
आइए चलते हैं सद्गुरु के साथ एक खोज यात्रा पर – जहाँ वे हमारे कर्मों की जटिल संरचना को स्पष्ट कर रहे हैं। क्या कभी सोचा है कि कर्मों के बोझ का ये थैला जो हम लेकर चल रहे हैं उसमें पहला पत्थर कब और किसने डाला? आइए देखते हैं कर्मों के चित्र की परतें उधेड़कर, ताकि हमारे भाग्य को आकार देने वाले सत्य उजागर हो सकें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार सद्गुरु! अगर मैं अपने सारे कर्मों को पत्थरों से भरे एक थैले के रूप में देखूं तो जब यह खाली था, तब इसमें पहला पत्थर किसने डाला था?
सद्गुरु: ओह! तो आप इतने सारे पत्थर ढो रहे हैं? यदि आपके कर्म आपको पत्थरों से भरे थैले के समान लगते हैं तो ये दुख की बात है। आप फूलों से भरा एक थैला भी ढो सकते हैं और उनकी खुशबू का आनंद ले सकते हैं। वैसे पत्थर उपयोगी होते हैं , आप उनसे बहुत सारी चीजें बना सकते हैं। और अगर आप नहीं जानते कि क्या बनाना है तो आप अपने कर्मों के पत्थरों को दूसरों पर फेंक सकते हैं। मैं प्रतीकात्मक रूप से कह रहा हूँ।
पहले दिन से मैंने आपसे कहा है कि आप जिम्मेदार हैं और आप मुझसे पूछ रहे हैं कि पहला पत्थर किसने डाला। यह वैसा ही है, जैसे बहुत सारे लोग सोचते हैं कि ये बड़ा बुद्धिमत्ता भरा प्रश्न है कि पहले कौन आया मुर्गी या अंडा? क्या मैंने आपको बताया कि शंकरन पिल्लई ने क्या किया?
एक बार ऐसा हुआ कि शंकरन पिल्लई और उनके दोस्त एक रेस्तरां में पार्टी करने गए। एक बार जब युवा शराब पी लेते हैं, तो वह अपने कारनामों की लंबी चौड़ी कहानी सुनाने लगते हैं, जो उन्होंने कभी नहीं किया होता है। हर पैग के साथ वह कहानी लंबी और लंबी होती चली जाती है। यह एक मानव के महामानव बनने की कोशिश होती है, क्योंकि एक मानव होना उसके लिए काफी नहीं होता। यदि आप एक पर्याप्त मानव हैं तो आप अतिसाधारण होकर भी बहुत बढ़िया हो सकते हैं।
हमारे पुराने कार्यक्रम के पर्चों में लिखा होता था ‘साधारण से असाधारण।’ लोग पूछते थे सद्गुरु मैं असाधारण कैसे बनूंगा? क्या मुझमें कुछ बढ़ जाएगा? नहीं आप असाधारण हो जाएंगे - दूसरों से कहीं ज्यादा साधारण। ठीक वैसे ही जैसे जीवन बना था। मैंने कभी ‘विशेष’ बनाने को नहीं कहा, मैंने कहा ‘असाधारण।’
तो जैसे ही शराब का दौर शुरू होता है, लोग अधिक से अधिक विशेष बनना चाहते हैं, साधारण नहीं। वह बड़े से और बड़े होते जाते हैं, और फिर महान समझने लगते हैं। कई बार शराब के साथ सिर भी टकराने भी लगते हैं। इस दुनिया में बहुत सारी हिंसा केवल तब होती है जब लोग शराब पी लेते हैं, बातों से हिंसा, गाली गलौज और शारीरिक हिंसा। यह सब कुछ शराब के प्रभाव में होता है। क्योंकि वे सोचते हैं कि वह महामानव बन गए हैं। जो मात्र मानव नहीं है वे महामानव है। इसलिए वे चड्ढी बाहर पहनते हैं सुपरमैन की तरह। जब आप इतनी मूलभूत चीज भी नहीं जानते, तब आप मुसीबत में पड़ जाते हैं।
तो शंकरन पिल्लई अपने दोस्तों के साथ बाहर गया था। वह भूखा था। वह कुछ खाना चाहता था, पीना नहीं। तो वह बस वहाँ बैठा हुआ था। सभी शराब पी रहे थे और बातें कर रहे थे, उन सभी बड़ी-बड़ी चीजों के बारे में जो वे कर सकते थे। जब आप शारीरिक रूप से सभी बड़ी चीज कर चुके होते हैं, तब आप कुछ बौद्धिक रूप से महान करना चाहते हैं। तो किसी ने सवाल उठाया मुर्गी पहले आई या अंडा? मुर्गी या अंडा? एक बड़ा वाद-विवाद शुरू हुआ। शंकरन पिल्लई बस खाने का इंतज़ार कर रहे थे। तभी एक आदमी ने कहा, ‘अरे तुम्हारे साथ क्या समस्या है? क्या तुम्हारी कोई राय नहीं है कि मुर्गी पहले आई या अंडा?’ दूसरे आदमी ने कहा, ‘बताओ मुर्गी पहले आई या अंडा?’ शंकरन पिल्लै ने कहा, ‘तुमने जिसका आर्डर पहले दिया होगा वही पहले आएगा।’
