सराहा है सदा हमने 

युद्ध, विजय और उसकी महिमा को।

पर नहीं था, एक भी युद्ध महान, 

युद्ध हो सकते हैं केवल रक्तरंजित।  

जब नकारते हैं हम अपनी मानवता 

केवल तभी युद्ध बन जाते हैं महान।  

जरुरी है, आने वाले बच्चों को मिले 

एक अलग संस्कार।