संस्कृति और ज्ञान

राम क्यों हर युग में प्रासंगिक हैं?

जब अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा दूर-दूर तक भक्तों के हृदयों को प्रज्वलित कर रही है, ऐसे में सद्‌गुरु राम के उल्लेखनीय जीवन पर प्रकाश डालते हैं। निरंतर आती विपरीत परिस्थितियों और द्वंद्व के बीच राम का सर्वोत्कृष्ट समभाव और बुद्धिमत्ता आज भी सबको प्रेरित करती है। यह कहानी हमें अपनी दुनिया को स्पष्ट दृष्टि से देखने और ऐसे विकल्प चुनने के लिए आमंत्रित करती है जो हमारे साझा अस्तित्व के लिए मददगार होगी।

सद्‌गुरु: मर्यादा पुरुषोत्तम राम कई मायनों में आज भारत के सबसे लोकप्रिय व्यक्ति हैं। जब इतने सारे ऋषि-मुनि, योगी यहाँ हुए हैं तो उन पर ही इतना फोकस क्यों? कई लोग हुए जो राम से कम या अधिक विरक्त भाव से जिए, लेकिन उनका जीवन पूरी तरह से सुलझा हुआ रहा। लेकिन राम के जीवन में निरंतर आपदा आती रही, जिसमें हर तरह की परेशानियाँ शामिल थीं। इसीलिए लोग उन्हें ‘मर्यादापुरुषोत्तम’ अर्थात एक श्रेष्ठ इंसान कहते हैं। यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि यह स्वर्ग से उतरने वाले देवताओं के बारे में नहीं है। यह एक ऐसी सभ्यता रही है जहाँ मानव स्वयं ऊपर उठकर दिव्य बन सकता है।

जब वे 19 वर्ष के थे, तब उनका राजा के रूप में राज्याभिषेक किया गया। लगभग एक वर्ष के भीतर उनसे राज्य छीन लिया गया और उन्हें अपनी पत्नी के साथ जंगल भेज दिया गया। यह देखते हुए कि यह उनके लिए बहुत कठिन समय होने वाला है, उनके भाई ने स्वेच्छा से उनके साथ आना चाहा। मानो जंगल काफी नहीं था, उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया गया। एक राजा होने के नाते वे दूसरी पत्नी ला सकते थे, लेकिन वे उस तरह के नहीं थे। वे अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते थे, इतना प्यार कि उन्होंने उनके लिए 3000 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की।

यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि यह स्वर्ग से उतरने वाले देवताओं के बारे में नहीं है। यह एक ऐसी सभ्यता रही है जहाँ मानव स्वयं ऊपर उठकर दिव्य बन सकता है।

उस समय गूगल मैप नहीं था - आपको नहीं पता था कि श्रीलंका कहाँ है। उन्हें बस दक्षिण की ओर चलना था और लोगों से पूछते जाना था कि श्रीलंका कहाँ है। उसके बाद उन्होंने देखा कि युद्ध लड़ने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। उनके पास कोई सेना नहीं थी, केवल एक भाई था। उन्होंने दक्षिण में एक सेना बनाई, युद्ध छेड़ दिया, एक सुंदर शहर को जला दिया, उस आदमी को मार डाला, और फिर अपनी पत्नी को वापस ले आए। सीता गर्भवती हो गईं। एक राजा के लिए उनकी पत्नी का गर्भवती होना बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह केवल उनके पिता बनने की भावना की वजह को लेकर नहीं है, यह राष्ट्र के लिए उत्तराधिकारी देने को लेकर है।

फिर भी कुछ सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी पत्नी को एक बार फिर जंगल में भेजना पड़ा, जहाँ उन्होंने जुड़वाँ बालकों को जन्म दिया। अनजाने में वे अपने ही बेटों के साथ युद्ध की परिस्थिति में फंस गए। यह न जानते हुए कि वे दो बालक उनके अपने हैं, उन्होंने लगभग उन्हें मार ही डाला था। अपने सांसारिक जीवन में जानबूझकर या अनजाने में अपने ही बच्चे को मारना सबसे भयानक काम है। राम को अपनी पत्नी से दोबारा कभी मिलने का मौका नहीं मिला। जंगल में ही उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई।

यदि इनमें से कोई भी स्थिति किसी के जीवन में घटित हो तो अधिकांश मनुष्य टूट जाएंगे। लेकिन निरंतर आती इन आपदाओं के बावजूद राम कभी निराशा, क्रोध, चिंता या घृणा से नहीं भरे। वे हमेशा समदर्शी बने रहें। राम को जो भी व्यक्तिगत कष्ट सहने पड़े, लेकिन उन्होंने वही किया जो संसार में उस समय करना उचित था - न कुछ ज्यादा, न कुछ कम।

