
मिलिए मैथ्यू जेवेर्स से, पूर्व रॉयल एयरफोर्स पायलट जिन्होंने ईशा हठ योग शिक्षक की ट्रेनिंग लेकर प्राचीन हठ योग का आतंरिक अनुभव पाने के लिए बोइंग 777 उड़ाने का सुनहरा पेशा पीछे छोड़ दिया।
जब मैं 14 साल का था, मेरे पिता यूँ ही एक दिन मुझे एयर कैडेट सम्मेलन में ले गए। तब मैं नहीं जानता था कि यह मेरे जीवन को बदल देने वाला मोड़ साबित होगा, जो मुझे सशक्त करेगा – पायलट बनने की दिशा में पहला कदम उठाने के लिए । फिर मैं इंगलैंड के ‘एयर एंड स्पेस फ़ोर्स’ उर्फ़ ‘रॉयल एयर फ़ोर्स’ (RAF) में शामिल हुआ। RAF में काम करने के दौरान मैंने ‘फ़ॉर्मेशन फ़्लाइइंग,’ एयरोबेटिक्स, निचले स्तर की उड़ान, हथियार प्रशिक्षण, और अन्य कई चीजों के साथ-साथ छल-कौशल भी सीखा।
बचपन से RAF पॉयलट बनने के सपने के साथ मैं बड़ा हुआ था और जब अपने सपने को हक़ीक़त बनाने के रास्ते पर चल पड़ा तो लगता था कि मेरा जीवन तय है। लेकिन भाग्य के खेल से मैं हमेशा के लिए हांगकांग चला गया, जहाँ अगले नौ साल मुझे कैथे पैसिफ़िक के लिए बोइंग 777 उड़ाना था। मेरे नए काम ने मुझे पूरी दुनिया में कुछ इस तरह से घुमाया जैसा बहुत कम लोगों ने अनुभव किया होगा।
अपनी धरती का वो नज़ारा देखना जो बस अंतरिक्ष यात्री देख सकते हैं, शब्दों से परे है। जब हम हांगकांग से अमेरिका जाते थे, हम ज़्यादातर उत्तरी ध्रुव के ऊपर से जाते थे, जिससे हमें घंटों लंबे सूर्यास्त (या सूर्योदय) और शानदार नॉर्दन लाइट्स देखने का मौका मिलता था। बाकी उड़ानों में ज्वालामुखियों के दृश्य और बर्फ से भरी हुई पहाड़ों की चोटियों का नज़ारा आम बात थी।
अपनी ख़ुशी के लिए मैं एक दिन फिर उड़ना चाहूंगा, लेकिन अभी के लिए, मेरे हाथों में कुछ और बहुत महत्वपूर्ण काम हैं।
मैं जीवन में अपने हिस्से का कष्ट झेल चुका था और कुछ समय से समाधान ढूंढ रहा था। मुझे पता था कि मैं खुद ही अपनी परेशानियाँ बढ़ा रहा हूँ, फिर भी मैं उन्हें रोक नहीं पा रहा था। फिर 2018 में एक दिन, मेरे एक करीबी मित्र ने मुझे सद्गुरु का एक वीडियो भेजा। वीडियो ने मेरी जिज्ञासा बढ़ाई। फिर एक के बाद एक सद्गुरु के कई वीडियो देखने के बाद अगला कदम स्पष्ट था। हांगकांग में हाल ही में खुला ईशा सेंटर मेरे घर से बस पांच मिनट की दूरी पर था। मुझे लगा यह कोई महज़ इत्तफ़ाक़ नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि मैंने जल्दी ही इनर इंजीनियरिंग 8-9 दिसंबर 2018 को पूरा किया, और अब, चार साल बाद आज 8 दिसंबर 2022 को जब मैं यह लिख रहा हूँ, मैंने ठीक एक दिन पहले ही हठ योग शिक्षक प्रशिक्षण (HYTT) पूरा किया है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक वीडियो देखना इतना बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
