सद्‌गुरु एक्सक्लूसिव

स्वप्न यंत्र: सद्‌गुरु ने कब और क्यों स्थापित किया?

सद्‌गुरु स्वप्न, सत्य और स्मृति के बीच के सम्बन्ध को समझाते हुए स्वप्न यंत्र के बारे में बताते हैं जिसका निर्माण उन्होंने ‘अनादि’ के लिए किया था। वह इस बात पर भी प्रकाश डाल रहे हैं कि इस जन्म को आपका अंतिम जन्म होने के लिए कर्म के किस स्तर पर कार्य किया जाना चाहिए।

[1] सद्‌गुरु द्वारा संचालित 90 दिनों का आवासीय कार्यक्रम जो 2010 की गर्मियों में ईशा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनर साइंसेज, टेनेसी, अमेरिका में किया गया था।

प्रश्नकर्ता - नमस्कारम सद्‌गुरु! आपने बताया कि अनादि1 कार्यक्रम के दौरान आपने एक स्वप्न यंत्र का निर्माण किया जो लोगों की स्वप्न प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाता है। क्या ये उनकी आध्यात्मिक तरक़्क़ी के लिए था? क्या इसका मतलब यह है कि आध्यात्मिक साधना नींद में भी संभव है?

सद्‌गुरु: स्वप्न क्या है? आपके मनोवैज्ञानिक ढाँचे के दायरे में जो कुछ भी हो रहा है वह एक स्वप्न है। वह जिसका कोई अस्तित्व नहीं है लेकिन वह आपको सत्य के समान - या फिर सत्य से भी ज्यादा वास्तविक महसूस होता है, वह एक स्वप्न है। प्रत्येक विचार, प्रत्येक भावना, जो आपके मन में पैदा होती है, एक स्वप्न है। उस सन्दर्भ में देखें तो आपके जीवन का सम्पूर्ण अनुभव भी एक तरह का स्वप्न ही है। क्योंकि जब आप किसी की तरफ देखते हैं तो आप उनको उनके वास्तविक स्वरूप में नहीं देखते, बल्कि उनकी छवि जो आपके मन के ढाँचे में बनती है बस वही देखते हैं। आप जो देखते हैं वह मुख्य रूप से एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, इसलिए वह एक स्वप्न है।

प्रत्येक विचार, प्रत्येक भावना, जो आपके मन में पैदा होती है, एक स्वप्न है। उस सन्दर्भ में देखें तो आपके जीवन का सम्पूर्ण अनुभव भी एक तरह का स्वप्न ही है।

स्वप्न कई तरह के होते हैं। यादों को अलग-अलग स्तर पर फिर से जीवंत करने एक तरीक़ा है स्वप्न। जब तक ये स्वप्न चलते रहते हैं, आपका दिन बस एक धोखा है, क्योंकि आपके अनुभव में स्वप्न वास्तविकता है। आप यह समझकर खुद को मूर्ख बना रहे हैं कि सब कुछ नया है, लेकिन दरअसल आपके स्वप्न आपकी पिछली स्मृति पर आधारित होते हैं और आप अपने अतीत को ही बार-बार जी रहे होते हैं।

स्वप्न, स्मृति और सत्य का भ्रम

आपके मनोवैज्ञानिक ढांचे में जो कुछ भी घटित होता है वह एक स्वप्न है। कई लोगों के लिए स्वप्न वास्तविकता से ज़्यादा शक्तिशाली होते हैं, क्योंकि उन्होंने वास्तविकता को कभी छुआ ही नहीं है। वे जिसे 'जीवन' कहते हैं, वह बस उनकी भावनाएं और विचार ही हैं। आप जो सोच रहे हैं, जो महसूस कर रहे हैं, वह आपके लिए सम्पूर्ण ब्रह्मांड की घटनाओं से भी ज़्यादा दिलचस्प और महत्वपूर्ण हो गया है। अगर इतनी विस्तृत और समझ में आ पाने से भी अधिक विशाल चीज़ आपको जगा नहीं सकती, बल्कि आपका गढ़ा हुआ एक विचार आपको नीचे खींच सकता है, तो यह स्वप्न नहीं तो क्या है? और इससे बुरा और क्या हो सकता है कि यह स्वप्न आपका है भी नहीं।  

