चर्चा में

विश्व भर के महत्वपूर्ण वैज्ञानिकों ने ईशा योग सेंटर में आयोजित S-20 (साइंस–20) बैठक के अपने अनुभवों को साझा किया

अलग-अलग देशों से कुछ महान वैज्ञानिक 21-22 जुलाई 2023 को G-20 के S-20(साइंस-20) बैठक में शामिल होने के लिए ईशा योग केंद्र, कोयंबटूर में इकट्ठा हुए। S-20 बैठक का उद्देश्य था – दुनिया के नीति निर्माताओं को ऐसी सिफ़ारिशें देना जो दुनिया भर के विशेषज्ञों द्वारा बनाई गई हों व विज्ञान आधारित हों, तथा जिसमें सबकी सहमति हो। 

यहां तीन महत्वपूर्ण प्रतिनिधि इस आयोजन के बारे में और इस स्थान विशेष के बारे में अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
प्रोफेसर गेराल्ड हॉग, जर्मन भूवैज्ञानिक और जलवायु विज्ञानी, ईटीएच ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड में प्रोफेसर, मेन्ज़ में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिस्ट्री में जलवायु भू-रसायन विज्ञान विभाग के निदेशक और वैज्ञानिक सदस्य, और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी लियोपोल्डिना के अध्यक्ष हैं।

प्रश्नकर्ता: पिछले कुछ दिनों में आप यहाँ शिखर सम्मेलन के दौरान कई बैठकों में शामिल हुए। आपको यहाँ सबसे अधिक किस चीज़ ने प्रभावित किया है?

प्रोफेसर गेराल्ड हॉग: सबसे अधिक प्रभावित करने वाली चीज रही – यहाँ मिलने वाला आतिथ्य, हमारा स्वागत-सत्कार। वैज्ञानिक अक्सर एक सहमति पर पहुंचने के लिए असहमत होते हैं। मुझे लगता है कि हमने यहाँ इसे हासिल कर लिया है। हमारे पास तीन मुद्दे थे। उनमें से एक था - ऊर्जा। मैं एक जलवायु वैज्ञानिक हूँ - जलवायु और ऊर्जा सीधे तौर पर जुड़ी हुई समस्याएं हैं। हमने समाज और संस्कृति के लिए सार्वभौमिक समग्र स्वास्थ्य (यूनिवर्सल होलिस्टिक हेल्थ) और विज्ञान के बारे में बात की, जो बहुत महत्वपूर्ण थी।

प्रश्नकर्ता: ईशा योग केंद्र में रहने का आपका अनुभव कैसा रहा?

प्रोफेसर गेराल्ड हॉग: मुझे लगता है कि इससे पहले मैं कभी किसी ऐसी जगह पर नहीं गया हूँ। मैं आध्यात्मिक होने के बजाय एक  रुखा सा इंसान हूँ। लेकिन यहाँ मैंने बहुत सारे मुस्कुराते हुए युवा चेहरे देखे। यहाँ का स्वागत-सत्कार अद्भुत है। कल सद्‌गुरु के द्वारा दिए गए एक बहुत बढ़िया प्रेजेंटेशन में हम शामिल हुए, जहाँ मैं उनसे जलवायु परिवर्तन के बारे में एक सवाल पूछ सका और उन्होंने बहुत अच्छी तरह से उसका उत्तर दिया। जाहिर तौर पर एक जलवायु वैज्ञानिक होने के नाते मैं उनके प्रभाव की और पर्यावरण के प्रति यहाँ के लोगों के रवैये की बहुत सराहना करता हूँ। मिट्टी को बचाने के लिए उनकी पहल कुछ ऐसी है जिसे हर किसी को सहयोग देना चाहिए। ईशा योग केंद्र में बिताए गए दो दिन मेरे लिए बहुत उम्दा रहे।

डॉ मुनीर एम एल्डेसौकी, किंग अब्दुल अज़ीज़ सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष और रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन अथॉरिटी, सऊदी अरब की स्थापना टीम के प्रमुख

डॉ मुनीर एम एल्डेसौकी: G-20 में भाग लेने मैं दूसरी बार भारत आया हूँ। मैं भारत द्वारा G-20 की अध्यक्षता के लिए सऊदी अरब की तरफ से शुक्रिया कहना चाहता हूँ। पिछली बार जब मैं आया था तब का मेरा अनुभव अद्भुत था लेकिन इस बार का अनुभव उससे भी बढ़कर निकला। जब हम कोयंबटूर हवाई अड्डे पर उतरे तो जिस तरह से हमारा स्वागत सत्कार किया गया वह एक अनोखा अनुभव था। फिर इस जगह रहने का अनुभव निश्चित तौर पर अद्वितीय था – ख़ासकर दूसरे सभी प्रतिनिधियों के साथ एक जगह पर रुकना - यह हमारे लिए सभी के साथ जुड़ने का एक बहुत बड़ा अवसर था।