कुछ समय के लिए मैंने जीवन के अलग-अलग रास्तों का अनुभव लेने और अपनी दिशा बदलने के लिए नए अवसरों की खोज में अपनी आँखें खुली रखीं। फिर लन्दन में मिट्टी बचाओ अभियान के एक कार्यक्रम के दौरान मैं सद्गुरु से मिला, और मेरे लिए वह एक निर्णायक पल था। मुझे पता था मुझे अपने प्रोफ़ेशनल पायलट के पंख उतारने की ज़रूरत है ताकि जीवन मेरे लिए नया दरवाज़ा खोल सके। मैंने विश्वास की छलांग लगाई और साधनापद और HYTT के लिए अर्ज़ी दे दी। निर्णय सद्गुरु की कृपा पर छोड़ दिया, मुझे पूरा विश्वास था कि मुझे उस दिशा में भेजा जाएगा जहाँ जाने के लिए मैं बना हूँ।
मुझसे अक्सर पूछा जाता था कि क्या मैं एक योग शिक्षक हूँ। मुझे लगता है कि जब लोग यह देखते हैं कि आप दिन में एक से दो घंटे योग अभ्यास में बिताते हैं, तो यह सवाल स्वाभाविक है। सच्चाई यह है कि कुछ साल पहले तक टीचिंग का विचार भी मेरी सोच से परे था। साधनापद में स्वीकृत ना होने के बाद, मुझे इशा हठ योग स्कूल में ले लिया गया। मुझे पता था हठ योग में मेरे लायक़ कुछ है, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि वह क्या है, और मेरा भविष्य कैसा होगा। मैंने सब उनकी कृपा पर छोड़ दिया। जब पहले दिन मैं HYTT कार्यक्रम के लिए पहुँचा और आदियोगी आलयम में गया, मैं अपने घुटनों पर गिर गया और मेरे आँसू बहने लगे। तब मुझे एहसास हुआ कि मेरा यहाँ आना तय था।
HYTT कार्यक्रम रोलरकॉस्टर की सवारी की तरह है – जिसमें आपकी आँखों पर पट्टी बंधी होती है। आपको कुछ सोचने की ज़रूरत नहीं है, चीजें खुदबखुद होती जाती हैं, और आपको आगे बढ़ते हुए जागरूक रहकर बस उन्हें करते रहना होता है। आपकी सारी योजनाएँ धरी की धरी रह जाती हैं। जब भी आप यह सोचते हैं, ‘ओह, कोई बात नहीं, मैं अपने कपड़े थोड़ी देर बाद धो लूँगा’ – उसी दिन कार्यक्रम दो घंटे ज़्यादा चल जाता है, और आपने जो समय काम के लिए सोचा था, वह जा चुका होता है।
शुरुआत में ऐसा लगा कि यह कार्यक्रम बस अभ्यास सीखने के लिए है, लेकिन कुछ समय बाद सदगुरु की यह बात स्पष्ट हो गई कि ईशा में सब कुछ बहुत सावधानी से तैयार की गई अव्यवस्था है। जिस पल आप यह सोचते हैं कि आपने चीज़ों की लय और धारा पकड़ ली है - बूम! सब कुछ पलट जाता है, और आप खुद को एक नई परिस्थिति में पाते हैं। मुझे एहसास हुआ कि यह समय गौर करने और खुद से पूछने का है कि ‘मैं किस चीज़ से परेशान हूँ? मैं इसका अनुभव ऐसे क्यों कर रहा हूँ?’
