
ड्रीमफोर्स 2024 में, ऑस्कर विजेता मैथ्यू मैकोनहे, संरक्षण की आइकॉन डॉ. जेन गुडॉल डीबीई, और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जैसी अनोखी तिकड़ी मंच पर एक साथ आई। इन तीनों के बीच क्या साझा हो सकता है? यह कुछ और नहीं, बल्कि बदलाव लाने का एक दृष्टिकोण और स्थायी प्रभाव डालने की प्रतिबद्धता थी, जो उन्होंने साझा की।
सेल्सफोर्स के प्रमुख एआई कार्यक्रम में उन्होंने इस बारे में अपनी अंतर्दृष्टि साझा की कि कैसे तकनीक, पर्यावरण संबंधी कार्य, और सशक्त युवा एक उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। यहाँ उनकी बातचीत का एक अंश दिया गया है।
मॉडरेटर: जब मुझे पहली बार इस पैनल को मॉडरेट करने का काम मिला, तो मैंने सोचा, ‘एक प्राइमेटोलॉजिस्ट, एक पुरस्कार विजेता हॉलीवुड अभिनेता, और एक प्रसिद्ध गुरु के बीच क्या समान हो सकता है?’ पता चला, बहुत कुछ!
ये सभी बेस्टसेलिंग लेखक हैं। ये सभी बड़ी फिल्मों में रह चुके हैं। वे सभी अपने काम के लिए साल में कम से कम आठ महीने सड़क पर होते हैं। यह एक मजेदार संवाद होने वाला है।
मॉडरेटर: इस सत्र का शीर्षक है ‘उद्देश्य के साथ नेतृत्व करना।’ मैं आप सभी से जानना चाहूंगा, आपके लिए उद्देश्य से नेतृत्व करने का क्या मतलब है?
डॉ. जेन गुडॉल: सच कहूँ तो, अगर आपके पास उद्देश्य न हो, तो मेरा मानना है कि आप नेतृत्व नहीं कर सकते।
मॉडरेटर: सहमत हूँ!
मैथ्यू मैकोनहे: हाँ, सही कहा!
खुशी की जो भी परिभाषा हम दें, उसका एक सामान्य तत्व है सुबह बिस्तर से उठने का एक कारण होना। जब हमारे पास एक उद्देश्य होता है, कुछ ऐसा जो हम बना रहे हैं, तो हम महसूस कर सकते हैं कि वह बढ़ रहा है, एक बड़ी तस्वीर के रूप में देखें तो अपने पूरे जीवनकाल में उसे बढ़ते देखना और फिर उम्मीद होती है कि हमारे बाद आने वाले लोगों के लिए कुछ पीछे छोड़ कर जाएँगे।
सद्गुरु: हर जीवन का उद्देश्य अपनी पूर्णता को पाना है। यह हम सभी के अपने-अपने उद्देश्य के साथ आने के बारे में नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि कैसे हम कुछ ऐसा करें जो हर जीवन की आकांक्षा को पूरा करे। इसलिए आप उद्देश्य के साथ नेतृत्व नहीं करते। एक बार जब आप अपनी यह पहचान कर लेते हैं कि आप क्या करना चाहते हैं, तो वह उद्देश्य आपका नेतृत्व करता है।
मॉडरेटर: यह बहुत सुंदर है।
डॉ. जेन गुडॉल: जब मैं छोटी थी, मैंने अफ्रीका जाकर जंगली जानवरों के साथ रहने और उनके बारे में किताबें लिखने से शुरुआत की। हर कोई मुझ पर हंसता था। लोग मुझे कहते थे कि लड़कियाँ ऐसा नहीं कर सकतीं।
खैर, जैसा कि आप में से कई लोग जानते हैं, मैं अफ्रीका पहुंची। मुझे न सिर्फ किसी जानवर के साथ रहने और उनसे सीखने का मौका मिला, बल्कि वह जानवर जो हम लोगों से बहुत समान है – चिम्पांजी, उनके बारे में सीखने में मैंने कई अद्भुत साल बिताए।
मैं कॉलेज नहीं गई थी क्योंकि हम इसका खर्च नहीं उठा सकते थे, लेकिन मेरे मेंटर ने कहा कि मुझे डिग्री लेनी होगी। मुझे पीएचडी करनी होगी। और उन्होंने मुझे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एक जगह दिलाई। कल्पना कीजिए कि मुझे कैसा लगा जब मुझसे कहा गया, ‘वे सिर्फ जानवर हैं। आप उनके व्यक्तित्व, मन और भावनाओं के बारे में बात नहीं कर सकतीं। ये केवल इंसानों के लिए हैं।’ उस समय विज्ञान द्वारा यही सिखाया जाता था।
चिम्पांजी हमारे जैसे ही हैं क्योंकि वे चूमते हैं, गले लगाते हैं, हाथ पकड़ते हैं। नर चिम्पांजी अपने प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। उनका एक आक्रामक, क्रूर पक्ष भी होता है। लेकिन हमारी तरह उनका एक कोमल पक्ष भी होता है - प्यार, करुणा और सच्चा परोपकार। धीरे-धीरे चिम्पांजियों की वजह से विज्ञान बदल गया है। अब हम जानते हैं कि पेड़ संवाद कर सकते हैं।
फील्ड स्टडी-साईट का दौरा करते हुए, मैंने चिम्पांजी आवास में और उसके आसपास रहने वाले लोगों की दुर्दशा के बारे में जाना - भयंकर गरीबी, अच्छी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की कमी, अत्यधिक उपयोग की गई और अनुपजाऊ कृषि भूमि। और इसलिए हमने एक बहुत ही समग्र कार्यक्रम, TACARE शुरू किया।