तो पहले क्या आएगा पीड़ा या आनंद? जिसका आपने पहले आर्डर दिया होगा वही। पहला पत्थर किसने डाला? किसने आपको बोझ दिया? ऐसी कोई चीज नहीं है। आप क्या हैं और क्या नहीं यह गलतफहमी आपकी अपनी बनाई हुई है। पेड़ यह समझता है कि वह मिट्टी के साथ एक है। बिना उसके उसका अस्तित्व नहीं होगा। मानव जाति इस धरती पर सबसे बुद्धिमान मूर्ख है, जिसे यह बात समझ नहीं आती। मिट्टी पहले या मृत्यु? आप जिसे मिट्टी की तरह देखते हैं वह मानव सहित करोड़ों सूक्ष्मजीवों की मृत्यु है।
तो पहला पत्थर किसने डाला? हम आपके माता-पिता पर दोष मढ़ सकते हैं, क्योंकि उन्होंने आपके अस्तित्व में भागीदारी दी है। लेकिन उन्होंने भी केवल एक शरीर और थोड़ी सी याद्दाश्त दी है। इससे आप क्या बनाते हैं, यह पूरी तरह आपका निर्णय है। यदि आपके माता या पिता ने आपसे बुरा बर्ताव किया तो वे जो सबसे बेहतर जानते थे उसी के आधार पर उन्होंने ऐसा किया। अब आप जो सबसे बेहतर जानते हैं, उसके आधार पर आप अभी काम कर रहे हैं। आप जो कुछ जानते हैं उसे विभिन्न संभावनाओं के लिए विकसित होना होगा। केवल तभी आप उन्नत हो सकेंगे। अब आप अपने पिता को तो बदल नहीं सकते, इसके लिए अब देर हो चुकी है। यदि आप अपने पिता के बारे में बहुत कुछ जानते हैं और यह भी जानते हैं कि उनमें क्या गलत था, तो आपको उसके परे जाना चाहिए।
इस बात का कोई मतलब नहीं है कि पहले पत्थर किसने डाला या आपके साथ क्या गलत हुआ जिसकी वजह से आप अभी परेशानी भुगत रहे हैं। कोई पहला और आखिरी पत्थर नहीं होता। यह बस इतना ही है कि आपने जीवन को गलत समझ लिया है। आप व्यक्तित्व की अज्ञानता में डूबे हुए हैं। आप सोचते हैं कि आप बाकियों से अलग हैं, यही परेशानी है। हम कह सकते हैं कि यही पहला पत्थर है। आप न तो सचेतन होकर सांस ले रहे हैं, न पानी पी रहे हैं, न खाना खा रहे हैं, न जी रहे हैं। अभी हर वह चीज जो आप सोचते हैं कि आप हैं, आपके शरीर की हर एक कोशिका, आपने बाहर से इकट्ठी की है।
हर एक विचार ,शब्द और अक्षर जो भी आपके दिमाग में है, वह अपने बाहर से इकट्ठा किया है। यह सोचना कि आप बाकी अस्तित्व से अलग हैं, यह बुद्धिमत्ता नहीं पागलपन है। पागलपन का कारण ढूंढने की कोशिश मत कीजिए। यदि आप पागलपन में कारण ढूंढते हैं, तो आप एक निराशाजनक संभावना बन जाएंगे। पागलपन का मतलब है कि आपने सारे कारण पीछे छोड़ दिए हैं।
अभी आप कारणों को तोड़ने मरोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वह आपकी सहूलियतों के मुताबिक़ हो जाए और आपकी कोई जवाबदेही न रह जाए। जब आप कारण को फिर से स्थापित करते हैं, और उन्हें तोड़ना मरोड़ना बंद कर देते हैं, तो आप चीजों को वैसे ही देखना शुरू कर देंगे जैसी वह हैं। यदि आपके लिए संभव नहीं हो, तो कम से कम अपने भीतर जवाबदेही लाइए। यह समझिए कि आप इस वक्त जो भी हैं, वह आपका अपना निर्माण है। उस पत्थर को मत ढूंढिए जो किसी और ने आप में डाला है।
यदि आप चाहते हैं कि लोग आपके साथ अच्छी चीजें ही करें, तो आपको निराशा हाथ लगेगी। मैंने इतना लंबा जीवन जी लिया है कि मैं आपसे यह कह सकता हूँ। मेरे सारे दोस्त मर रहे हैं। एक बार एक 104 साल के बुजुर्ग व्यक्ति का स्थानीय मीडिया साक्षात्कार कर रही थी, तो उन्होंने पूछा, ‘104 साल का होने में सबसे अच्छी चीज क्या है?’ तो उन्होंने कहा, ‘साथियों का कोई दबाव नहीं होता।’
इससे फर्क नहीं पड़ता कि किसने क्या किया, आप जो इस वक्त हैं उसके लिए आपको शत प्रतिशत जवाबदेह होना चाहिए। यदि आप इस एक चीज को स्थापित कर लेते हैं तो आप सही दिशा में चलना शुरू कर देंगे। नहीं तो आप सारी जिंदगी एक चक्कर में घूमते रह जाएंगे, यह ढूंढते हुए कि गलती किसकी थी, आपके साथ यह किसने किया? जो कुछ भी, किसी ने आपके साथ किया, जो कुछ आप सोचते हैं कि अच्छा है, बुरा है, बदसूरत है - यह आपके जीवन में केवल तभी जुड़ता है जब आप समझदार होते हैं। चाहे लोगों ने आपके साथ खुशनुमा चीज़ें की हों या बुरी चीज़ें की हों, यदि आप यादों में खो नहीं जाते, यदि आप सचेतन हों, तो ऐसा कुछ भी जो किसी ने आपके साथ किया या नहीं किया उससे आप अपने जीवन को और समृद्ध बना सकते हैं।