सामाजिक अनुभवों और आनुवंशिक तत्वों के जो असर आपने इकट्ठा कर रखे हैं, उन्हीं पर आधारित होती हैं - ये बाध्यकारी घटनाएं। जब मैं आनुवंशिक कहता हूँ तो ये केवल आपके वंश तक ही सीमित नहीं है। आपकी आनुवंशिकता केवल आपके पुरखों तक ही नहीं जाती, ये उसके भी पहले पशु प्रकृति तक जाती है। आज हमारे पास इसके वैज्ञानिक प्रमाण हैं, लेकिन हमें पहले से पता है कि एक-कोशिकीय जीव कई जटिल तरीकों से विकसित हुआ और उसके फलस्वरूप आज हम यहाँ मानव-रूप में बैठे हैं।

मानव स्मृति का विकासशील इतिहास

उस जीवन प्रक्रिया की, और एक-कोशिकीय जीव से मानव के इस जटिल तंत्र तक के विकास की स्मृति हमारे शरीर में आज भी मौजूद है। आप पशु-प्रकृति के सबसे ऊँचे शिखर पर बैठे हैं, जिसका मतलब है कि आप इन सबकी एक मिश्रित अभिव्यक्ति हैं। अगर आप एक कृमि को देखें तो वह केवल एक कृमि भर है, एक कीड़ा बस एक कीड़ा ही है, एक पक्षी केवल एक पक्षी है, एक पशु केवल एक पशु है, कुत्ता केवल एक कुत्ता है, हाथी केवल एक हाथी है। लेकिन वह जीव जिसे मनुष्य कहा जाता है उसमें इन सबके गुण हैं।

उस जीवन प्रक्रिया की, और एक-कोशिकीय जीव से मानव के इस जटिल तंत्र तक के विकास की स्मृति हमारे शरीर में आज भी मौजूद है। 

किसी दिन आप एक चींटी की तरह काटते हैं-बस थोड़ा सा। किसी दूसरे दिन आप एक कुत्ते की तरह गुर्राते हैं, अगले दिन आप एक हाथी की तरह लोगों को डराते हैं, किसी दिन आप एक चिड़िया की तरह चहकते हैं। तो आपमें ये सब करने की क्षमता है, मनुष्य ये सब करने के काबिल है। जागरूकता के अलग-अलग स्तरों पर वे अलग-अलग रूप में सामने आते हैं। यह सारी याद्दाश्त आपके सिस्टम में मौजूद है, बेशक इसमें ये सारी यादें जीवंत नहीं हैं।

भूत-शुद्धि आध्यात्मिक संभावनाओं को बढ़ाती है

आपका शरीर अपने भीतर आपके माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और पर-दादाओं को याद रखता है चाहे आपने उन्हें कभी देखा नहीं हो, चाहे आप उन्हें जानते भी नहीं हों। यह स्मृति आपकी समझ के स्तर से कहीं आगे है। यह मानव शरीर और पशु प्रकृति के भी आगे, मूल तत्वों तक जाती है। इसी कारण योग में सबसे बुनियादी साधना भूत-शुद्धि है। आप अपने अंदर, अपने पिता, माता, दादा-दादी, नाना-नानी, पुरखे, चिम्पांज़ी और उस एक-कोशिकीय जीव की स्मृतियों से पाँच तत्वों को शुद्ध करते हैं। अगर आप इस स्मृति को मिटा दें तो आप बस किसी के कुछ बनकर नहीं रह जाते, बल्कि एक अलग संभावना बन जाते हैं।

आध्यात्मिक प्रक्रिया इस स्मृति को मिटाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को इससे कुछ दूर ले जाने के लिए होती है।

आप जितना सोचते हैं, स्मृति उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। जिस प्रकार आपका दिल धड़कता है, आपके सिस्टम में शरीर में कुछ है जिसे याद है कि धड़कना कैसे है। जटिल रासायनिक प्रक्रियाएं इसलिए हो रही है, क्योंकि कुछ है जिसे पता है इन्हें किस तरह करना है। यह लाखों सालों के विकास से सीखा जा रहा है। जीवन ने खुद को चलाना सीखा और इसे अभी भी चला रहा है। अगर ये भूल जाता तो आप अभी मृत पड़े होते। आध्यात्मिक प्रक्रिया इस स्मृति को मिटाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को इससे कुछ दूर ले जाने के लिए होती है। जिससे स्मृति आपके लिए एक धरोहर बन सके, न कि एक बंधन। वह पहलू जो आपको आगे ले जाए, न कि आपको बाँधकर पीछे खींच दें।

स्वप्न यंत्र ने क्या किया?

