बर्बादी या बदलाव?
मैंने महामारी की कल्पना नहीं की थी, लेकिन मुझे पता था कि लोगों के जीवन में कुछ तो उथल-पुथल होगी। यह सौर-अग्नि में तेज़ी, जो ढाई साल पहले शुरू हुई, इसमें और तेजी आई है, और आने वाले कुछ सालों में यह और भी बढ़ सकती
है। इस वक़्त यह मानव-जाति के हाथ में है कि वो खुद पर आपदा लाए या अनुभूति और बदलाव। ऐसी स्थिति में ‘जागरूक धरती’ अभियान बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस वक़्त यह मानव-जाति के हाथ में है कि वो खुद पर आपदा लाए या अनुभूति और बदलाव।
भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में यह कहा गया है, जब सौर गतिविधि इस तरह बढ़ती है, तो मृत्यु, बीमारियाँ, युद्ध, और दिमागी असंतुलन बढ़ सकता है। इंसानी जीवन और धरती के सभी जीवों के जीवन में काफी उथल-पुथल हो सकती है। तो क्या सौर-अग्नि की तेज़ी हमें हानि पहुंचा रही है? नहीं। यह कुछ ऐसा है, जैसे मान लीजिए आप एक हवाई जहाज उड़ाना चाहते हैं। अगर आप तेज़ हवा के अंदर जाएंगे, तो कम मेहनत और कम ईंधन से आप ऊपर उठेंगे। (जब आप हवा के विपरीत दिशा में उड़ान भरते हैं तो हवा तेज़ी से पंखों के नीचे आती है जिससे जहाज़ जल्दी और आसानी से उड़ान भरता है।) लेकिन अगर आप हवा की दिशा में चलने की कोशिश करेंगे, तो आपका हवाई जहाज़ क्रैश हो सकता है। इसलिए जो इस्तेमाल करना जानता है, उसके लिए तेज़ हवा वरदान है, और जो नहीं जानता, उसके लिए अभिशाप। यह बात सौर-अग्नि के साथ-साथ ब्रह्मांड की सभी तरह की शक्तियों के लिए सही है।
सौर-अग्नि आपकी हृदय-गति को बदल सकती है। भू-चुंबकीय क्षेत्र में जो बदलाव होगा वो या तो आपकी ऊर्जा को बढ़ा सकता है या भ्रमित कर सकता है। अगर आप जागरूक हैं, तो यह बेहतरीन समय है। गर्मियों में जब सूरज तपता है, पौधे खिल उठते हैं। उन्हें पता है सूर्य की ऊर्जा का इस्तेमाल कैसे करना है। एक आध्यात्मिक साधक के लिए जो अपनी ऊर्जा को रूपांतरित करना चाहता है, यह सही समय है, जब सब कुछ अच्छी तरह से पक रहा है। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि मैं प्राण-प्रतिष्ठा की सभी योजनाएँ अगले साढ़े तीन सालों में पूरी कर लूँ, क्योंकि सूर्य मेरे साथ है।
आपके जीवन का परम उद्देश्य क्या है?
