लिंग भैरवी

देवी का घर-आगमन: तमन्ना भाटिया के अनुभव

हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया अपने भावुक अनुभव साझा कर रहीं हैं कि कैसे उनका लिंग भैरवी देवी के साथ एक पवित्र संबंध बन गया। चकाचौंध की दुनिया से अलग हटकर वे एक ऐसा अध्याय साझा कर रही हैं, जहाँ उन्होंने अपने रोजमर्रा के जीवन में पवित्रता का तत्व शामिल किया। यह परदे के पीछे छिपा हुआ एक अद्भुत पल है जब एक अभिनेत्री जिसे पर्दे पर अपने बदलावों के लिए जाना जाता है, उसने देवी को घर में और जीवन में आमंत्रित करके अपने भीतर बदलाव महसूस किया।

तमन्ना भाटिया: जब मैं बहुत छोटी थी तो मैं गणेश जी की मूर्तियां इकट्ठा किया करती थी, क्योंकि मुझे वे बहुत पसंद थे । जहाँ तक मुझे याद है मेरी माँ देवी की एक बड़ी भक्त रही हैं, हमेशा पूजा पाठ करती रही हैं। लेकिन मैं कभी भी पूजा घर में नहीं गई। मैं हमेशा काम पर रहती थी और जब मैं घर आती थी तो एक बच्चे की तरह प्रसाद का ही इंतजार करती थी, जिसका स्वाद दुनिया से परे होता था।

बाद में मैंने अनुभव किया कि सिनेमा में लोग अभिनेत्री को आदर्श मानते हैं। हमसे उन स्त्री-गुणों के चरम आदर्श को निभाने की उम्मीद की जाती है जो शायद जीवन से भी बड़े हैं। इस अनुभव ने मेरे मन में एक सवाल उठाया कि क्या मुझे सचमुच पता भी है कि यह स्त्री-गुण का चरम आदर्श है क्या?

जब मैं ईशा योग केंद्र आई और ध्यानलिंग का अनुभव किया तब मुझे एक ठहराव का एहसास हुआ। लेकिन जब आप लिंग भैरवी जाते हैं, तो वह प्रचंड हैं। यहाँ आपको ऊर्जा मिलती है जो बहुत ही संक्रामक है। मुझे हमेशा ही ऐसी तीव्रता की तलाश थी क्योंकि इसमें गरमाहट है, प्यार है, जुनून है। जब मुझे इन्हें अनुभव करने का मौका मिला तो मेरे अंदर एक मजबूत इच्छा उठी कि मैं लिंग भैरवी को अपने घर लाऊँ। और फिर यहाँ वह अवसर भी मौजूद है कि आप लिंग भैरवी यंत्र के जरिए खुद देवी को अपने घर में आमंत्रित कर सकते हैं।

अच्छी बात बात यह है कि यह केवल देवी को अपने घर लाने की बात नहीं है। यह खुद को और अपने घर को एक मंदिर बनाने जैसा है। इसकी दीक्षा बेशक एक रहस्य है, लेकिन हमें प्रक्रिया के बारे में अच्छे से समझाया गया था। हमें कुछ कर्मकांड दिए गए और साथ ही अनुभव भी। सद्‌गुरु जी के बारे में जो बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद है वह यह कि वे चीजों को बहुत स्पष्टता के साथ समझाते हैं। खास तौर पर हमारी पीढ़ी, जो हमारी संस्कृति से लाभ उठाने के साथ उसे गहराई से समझना भी चाहती है कि उससे हमें क्या मिलता है।

अच्छी बात बात यह है कि यह केवल देवी को अपने घर लाने की बात नहीं है। यह खुद को और अपने घर को एक मंदिर बनाने जैसा है।

उदाहरण के लिए सद्‌गुरु हमेशा ही लिंग भैरवी यंत्र को एक तरह की टेक्नोलॉजी, यहाँ तक कि ‘मशीन’ भी कहते हैं। इससे हमारे लिए उनके उद्देश्य और महत्व को समझना आसान हो जाता है। इनके साथ क्या करना है, क्यों करना है, और कैसे करना है, इसे सीखना बहुत ज्ञान-वर्धक रहा। मुझे लगता है एक नतीजा हासिल करने के लिए यह अधिक महत्वपूर्ण है कि तरीकों को अच्छी तरह समझकर उनका पालन किया जाए, बजाए इसके कि हम उसे अपने तरीके से करने की कोशिश करने लगें। यह बहुत सुंदर बात है कि हर कोई इसे समझ सकता है कि कैसे लिंग भैरवी देवी की कृपा को प्राप्त किया जा सकता है। यह कुछ खास लोगों तक ही सीमित नहीं है।

मुझे लिंग भैरवी यंत्र के बारे में जो बात सबसे ज्यादा पसंद आई, वह यह कि जब आप उन्हें एक बार घर ले आते हैं तो आप उनकी कृपा को सबके साथ बांटते हैं। साथ ही आप उस ऊर्जा-रूप के साथ एक व्यक्तिगत संबंध भी बनाते हैं। मैं सोचती हूँ मेरे लिए सबसे ज्यादा दिलचस्प रहा इन सारे पहलुओं को समझना।