बेशक यह बैठक अपने आप में ही बहुत महत्वपूर्ण है। हम S-20 में विज्ञान के प्रमुख मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जिनमें पर्यावरण से लेकर स्वास्थ्य और समाज के लिए विज्ञान तक शामिल है। निसंदेह हम जिस वातावरण में हैं उसमें एक बड़ी अनोखी सकारात्मक ऊर्जा है। तो इस मेहमाननवाज़ी के लिए एक बार फिर से शुक्रिया। इसका हिस्सा बनना हमारे लिए बहुत खुशी की बात थी और हम उम्मीद करते हैं कि भारत की G-20 की अध्यक्षता एक बड़ी सफलता बनेगी।

प्रश्नकर्ता: सत्रों के दौरान विज्ञान और अध्यात्म का भी मुद्दा आया था। क्या आपको लगता है कि मानवता की वर्तमान चुनौतियों का समाधान खोजने में इस चर्चा से प्रतिभागियों के नज़रिए पर प्रभाव पड़ा होगा?

डॉ मुनीर एम एल्डेसौकी: भारतीय अध्यक्षता की थीम ‘एक परिवार’ है। तो ऐसी जगह पर एक साथ आकर चुनौतियों से निपटने के तरीके सोचना - मुझे लगता है कुछ लोगों के लिए आंखें खोल देने वाला रहा होगा। निःसंदेह कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस तरह के विषयों को छद्म-विज्ञान के रूप में देखते हैं, लेकिन जिस तरह से ये सारी प्रस्तुतियां और विषय लाए गए – एक बहुत अच्छा मिश्रण बनकर सामने आया। आप लोगों को बाहर जश्न मनाते सुन सकते हैं। यह एक बहुत सकारात्मक ऊर्जा है। एक बार फिर इस सफल आयोजन के लिए बधाई और मुझे विश्वास है कि आपके पास आगे और भी बहुत कुछ होने वाला है।

संजीव सान्याल - एक भारतीय अर्थशास्त्री लोकप्रिय इतिहासकार और भारत के प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य

संजीव सान्याल: यहाँ ईशा आश्रम में S-20 सम्मेलन में भाग लेना एक बहुत ही शानदार अनुभव रहा। इसमें कोई शक नहीं कि यह एक खूबसूरत जगह है, लेकिन साथ ही हमें जो गर्मजोशी से भरा आतिथ्य मिला - वह भी अद्भुत था। वैसे मैं पहले भी कई बार यहाँ आ चुका हूँ और मुझे यहाँ आना हमेशा अच्छा लगता है।

प्रश्नकर्ता: हम विज्ञान और अध्यात्म का अनोखा संगम देख रहे हैं। दुनिया जिस तरह से खुशहाली की ओर बढ़ रही है क्या आप उस तरीके में कोई महत्वपूर्ण बदलाव देख रहे हैं?

संजीव सान्याल: मुझे लगता है कि इन दिनों इस बात को स्वीकार किया जा रहा है कि पुराने तरीके के रूखे विज्ञान की अपनी सीमाएं हैं। और निश्चित रूप से केवल विज्ञान के बारे में ही नहीं बल्कि जीवन के बारे में सोचने के लिए हमें चीजों की व्यापक समझ की ज़रूरत है। इसलिए ईशा आश्रम S-20 बैठक आयोजित करने के लिए एक दिलचस्प जगह है जहाँ बेहतर समग्र दृष्टिकोण (होलिस्टिक व्यू) अपनाया जा सकता है।

प्रश्नकर्ता: आप उभरती हुई टेक्नोलॉजी और संसाधनों से भारत की भावी अर्थव्यवस्था को किस तरह प्रभावित होते हुए देखते हैं?

संजीव सान्याल: भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। कुछ वर्षों में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी और स्वाभाविक रूप से हमें बहुत सारी उभरती टेक्नोलॉजी में सबसे आगे रहना होगा - चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो या अनुवांशिकी या कोई और क्षेत्र। निसंदेह भविष्य में आने वाली नौकरियों, निर्यात और कई सारी चीजों पर इन सब का बहुत प्रभाव पड़ेगा। इसलिए साफ है कि यह ऐसी चीज है जिस पर हमें बहुत अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। हमें उद्यमियों, वैज्ञानिकों और विचारकों की ऐसी अगली पीढ़ी चाहिए जो इन सब में आगे हो।