क्या आप बस अपना स्वास्थ्य, संपत्ति, शक्ति, शांति, कामुकता बढ़ाना चाहते हैं, या आप सत्य को जानना चाहते हैं? क्या आप जीवन और मृत्यु के हर पहलू से आनंदपूर्वक गुज़र पाने की क्षमता हासिल करना चाहते हैं? अगर आप ध्यानमय होना चाहते हैं, तो कुछ दूसरी चीज़ों को व्यवस्थित करने की ज़रूरत है। लोगों के स्वाभाविक रूप से ध्यानमय नहीं हो पाने की वजह सिर्फ़ ये है कि वे शांत नहीं हैं। वो हर समय किसी न किसी चिंता में हैं। यह ज़िंदा रहने की चाहत की प्रवृत्ति है।जब तक ज़िंदा बने रहने की यह प्रवृति रहेगी, आप एक प्रकार के तनाव और चिंता में रहेंगे। हो सकता है आप पूरी तरह पागल न हों, लेकिन आप आराम की स्थिति में नहीं हैं।
मैं चाहता हूँ कि आप यह समझें कि कि इस धरती पर आने वाले कुछ साल बहुत महत्वपूर्ण हैं।
संभवत: 2025 के मध्य तक, यह सौर-गतिविधि अपने चरम पर होगी। उस समय हम दुनिया में जागरूकता लाएंगे या विपदा? क्या सारे देश एक दूसरे पर गोलीबारी शुरू कर देंगे? मैं कुछ बहुत ही खूबसूरत और सकारात्मक होते देखना चाहता हूँ। लेकिन मैं एक अकेला आदमी हूँ। पुराने समय में कुछ योगियों को सहस्रंगा कहा जाता था, जिसका मतलब है हज़ार बाज़ुओं वाला योगी। किसी ने कहा मेरे पास ‘सेना’ है। सेना को आदेश चाहिए। मैं आपसे ‘यस सर’ नहीं सुनना चाहता, लेकिन मैं चाहता हूँ कि आप यह समझें कि इस धरती पर आने वाले कुछ साल बहुत महत्वपूर्ण हैं।
क्या हम इस चार्ज का इस्तेमाल रूपांतरण के लिए, आत्मज्ञान के लिए करना चाहते हैं, या हम एक दूसरे को मारने वाले हैं, क्योंकि हमारे शरीर में कुछ उत्तेजना महसूस हो रही है? अगर हमारे अंदर संतुलन नहीं होगा, तो हम एक दूसरे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही हमारी हालत है। योगिक पंचांग में सौर-अग्नि में इस तरह की तेज़ी का पहले भी उल्लेख किया गया है। जब भी सौर-अग्नि एक ख़ास स्तर तक बढ़ी है, इस संस्कृति में महान योगी बढ़े हैं। उसी समय, युद्ध, विनाशकारी घटनाएं, कई बार भूस्खलन भी हुए हैं क्योंकि धरती के आतंरिक चुम्बकीय क्षेत्र और ऊष्णीय ऊर्जाएं, सौर-अग्नि से प्रभावित होती हैं।
परिस्थिति का हमारे अनुकूल बदलाव
अगर आपने पूरे वेग में फटते हुए ज्वालामुखी की तस्वीर देखी है, तो आपने पाया होगा कि वह कितना खूबसूरत दृश्य होता है! आप उसे देखने से चूकना नहीं चाहेंगे। हाँ, अगर आप ज्वालामुखी के पास हैं, और आप पिघले हुए लावा का हिस्सा बनने वाले हैं, तब यह अच्छी स्थिति नहीं है। दुनिया की हर शक्ति ऐसी ही है। इसलिए, जब ऐसा कुछ हो रहा है, तब इंसान में यह बुद्धिमत्ता होनी चाहिए कि वह ख़ुद को सही जगह पर ले जा सके, ताकि जो अधिक ऊर्जा इस धरती पर आ रही है, उसका इस्तेमाल वह अपने हित में कर सके।
इसलिए आपके जीवन के हर पहलू को छूना बहुत ज़रूरी हो गया है। नहीं तो दुख, मृत्यु, और बहुत सी विपदाएं आएंगी। लेकिन आज की इस आधुनिक तकनीक और संचार के इस्तेमाल की मदद से पूरी दुनिया को बदलना असंभव भी नहीं है। आधुनिक तकनीक और सौर-अग्नि – इन दोनों का इस्तेमाल करके, हम अगले साढ़े तीन सालों को मानव-जाति के लिए बहुत अच्छा समय बना सकते हैं। जो इसका इस्तेमाल करेंगे वो ऊपर उठेंगे। जो इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, हमें नहीं पता उनके लिए यह कैसा होगा।
आधुनिक तकनीक और सौर-अग्नि
– इन दोनों का इस्तेमाल करके, हम अगले साढ़े तीन सालों को मानव-
जाति के लिए बहुत अच्छा समय बना सकते हैं।