आखिरकार मुझे अवसर मिला कि मैं अपनी लिंग भैरवी देवी का अभिषेक कर सकूँ। अभिषेक करने के बाद आपके भीतर ऊर्जा जो ऊपर की तरफ उठती है, वह अद्वितीय है। मैं सबसे ज्यादा उत्साहित इसलिए थी क्योंकि यह केवल देवी को घर लाने की बात नहीं थी, बल्कि उनके गुणों को खुद में शामिल करने की और वही बन जाने की बात थी। क्योंकि हम जिसे आदर्श मानते हैं, वह बन जाना चाहते हैं। मैं आशा करती हूँ कि मैं उन गुणों को अपने में शामिल कर सकूं और उनका एक प्रतिबिंब बन सकूं, यदि ऐसा संभव हो तो।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कोई धार्मिक अनुष्ठान करने वाली इंसान हूँ। लेकिन यह कर्मकांड बस कर्मकांड नहीं हैं। मेरे जैसे लोगों के लिए जिन्होंने कभी कर्मकांड नहीं किया, उनके लिए यह समझना जरूरी है कि कर्मकांड किसी चीज को करने की एक महज एक प्रक्रिया है। यह कुछ वैसा ही है जैसे हम किसी खास मशीन का इस्तेमाल करते हैं तो हमेशा एक तय प्रक्रिया को अपनाना पड़ता है। कभी-कभी हम प्रक्रिया को बस इसलिए अपनाते हैं क्योंकि यह हमारा मनचाहा परिणाम देती है।

इसी तरह मुझे लगता है कि ये कर्मकांड भी वैज्ञानिक तरीके हैं जो बहुत-बहुत साल पहले बनाए गए और सद्‌गुरु जी इन्हें सबसे ज्यादा समझने योग्य, आसान तरीकों से हर एक की पहुंच में लाने लायक बना रहे हैं। और देवी की कृपा हर किसी पर क्यों नहीं होनी चाहिए?

मुझे लगता है की देवी की शक्ति मेरे जीवन में ज्यादातर अनजाने रूप में हमेशा से ही रही है। हर बार जब मैं लिंग भैरवी या किसी और देवी स्थान में जाती रही हूँ, तब मैं हमेशा ही उन चीजों को करने की शक्ति और साहस के साथ वापस आई हूँ जिन्हें करने से मैं हमेशा डरती रहती थी। मैं महसूस करती हूँ कि वह सारा डर ले लेती हैं, असफलता का डर, मृत्यु का डर, जीवन का डर, हर चीज का डर। मैंने देखा है कि मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ है कि जब भी मैं किसी ऐसे शक्ति स्थान में रही हूँ, अचानक ही मेरे भीतर डर को जीतने की काबिलियत पैदा हो जाती है। मुझे यह अच्छा लगता है। यह डर को दूर ले जाता है।

मैं बहुत भाग्यशाली रही हूँ कि मुझे उस असीम प्रेम और कृपा का अनुभव मिला जो देवी ने मुझे दिया है।

मुझे दिलचस्प बात यह लगती है कि देवी हमेशा वहाँ रहती हैं जहाँ उनकी देखभाल की जाती है, हर जगह नहीं। हम सभी उसी जगह रहना चाहते हैं जहाँ हमारी देखभाल की जाती है। तो देवी के लिए वातावरण का निर्माण करना बहुत खूबसूरत है, क्योंकि जब आप ऐसा कर रहे होते हैं तो आप खुद के लिए भी वातावरण का निर्माण कर रहे होते हैं।

मैं सोचती हूँ कि एक स्त्री होने के बहुत सारे पहलू हैं, जिन्हें समझना चाहिए। मैंने हमेशा घर में एक बच्चे की तरह महसूस किया है, लेकिन अब जबकि मेरे पास लिंग भैरवी देवी हैं, मैं स्त्री की तरह महसूस करती हूँ और मैं वह जिम्मेदारी लेने जा रही हूँ। यह मेरे जीवन का हिस्सा बनने जा रहा है। मुझे नहीं मालूम कि यह कैसे काम करता है, लेकिन मैं देवी से जुड़ाव महसूस करती हूँ।

मैं बहुत भाग्यशाली रही हूँ कि मुझे उस असीम प्रेम और कृपा का अनुभव मिला जो देवी ने मुझे दिया है। अपने जीवन में मैंने हमेशा वह चीज पाई है जिनकी मैंने कभी अपेक्षा भी नहीं की थी, और मैं जानती हूँ यह सब कुछ देवी की कृपा से ही होता है।

लिंग भैरवी यंत्र की दीक्षा की प्रक्रिया बहुत अधिक शक्तिशाली थी। हम सभी को सद्‌गुरु जी ने दीक्षा दी। लिंग भैरवी स्तुति को बार-बार जपते हुए आप अपने भीतर ऊर्जा का उत्थान अनुभव कर सकते हैं। लेकिन मेरे लिए वह अभिषेक (एक खास तरह का कर्मकांड) था, जिसने कुछ अलग ही किया। जब आप अपने लिए कोई प्रक्रिया करते हैं और आपके पास खुद का देवी यंत्र होता है, तो यह बिल्कुल अलग अनुभव होता है। क्योंकि यहाँ बस आप और आपके इष्ट हैं। यह सचमुच बहुत अंदरूनी अनुभव था और मुझे लगा कि मैं अब देवी को घर लाने के लिए तैयार हूँ।

दीक्षा प्रक्रिया बहुत सुंदर थी। सद्‌गुरु जी कहते हैं कि वह इस धरती के हर एक स्थान को प्राण-प्रतिष्ठित कर देना चाहते हैं। मैं सोचती हूँ यह अद्भुत विचार है। केवल वे लोग जो प्राण-प्रतिष्ठित स्थान पर जा चुके हैं, वही समझ सकते हैं कि ऐसे किसी स्थान पर होना कितना शक्तिशाली होता है।