अनादि में हमने एक स्वप्न यंत्र का निर्माण किया जिसकी उपस्थिति में आपको सोना होता था। स्वप्न यंत्र एक ऐसा उपकरण था जो स्वप्न के उस भाग को जल्दी-जल्दी आगे बढ़ाता था जिसे हम ‘लिंग शरीर’ कहते हैं। इस आनुवंशिक शरीर की अपनी ही एक स्मृति होती है और यह स्मृति लगातार चलती रहती है। अनादि में लिंग शरीर को समेटकर बहुत छोटा करने का प्रयास किया गया था। जब यह सिकुड़ता है तो बहुत गाढ़ा हो जाता है। और यह लोगों के लिए एक बहुत ही जबरदस्त अनुभव हो सकता है।

कई लोग इस प्रकार की परिस्थितियों को सहन नहीं कर सकते और उन्हें सुरक्षित माहौल की ज़रूरत हो सकती है। इसके बावज़ूद ये बहुत भाव-विह्वल करने वाला हो सकता है क्योंकि स्वप्न बहुत तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ते हैं। हमने स्वप्न को 100 गुना तेज़ी से आगे बढ़ाया। वे उसमे बहुत तेज़ी से चल रहे थे। इसका उद्देश्य लिंग-शरीर(सूक्ष्म शरीर) या स्मृति को कम कर देना था, ताकि इसके सिकुड़ने से आप ज्यादा भाव-विह्वल न हो जाएँ। इसे हासिल करने के लिए मैंने स्वप्न यंत्र का निर्माण किया जिससे कि स्वप्न की रफ़्तार तेज़ की जा सके।

दिन भर वे अपनी साधना के साथ-साथ बाकी काम जैसे कि खाना बनाना, साफ़-सफाई करना करते थे और रात में आराम से सोते थे। लेकिन वे सुबह थके हुए उठते थे क्योंकि स्वप्न इतनी तेज़ी से आगे बढ़ते थे कि उनका आराम करने का समय ही सबसे ज्यादा थकावट पैदा करता था। वे इतने अधिक स्वप्न देखते थे। ये प्रक्रिया उनके लिंग-शरीर (सूक्ष्म शरीर) को कम करने के लिए थी। अगर इसे सिकोड़ा नहीं जाता तो यह बहुत ही कठिन और भाव-विह्वल कर देने वाला होता।

कर्म के विभिन्न स्तर

यह सब 'लिंग संचालन' नामक साधना की तैयारी के लिए था, जिसका उद्देश्य आपके अंदर के लिंग को सक्रिय करना था। हमने इस स्वप्न यंत्र का निर्माण लिंग शरीर को छोटा करके उसके विस्तार को कम करने के लिए किया था। यह इस प्रकार कार्य करता है कि केवल 'संचित कर्म' पर इसका प्रभाव पड़ता है। यह केवल उन लोगों के लिए है जो यह चाहते हैं कि यह उनका अंतिम जन्म हो। अगर आपको किसी तरह के खाने, सुख या फिर 22 वीं शताब्दी में बनने वाले सिनेमा को देखने की लालसा है तो आपको इसके लिए नहीं जाना चाहिए। एक बार संचित कर्म ख़त्म हो जाए फिर यह जीवन चाहते हुए भी एक और शरीर लेने के काबिल नहीं रहेगा।

रवैया बदल जाना, अधिक विनम्र हो जाना, प्रेममय और करुणामय बन जाना, ये सब आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं हैं, ये एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रक्रिया हैं।

इस जन्म का प्रारब्ध कर्म स्वप्न यंत्र द्वारा अनछुआ रहता है। इसकी वजह से आपको उस व्यक्ति में कोई अचानक परिवर्तन नहीं दिखता है। रवैया बदल जाना, अधिक विनम्र हो जाना, प्रेममय और करुणामय बन जाना, ये सब आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं हैं, ये एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रक्रिया हैं। दुर्भाग्य से इसे ही दुनिया में अध्यात्म के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

आध्यात्मिक प्रक्रिया का मतलब है अपनी भौतिक प्रकृति को इस तरह नष्ट करना जिससे यह कोई बीमारी या मृत्यु की तरफ न ले जाए। स्वप्न यंत्र का यही उद्देश्य है। यह उस पदार्थ को ले लेता है जो दूसरे शरीर और दूसरे गर्भ को पाने के लिए जरूरी है, लेकिन आपके वर्तमान शरीर पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अगर आप प्रारब्ध कर्म को छूते हैं तो आपका वर्तमान शरीर विघटन की ओर जाने लगेगा। इसलिए हम प्रारब्ध कर्म को नहीं छूते हैं। हम केवल संचित कर्म ले लेते हैं जिसका मतलब है कि आपका दोबारा जन्म नहीं होगा।