मुझे बताया गया कि ईशा एक सैंडपेपर की तरह है। आप जहाँ भी हैं, यह आप को ढूँढ लेगा और घिस देगा। मुद्दा बस यह है कि आपको घिसकर चिकना होने में कितना समय लगेगा। बेशक मेरे रास्ते में भी मुझे मेरे हिस्से के कष्ट मिले।
मेरे अनुभव में, HYTT कार्यक्रम एक जीवंत प्रक्रिया है। हर एक को मिलने वाली प्रतिक्रिया और कहाँ तक उनका आध्यात्मिक विकास होता है, यह इस पर निर्भर करता है कि वो प्रक्रिया के लिए कितने खुले हुए और शामिल हैं। सबसे बड़ा ज्ञान जो इस कार्यक्रम ने मुझे दिया है वो ‘अपने आप को किनारे रख देने का है,’ जिसका मतलब है भक्ति की स्थिति में रहना। भक्ति इस कार्यक्रम का एक बहुत बड़ा हिस्सा था। जहाँ शुरुआत में मुझे काफी मुश्किल हुई यह समझने में कि समर्पित कैसे हुआ जाए, धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि समर्पण ऐसा नहीं है जिसे किया जाए, मुझे ही समर्पण बनना होगा।
खुद को किनारे रखने का महान अवसर मुझे मिला, भाव स्पंदन कार्यक्रम में सेवा देने के रूप में, जिसकी तलाश मैं सालों से कर रहा था। मौका बिलकुल सही समय पर आया, जिसने मुझे मेरी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव दिया और कार्यक्रम में पूरी तरह शामिल होने का मौका दिया। कार्यक्रम शुरू होने से पहले, हमें सब कुछ किनारे रखकर प्रतिभागियों के लिए इसे संभव बनाने के लिए कहा गया। मैंने तय कर लिया कि जो भी ज़रूरत है मैं उसके लिए खुद को पूरी तरह समर्पित करूँगा और हर चीज़ के लिए बस ‘हाँ’ कहूंगा।
खुद को इस तरह अलग रखना बहुत प्रभावशाली था, और मैंने बहुत सी गतिविधियाँ कीं क्योंकि मुझे पता था कि कार्यक्रम हम सब पर निर्भर है। सारी प्रक्रिया ने मुझे कार्यक्रम में हर किसी से जुड़ने का एहसास कराया और सबके लिए प्रेम और करुणा का भाव जगाया।
‘गुरु’ शब्द के पीछे के अर्थ की सांस्कृतिक समझ न होना, मेरे जीवन में वरदान साबित हुआ। क्योंकि मैंने जाना कि गुरु को कई तरीकों से महसूस किया जा सकता है। इसी ने मुझे अध्यात्म की और अधिक गहराई में उतारने का काम किया और मैंने कई योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
सबसे पहले मैं सद्गुरु की स्पष्टता और मज़ाक़िया अंदाज़ से काफी प्रभावित हुआ था। मैं हैरान था कि कोई कैसे इस तरह से दुनिया को इतना गहरा ज्ञान दे सकता है।
जैसे-जैसे सद्गुरु के साथ मेरा लगाव बढ़ा, मेरे लिए उनका अनुभव बदलने लगा - एक इंसान से गुरु तक, एक व्यक्तित्व से परम सम्भावना तक। फिर मैंने उन्हें समझने की कोशिश बंद कर दी, क्योंकि मुझे पता है कि मैं गलत निष्कर्ष ही निकालूँगा। मुझे बस इतना पता है कि वो बहुत आगे हैं और मेरे अनुभव की किसी भी चीज़ से ज़्यादा समाहित करने वाले हैं।
तो, मैं एक ईशा हठ योग शिक्षक के रूप में कैसा महसूस करता हूँ? मुझे यह स्पष्ट है कि इस वक्त मैं योग सिखाने के लिए तैयार नहीं हूँ। सद्गुरु ने जो दिया है, वो मुझसे बहुत बड़ा है। मुझे बस इतना पता है, यह खुद को समर्पित करने के बारे में है और योग को मेरे ज़रिए आगे पहुँचाने के बारे में, जिससे दूसरे लोग भी एक गहन अनुभव पा सकें। सबसे बढ़कर, दुनिया को सद्गुरु की योग की देन का हिस्सा बनूँ – इस बारे में है। आइए उनके इस सपने को साकार करें।