यह कोई भूकंप या बाढ़ जैसी तबाही मचाने वाली आपदा नहीं है। बल्कि वे सभी ऊर्जाएं जो इस धरती पर सक्रिय हैं, थोड़ी अधिक उत्तेजित हो जाएँगी - भू चुंबकीय ऊर्जा, परमाणु विकिरण, धरती की चुंबकीय पूँछ, और चन्द्रमा और धरती का संबंध, और चंद्रमा से सौर-अग्नि का परावर्तन।
जब थोड़ी अधिक उत्तेजना होती है, तब आप वो चीज़ें कर सकते हैं, जिसके लिए आपको ज़्यादा शक्ति चाहिए होती है। इस समय धरती पर थोड़ी अधिक उत्तेजना है, और यह अगले तीन साल में बढ़ने वाली है। जब ऐसा होगा, तब या तो हम अपनी हड्डियां तोड़ लेंगे या ऊपर उठ जाएँगे। यह मेरी कामना है कि हर कोई ऊपर उठे। हम जो भी कर सकते हैं, हमें मानव-जाति को ऊपर उठाने के लिए करना होगा, क्योंकि यह ऐसी ऊर्जा है जिसे खुद पैदा करना बहुत मुश्किल है, और पूरी धरती इससे प्रभावित हो रही है।
खुद को मुक्त करना
ज़्यादातर लोगों की समस्या यह है कि वो चीज़ों पर ग़ौर नहीं करते हैं। अगर आप सही मायने में जागरूक हैं, तब आप अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल कई तरीकों से कर सकते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की समस्या यह है कि उनकी याद्दाश्त और उनकी कल्पना आपस में घुलमिल गए हैं। उन्हें नहीं पता वो कब अतीत को याद कर रहे हैं, कब वो वर्तमान का अनुभव कर रहे हैं, और कब वो भविष्य की कल्पना कर रहे हैं। अतीत को बस याद किया जा सकता है। वर्तमान का सिर्फ अनुभव किया जा सकता है। भविष्य को गढ़ना होगा।
इस समय लोग अपने गुज़रे वक़्त से पीड़ित हैं और वर्तमान को पूरी तरह अनदेखा कर रहे हैं, उससे चूक जा रहे हैं। अगर आप एक सक्रिय, गतिशील और विकासशील जीवन चाहते हैं, तो आपको इसे गढ़ना होगा। इसे गढ़ने के लिए आपको यह समझना होगा कि अतीत को बस याद किया जा सकता है - इसे जिया नहीं जा सकता। वर्तमान का अनुभव किया जा सकता है - आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते। और आप तभी भविष्य को गढ़ पाएँगे।
अगर आप एक सक्रिय, गतिशील और विकासशील जीवन चाहते हैं, तो आपको इसे गढ़ना होगा।
अगर आप अपने भविष्य को गढ़ना चाहते हैं, तो एक महत्वपूर्ण पहलू है - पहुँच हासिल करना। यह सामाजिक पहुँच हो सकती है, यह आर्थिक पहुँच हो सकती है, यह राजनितिक पहुँच हो सकती है, या ऊर्जा तक की पहुँच हो सकती है। आपको पहुँच चाहिए। पहुँच के बिना यह कुछ ऐसा ही होगा जैसे आपके पास कार हो लेकिन ईंधन नहीं। आपके अंदर दो मौलिक ऊर्जाएं हैं जो आपके भीतर लगातार काम कर रही हैं। एक है खुद को बचाए रखने की प्रवृत्ति, जो आपकी भौतिक सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है। दूसरी है अपने विस्तार की चाहत। विस्तार की चाहत आमतौर पर दब जाती है, क्योंकि खुद को बचाने की चाहत अधिक महत्व हासिल कर लेती है।
चूँकि आपको जीवन में कुछ दर्दनाक अनुभव हुए हैं, इसलिए आपकी खुद को बचाने की प्रवृत्ति, विस्तार की चाहत से बड़ी हो गई। यह सिर्फ अध्यात्म से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि आपके जीवन के हर पहलू से जुड़ा है। आप हैरान होते हैं कि यह क्यों काम नहीं कर रहा? सिर्फ़ इसलिए क्योंकि आपकी खुद को बचाए रखने की चाहत विस्तार की चाहत से ज़्यादा प्रबल हो चुकी है। इस वजह से कुछ नया नहीं होगा। आप कुछ भी पाना चाह सकते हैं, लेकिन यह पूरा नहीं होगा, क्योंकि आपने दीवार खड़ी कर दी है, और फिर आप बाहर जाने की कोशिश कर रहे हैं। यह ऐसे काम नहीं करेगा। जब आप खुद को बचाए रखने की प्रवृत्ति को पार कर लेंगे, तब आपके शरीर का हर कण आराम की स्थिति में आ जाएगा।