जंगली क्षेत्रों में, गरीबी में रहने वाले लोग अपने पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं। लेकिन शहरी क्षेत्रों में लोग सबसे सस्ता जंक फूड खरीद रहे हैं क्योंकि वे केवल उसी को खरीद सकते हैं, और वह भोजन भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है - इसीलिए यह सस्ता होता है।
हमने महसूस किया कि अगर युवा पर्यावरण की रक्षा की आवश्यकता को नहीं समझ रहे हैं, तो कहीं हमें हार न माननी पड़े। फिर हमने अपना कार्यक्रम ‘रूट्स एंड शूट्स’ शुरू किया, जो नीचे से ऊपर की ओर बढ़ता है। युवा एक साथ आते हैं और लोगों, जानवरों, पर्यावरण के लिए दुनिया को बेहतर बनाने के लिए परियोजनाएं चुनते हैं।
मैथ्यू मैकोनहे: अगर युवा पीढ़ियाँ अलग तरह से सोच रही हैं, और अपने दिमाग और दिल में अलग तरह से समझ रही हैं, तो यह हमारे जीने के तरीके को बदल देगा।
कैमिला और मैंने 'जस्ट कीप लिविन' फाउंडेशन की शुरुआत अमेरिका के टाइटल-I स्कूलों में एक पाठ्यक्रम के रूप में की। वहाँ 50 प्रतिशत ड्रॉपआउट दर और फूड स्टैम्प्स हैं, और हमने एक कार्यक्रम शुरू किया जहाँ ये बच्चे स्कूल के बाद जा सकते हैं। इसमें पोषण का लक्ष्य भी शामिल है।
सद्गुरु: बुनियादी चिंता मानव जाति की है। अगर इंसान खुद को अच्छी तरह से ट्यून (समायोजित) कर ले, तो वह सबसे बड़ा समाधान है। अगर वह ठीक से ट्यून नहीं है, तो वह न केवल अपने जीवन के लिए बल्कि हर दूसरे जीवन के लिए सबसे बड़ी समस्या है।
इस धरती पर हर दूसरा जीव हमारी वजह से पीड़ित है। यह कोई पर्यावरण का पाठ नहीं है - यह एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है। जिसे हम आध्यात्मिक प्रक्रिया कहते हैं, वह यह है कि आप अपने शारीरिक अनुभव और पहचान की सीमाओं से परे जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम बड़ी और अधिक बड़ी समस्याएँ पैदा करेंगे क्योंकि हमारी बुद्धि हमारी पहचान और अनुभवों के अनुसार काम करती है।
हम अपने अनुभव से जानते हैं कि अगर हम साँसों का लेन-देन नहीं करें, तो हम यहाँ दो मिनट से ज्यादा नहीं बचे रहेंगे। 1998 में, कुछ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने भविष्यवाणी की थी कि 2025 तक, दक्षिणी भारत के 60 प्रतिशत हिस्से को मरुस्थलीकरण का सामना करना पड़ेगा।
भविष्यवाणियाँ इस बात पर विचार नहीं करतीं कि मानव हृदय में क्या धड़क रहा है। इसलिए हमने प्रोजेक्ट ग्रीनहैंड्स शुरू किया। इस राज्य में औसत हरित आवरण 16 प्रतिशत था, लेकिन राष्ट्रीय आकांक्षा 33 प्रतिशत थी। मैंने एक हिसाब लगाया कि अगर हम इस राज्य में 114 मिलियन पेड़ लगाते हैं, तो हमारे पास 33 प्रतिशत हरित क्षेत्र होगा।
हम सभी उपभोग करते हैं, लेकिन हम सभी क्षति को पूरा करने वाली गतिविधि करने के लिए तैयार नहीं हैं। मैंने लोगों को एक पेड़ के नीचे बैठाकर साँस लेने को कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से देखा, ‘जो मैं छोड़ता हूँ, पेड़ उसे अंदर लेता है। जो पेड़ छोड़ता है, मैं उसे अंदर लेता हूँ।’ एक बार जब वे इसका अनुभव कर लेते हैं, तो आप उन्हें पेड़ लगाने से नहीं रोक सकते। पिछले हफ्ते, हमने उस क्षेत्र में 114 मिलियन जीवित पेड़ों का लक्ष्य पूरा कर लिया।
हमने कावेरी कॉलिंग अभियान में एक नदी को चुना, जिसका नदी बेसिन क्षेत्र 83,000 वर्ग किलोमीटर है। इस नदी को फिर से उसी प्रवाह में बहाने के लिए 2.42 अरब पेड़ों की आवश्यकता है।
इस धरती पर जीवन एक अद्भुत घटना, जिसे प्रकाश संश्लेषण कहा जाता है, द्वारा बना हुआ है। 1000 साल पहले की तुलना में, आज केवल 15 प्रतिशत हरित आवरण बचा है। इसका मतलब है कि केवल 15 प्रतिशत प्रकाश संश्लेषण चालू है।
इस पल से ही आप इस धरती पर जो एक हरी पत्ती बढ़ाते हैं यानी एक पौधा लगाते हैं, वह जलवायु को ठीक करने की दिशा में एक छोटा कदम होगा।
मॉडरेटर: हम यहाँ देश के सबसे बड़े एआई सम्मेलन में हैं। और मैं सोच रहा हूँ कि आप अपने काम में एआई के बारे में कैसे सोच रहे हैं, और आपको क्या लगता है कि मनुष्य और मशीनें दुनिया में एक साथ कैसे रह सकते हैं। थोड़ा बताइए कि इसके बारे में आपकी क्या चिंताएँ हैं, और हम किस बारे में आशावादी हो सकते हैं?