अपनी पत्नी का अपहरण करने वाले उस शत्रु को मारने के बाद उन्होंने हिमालय में एक वर्ष तक पश्चाताप किया। उनके भाई गुस्से में थे, ‘क्या! आप उस आदमी को मारकर प्रायश्चित करने जा रहे हैं?’ राम ने कहा, ‘उसमें बहुत से दुर्गुण थे, लेकिन वह मेरी तरह ही एक महान शिव भक्त था।’ राम ने रामेश्वरम लिंग की (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक जो भारत के तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच एक द्वीप पर स्थित है) स्थापना की थी। राम ने आगे कहा, ‘केवल इतना ही नहीं - वह एक बहुत ही ज्ञानी व्यक्ति, एक महान विद्वान और एक महान प्रशासक था। उसने उस समय के सबसे महान शहरों में से एक का निर्माण करवाया था।’

निरंतर आती इन आपदाओं के बावजूद राम कभी निराशा, क्रोध, चिंता या घृणा से नहीं भरे। वे हमेशा समदर्शी बने रहें।

इसलिए जब रावण गंभीर रूप से घायल था, तो राम ने अपने भाई लक्ष्मण को भेजा और कहा कि जाकर उससे शहर निर्माण कला और प्रशासन के कौशल के बारे में सीखे क्योंकि वे अयोध्या का पुनर्निर्माण करना चाहते थे। ये एक 6000-7000 साल पुराना सपना है - जो आज बनने जा रहा है। जब राम ने लक्ष्मण से कहा कि जाओ और रावण से सीखकर आओ कि इस तरह का शहर कैसे बनाया जाए और उसका प्रबंधन कैसे किया जाए, तो लक्ष्मण ने कहा, ‘क्या! हम इस दुष्ट से कुछ सीखना चाहते हैं?’

कौन अच्छा है या कौन बुरा, इसके बारे में आपके निर्णय कोई मायने नहीं रखते। किसी का ज्ञान सबसे अधिक मूल्यवान होता है। यही इस संस्कृति में अहम रहा है। तो, लक्ष्मण वहाँ जाकर खड़े हो गए और इस खुशी के साथ रावण की ओर देखने लगे कि वह वहाँ गंभीर रूप से घायल होकर पड़ा हुआ है। लक्ष्मण ने रावण के सिर के पास खड़े होकर कहा, ‘अरे, मुझे शहर के प्रशासन और निर्माण कला के बारे में कुछ बताओ।’ रावण ने अपना सिर दूसरी तरफ घुमा लिया।

लक्ष्मण वापस राम के पास गए और उनसे कहा, ‘उसने मुझसे बात करने से इनकार कर दिया।’ राम ने लक्ष्मण की ओर देखा और बोले, ‘तुम यहीं रहो।’ फिर राम स्वयं गए, रावण के पैरों की तरफ खड़े हो गए, उसे प्रणाम किया और बोले, ‘मैं वे सभी कलाएँ सीखना चाहता हूँ जो आप जानते हैं। चूँकि आप मर रहे हैं और मैं जीवित रहूँगा, आपका ज्ञान लोगों तक पहुँचाया जाना चाहिए और उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए।’ अतः, रावण ने नगर निर्माण और प्रबंधन की कला, कि यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि किसी राज्य में लोग कभी भूखे न मरें, और कई अन्य पहलुओं का संपूर्ण ज्ञान दिया।

आप जहाँ भी जाएंगे, वहाँ कुछ शानदार होगा और कुछ खराब होगा। आप जो चुनते हैं उसी से आपका निर्माण होता है।

राम ने उससे जो सीखा उसके लिए वे आभारी थे, और उस व्यक्ति को मारने के लिए उन्हें एक वर्ष तक पश्चाताप हुआ। आज हमें दुनिया में इसी की जरूरत है। यह अटल सिद्धांत नहीं चाहिए कि ‘आप गलत हैं - मैं सही हूँ, मैं अच्छा हूँ - आप बुरे हो।’ यह जीने का एक मूर्खतापूर्ण तरीका है। हर कोई गुण-दोष का एक मिश्रण है। यदि आप जानते हैं, तो आप गुण चुन सकते हैं। अगर आप नहीं जानते तो हो सकता है आप सारे दोष चुन लें। यहाँ तक ​​कि अगर आप आम के पेड़ से बस कैसा भी फल उठाकर खा लें तो हो सकता है कि आप कीड़े खा लें।

आपको पता होना चाहिए कि सबसे बढ़िया फल कैसे चुनें, नहीं तो आप सारी गलत चीजें चुन लेंगे। यह जीवन के हर पहलू के लिए सही है। आप जहाँ भी जाएंगे, वहाँ कुछ शानदार होगा और कुछ खराब होगा। आप जो चुनते हैं उसी से आपका निर्माण होता है। यदि आप सभी सही चीजें चुनते हैं जो आपके और आपके आस-पास के सभी लोगों के जीवन को बेहतर बनाती हैं, तो लोग आपको ‘मर्यादापुरुषोत्तम’ कहते हैं।

एक इंसान को सही चीजें चुनने के लिए क्या प्रेरित करता है? मैं ‘सही’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहता। ऐसा क्या है जो उसे उस चीज को चुनने के लिए प्रेरित करता है जो कारगर हो? नजरिए की स्पष्टता। आपको चीजों को उनके वास्तविक रूप में देखने में सक्षम होना चाहिए, न कि उस तरह जैसे आप उन्हें देखना चाहते हैं।