घटनाक्रम

सद्‌गुरु के कार्यक्रम

सैन फ्रांसिस्को में बड़े टेक सम्मेलन में सद्‌गुरु ने AI की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की

17–18 सितंबर

जब सद्‌गुरु को सैन फ्रांसिस्को में सेल्सफोर्स के सालाना कार्यक्रम ड्रीमफोर्स में बतौर मेहमान वक्ता बुलाया गया तो लोगों ने तीन महीने बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से उन्हें देखा। सद्‌गुरु ने दो अलग सत्रों में अपने विचार साझा किए, जिसमें टेक्नोलॉजी और समाज पर उसके प्रभाव पर बातचीत हुई।

पहले सत्र में, अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की CEO डॉ. करेन नुडसन ने सद्‌गुरु और संचालक मॉली क्यू. फोर्ड के साथ स्वास्थ्य सेवा और समाज में AI के फायदों और चुनौतियों पर बात की। डॉ. नुडसन ने कैंसर देखभाल में AI की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, ‘अच्छे काम के लिए AI जिंदगियां बेहतर बनाता है।’ सद्‌गुरु ने AI के व्यापक प्रभावों के बारे में सावधान करते हुए कहा, ‘हम बदलाव लाने वाली टेक्नोलॉजी पर इतना ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इंसान का रूपांतरण ज़्यादा जरूरी है।’ उन्होंने कहा, ‘AI सिर्फ अच्छा नहीं, अगर आप इसे सही तरीके से इस्तेमाल करें तो यह अद्भुत है। सही हाथों में - अद्भुत। गलत हाथों में - भयानक।’ इस तरह उन्होंने AI के विकास में संतुलन की जरूरत पर जोर दिया।

टेक्नोलॉजी और व्यक्तिगत विकास के बीच संबंध पर अपना नजरिया बताते हुए सद्‌गुरु ने बाद में ट्वीट किया: ‘रूपांतरण लाने वाली टेक्नोलॉजी ठीक है, लेकिन इंसान का रूपांतरण सबसे ज़्यादा जरूरी है।’ - सद्‌गुरु

दूसरे दिन ऑस्कर विजेता अभिनेता मैथ्यू मैकॉनहे, प्रसिद्ध प्राइमेटोलॉजिस्ट डॉ. जेन गुडॉल और सद्‌गुरु ने ‘मकसद के साथ नेतृत्व, विरासत का निर्माण’ नाम से एक दिलचस्प बातचीत की। उन्होंने चर्चा की कि कैसे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पर्यावरण और समाज पर असर बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को मजबूत बनाने के लिए किया जा सकता है।

वानरों के अध्ययन से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग तक, उनके विचारों के बारे में आप और जानना चाहते हैं? हमारे लेख में इस चर्चा के बारे में ज्यादा जानें: ‘पेड़ों से लेकर एआई तक - मानव सभ्यता का भविष्य क्या होगा’

लंबे समय से प्रतीक्षित दर्शन: iii में सद्‌गुरु का आत्मज्ञान दिवस

23 सितंबर

23 सितंबर 2024 को, टेनेसी में स्थित ईशा इंस्टीट्यूट ऑफ इनर-साइंसेज (iii) में उत्साह का माहौल था। साधक सद्‌गुरु के आत्मज्ञान दिवस पर विशेष दर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे। यह बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम नवंबर 2023 के बाद से iii में सद्‌गुरु का पहला दर्शन था। हजारों लोग वहाँ मौजूद थे, जबकि दुनिया भर के साधक लाइवस्ट्रीम के जरिए जुड़े।

जैसे ही सद्‌गुरु पहुंचे, भक्ति की एक लहर सभा में दौड़ गई, जिसे आसानी से महसूस किया जा सकता था। उनकी मौजूदगी से महिमा हॉल के सामने की जगह को भर दिया, जहाँ साधक खुशी भरे दिल से बैठे थे। अपनी खास शैली में मजाक और ज्ञान के साथ, उन्होंने ज्ञान की प्रकृति और आज के समय में सचेतन जीवन जीने के महत्व जैसे गहरे विषयों पर बात की।

सबके मन में जो सबसे बड़ी चिंता थी, उसका जवाब देते हुए सद्‌गुरु ने अपने हाल ही के स्वास्थ्य और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने के समय के बारे में खुलकर बताया। हमारा लेख ‘कैसे बीते सद्‌गुरु के पिछले कुछ महीने: जानिए सद्‌गुरु के शब्दों में’ उनके अनुभवों की एक झलक पेश करता है।

सद्‌गुरु ने एक योग-शहर के लिए अपना नजरिया भी साझा किया, जिसमें उन्होंने आध्यात्मिक विकास और चेतना को बढ़ावा देने वाली जगहों की जरूरत पर जोर दिया। शाम का एक और मुख्य आकर्षण साउंड्स ऑफ ईशा के ‘अलख निरंजन’ म्यूजिक वीडियो [o02] का पहला प्रदर्शन था, जिसमें राधे द्वारा एक मंत्रमुग्ध करने वाला भरतनाट्यम् प्रदर्शन था जिसने कहानी को सुंदर ढंग से जीवंत कर दिया।

जैसे-जैसे दर्शन समाप्त हुआ, कई लोगों की आँखें आँसुओं से भर गईं और दिल कृतज्ञता से उमड़ रहे थे। यह अनुभव वहाँ मौजूद लोगों और ऑनलाइन भाग लेने वालों दोनों ने साझा किया।

सद्‌गुरु और अमेरिकी सर्जन जनरल ने डिजिटल युग की अकेलेपन की समस्या पर चर्चा की

28 सितंबर

28 सितंबर 2024 को हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में ‘अकेलापन: अंदर जाना ही एकमात्र रास्ता है’ नाम से एक विचारोत्तेजक बातचीत हुई। इसमें अमेरिकी सर्जन जनरल डॉ. विवेक मूर्ति और सद्‌गुरु ने हमारी डिजिटल दुनिया में बढ़ते अकेलेपन की समस्या पर चर्चा की। इस बातचीत में अकेलेपन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर, सच्चे मानवीय संबंधों की अहमियत, और जीवन में तृप्ति के बारे में बात की गई।

डॉ. मूर्ति ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सामाजिक संबंधों के प्रभाव पर जोर दिया, जबकि सद्‌गुरु ने अपनी तंदुरुस्ती बनाए रखने में व्यक्तिगत जिम्मेदारी की बात कही। दोनों ने हमारी जिंदगी में टेक्नोलॉजी की चुनौतियों पर बात की। डॉ. मूर्ति ने मानवीय संबंधों को फिर से मजबूत बनाने पर ध्यान दिया, जबकि सद्‌गुरु ने टेक्नोलॉजी के सोच-समझकर इस्तेमाल पर जोर दिया। 

इस बारे में और जानकारी के लिए, हमारा लेख दबे पांव फैल रही यह महामारी: अकेलेपन की समस्या पर अमेरिकी सर्जन जनरल और सद्‌गुरु के बीच संवादपढ़ें।