डॉ. जेन गुडॉल: मैं कई तरीकों के बारे में सोच सकती हूँ जिनसे एआई दुनिया को बेहतर बना सकता है। हालाँकि, मेरी चिंताएँ भी हैं कि यह गलत हाथों में न पड़ जाए। बस यही डर है। एआई, हर चीज की तरह एक उपकरण है, और उपकरण का उपयोग अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है। जब यह अच्छे हाथों में होता है, तो शानदार चीज है। लेकिन यह हमेशा अच्छे हाथों में नहीं होता। क्या एआई इस सवाल का जवाब दे सकता है कि हम इसे बुरे हाथों से कैसे दूर रखें?
सद्गुरु: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एक जबरदस्त सशक्तीकरण है। हम उस दहलीज पर हैं जहाँ से मानव खुद को अतिमानव बनाने के लिए कदम बढ़ा सकता है। किसी भी चीज के साथ सुपर होना केवल तभी अच्छा है जब हमारे इरादे और पहचान सबको शामिल करने वाले हों। देशों, संगठनों, राजनीतिक दलों के बीच, जब हम एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते, तो निश्चित रूप से बहुत सारी उथल-पुथल होगी। लेकिन आप तकनीक को रोक नहीं सकते।
जिस गति से यह विशेष तकनीक आगे बढ़ेगी, लोगों के लिए इससे तालमेल बैठाने का समय बहुत कम होगा, इसलिए काफी गंभीर साइड-इफेक्ट होंगे। लेकिन हमें कुछ करुणामय हृदय और हर चीज के प्रति एक समावेशी नजरिए के साथ इस प्रभाव को कम करना चाहिए। हम जो भी सोचते हैं वह सार्वभौमिक होना चाहिए। अन्यथा, हम एक बहुत बड़ी विनाशकारी शक्ति बन जाएंगे।
मैथ्यू मैकोनहे: एआई के दोनों तरह के परिणाम होंगे। इसे अत्याचारियों और बुरे लोगों के हाथों से दूर रखने का कोई तरीका नहीं है। मैं बस आशा करता हूँ कि यह ज्यादातर अच्छे हाथों में रहे।
लेकिन कुल मिलाकर, मैं उत्साहित और आशावादी हूँ। समय के साथ समाज में बड़े बदलाव आए हैं। देखते हैं हम क्या बनाते हैं, क्योंकि हम अपनी ही एक छवि बना रहे हैं।
सद्गुरु: विकास प्रक्रिया ने जो सबसे सुंदर चीज पैदा की है वह है मानव मन। लेकिन आज, मानव मन उन अधिकांश दुखों का आधार है जिनसे मनुष्य गुजरते हैं।
एआई हमारे अपने ही मन का एक सुपर विस्तार होने वाला है। हमें इसे ध्यान से देखने की जरूरत है। आप इसे तनाव, चिंता, उदासी, या कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन मूल रूप से, हमारी अपनी बुद्धिमत्ता ही हमें परेशान कर रही है। जो एक चमत्कार था वह दुख बन गया है। इसलिए एक बार फिर, यह महत्वपूर्ण है कि मानव सीखे कि इसे एक चमत्कार कैसे बनाया जाए।
जैसे-जैसे ये रूपांतरणकारी तकनीकें सामने आ रही हैं, यह बेहद जरूरी है कि हम व्यक्तिगत स्तर पर मानव-रूपांतरण पर ध्यान दें। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो जो हम बनाते हैं वह हमारे खिलाफ हो जाएगा, इसलिए नहीं कि तकनीक बुरी है - बस इसलिए कि हम नहीं जानते कि इसे कैसे संभालना है।
मॉडरेटर: हाँ, मैं सहमत हूँ। हमने सुना कि एआई एक उपकरण, एक दर्पण, और हमारा एक विस्तार है। मुझे बहुत उम्मीद है कि यह सुंदर होगा। और हमें इसमें इरादे, समावेश और सार्वभौमिकता के साथ प्रवेश करना होगा। बहुत-बहुत धन्यवाद।