनी के अनूठे, मधुर और प्रचुरता से भरपूर गायन की वजह से उन्हें युवा पीढ़ी की बेहतरीन और गहन प्रशिक्षण प्राप्त शास्त्रीय गायिका माना जाता है। कलापिनी, प्रसिद्द शास्त्रीय गायक कुमार गन्धर्व की पुत्री हैं, और उन्होंने तकनीक और रचनात्मक क्षमता विरासत में पाई है। विरासत में मिली कला को अपने भीतर संजोने के साथ-साथ उन्होंने अपना दृष्टिकोण विकसित किया है और पिछले दशक में एक संवेदनशीलता और तीव्रता से भरपूर गायक के रूप में उभरीं हैं। उनकी प्रस्तुतियों में युवा कल्पना, कलात्मक विचारशीलता और शास्त्रीय संगीत के अलग-अलग आयामों पर परिपक्व पकड़ नज़र आती है।.

 

मार्च 2

श्रीमती रंजनी-गायत्री

कर्नाटक गायन

रंजनी और गायत्री की इस जोड़ी ने अपने कर्नाटक गायन से अनुभवी और नए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। रंजनी और गायत्री ने इस शैली की सुंदरता को बनाए रखा है, और साथ ही, वे इस पारंपरिक शैली के भीतर ही नयापन भी लातीं हैं। उन्होंने कई ख्याति प्राप्त स्थलों पर प्रदर्शन किया है, जैसे – वाशिंगटन डीसी के दी कैनेडी कन्वेंशन सेंटर में, लन्दन के साउथबैंक सेंटर में, इटली के रवेन्ना म्यूजिक फेस्टिवल में, वॉरसॉ, पोलैंड के क्रॉस कल्चर फेस्टिवल में, ढाका के बंगाल म्यूजिक फेस्टिवल में और सिंगापुर के एस्प्लेनेड थिएटर में।

 

मार्च 3

यक्ष के अंतिम दिन भारत की प्रदर्शन कलाओं का उत्सव मनाया जायेगा।.

लीला सैमसन और स्पंदा डांस कंपनी
नदी – दी रिवर

लीला सैमसन एक उत्कृष्ट कलाकार हैं, और भरत नाट्यम की बारीकियों को बहुत संवेदनशीलता से प्रकट करती हैं। वे एकल प्रदर्शन करती हैं और स्पंदा डांस कंपनी के साथ भारतीय और विदेशी कार्यक्रमों के लिए यात्राएं भी करती हैं। लीला को 1982 में संस्कृति अवार्ड, 1990 में पद्मश्री अवार्ड, 1997 में नृत्य चूड़ामणि अवार्ड, 2000 में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड और म्यूजिक अकादमी, चेन्नई द्वारा 2015 में नाट्य कला आचार्य अवार्ड दिया गया है।

ईशा संस्कृति की प्रस्तुति
फकीरा खेता खान और ग्रुप (राजस्थानी लोक संगीत)

दी साड़ी एक्सपीरियंस
एक विशेष वर्कशॉप और रनवे शो में हिस्सा लीजिये, जिसमें साड़ी बाँधने के 108 अलग-अलग तरीके प्रदर्शित किए जाएंगे। इसका संचालन रीता कपूर चिश्ती द्वारा किया जाएगा, जो साड़ीस – ट्रेडिशन एंड बियॉन्ड की लेखिका हैं।

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यक्ष 2019 में हमसे जुड़ें

ईशा योग केंद्र, भारत
प्रवेश नि:शुल्क। सभी का स्वागत है।
शाम 6:50 बजे से – शाम से 8:30 बजे (कृपया 6:40 तक स्थान ग्रहण कर लें।)
अधिक जानकारी के लिए:
83000 83111 पर संपर्क करें या ईमेल करें –info@mahashivarathri.org