
अपनी कुशलता और प्रभाव को लगातार बढ़ाने की होड़ में हम अपने भीतर की जन्मजात प्रतिभा को पोषित करने की कला को भूल ही गए हैं। इस धरती पर ऐसे-ऐसे तेजस्वी मानव पैदा हुए हैं जिन्होंने मानव क्षमता की परिभाषा ही बदल दी। प्रतिभा की चिंगारी और बौद्धिक आतिशबाजी की कृपा के लिए लिंग भैरवी की भक्ति में आपका स्वागत है। यदि आपहर स्तर पर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो पढ़िए आगे।
यह एक ऐसी भूमि और संस्कृति है जो मानव इतिहास में सबसे लंबे समय तक समृद्ध और सफल रही है, जिसका आधार संगठनात्मक कौशल नहीं बल्कि व्यक्तिगत प्रतिभा रहा है। हमने कई महामानव दिए हैं, ऐसे मानव जिनसे देवता भी ईर्ष्या करें।
हमने जो कुछ भी उपलब्धि हासिल की है, उसकी सफलता हमेशा पूरी तरह खुले दिमाग से आई है, क्योंकि हमने यह समझ लिया है कि जीवन कैसे अपने सर्वोत्तम रूप में पहुंचता है।
मानव प्रतिभा के इस विकास में, जिस ऊर्जा-रूप को हम देवी भैरवी कहते हैं, वह मानव में सभी प्रकार की क्षमताओं को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण साधन हैं। कोई भी मानव, चाहे अतीत का रहा हो या वर्तमान का, जो कुछ भी जानता है, वह आपके लिए ज्ञान का जीवंत स्रोत बन सकता है, अगर आप अपने भीतर कुछ खिड़कियां खोल लें।
आप अपनी अनुभूति की दुनिया में अलग-अलग द्वार खोल सकते हैं, जहाँ जीवन के कई पहलू जो अलग-अलग लोगों में ज्ञान के छोटे-छोटे हिस्सों में निवेशित थे, वे आपके लिए सुलभ हो जाते हैं। अगर ये हिस्से एक साथ आ गए, तो मानवता के लिए कुछ और घटित होगा। अगर यह ज्ञान किसी एक इंसान में एक साथ आ जाए, तो उसके आस-पास जो कुछ भी होगा वह अविश्वसनीय और शानदार होगा। यही देवी भैरवी की क्षमता है।
इस आयाम तक पहुंचने के लिए, हम जटिल और सूक्ष्म तरीक़े बना सकते हैं जिन्हें तीव्र मानसिक ध्यान और ऊर्जावान क्षमता की आवश्यकता होगी। लेकिन सबसे आसान तरीका है पूर्ण भक्ति का। भक्ति एक शक्तिशाली साधन है जो, आप स्वयं को जो कुछ भी मानते हैं, उसे विलीन कर देती है।
भक्ति का उद्देश्य स्वयं को विलीन कर देना है। यदि आप वह सब विलीन कर दें जो आप अपने आप को मानते हैं - आपकी पसंद और नापसंद, नफरत और प्रेम - तो आप जीवन को वैसा ही देख, महसूस और अनुभव कर सकते हैं जैसा वह है, और आप उनकी कृपा के लिए उपलब्ध हो जाएंगे।
जिन्हें यह कृपा मिल जाए, वे ऐसे जीवन जिएँगे कि दूसरों को लगेगा कि वे महामानव हैं। यह महामानव होने के बारे में नहीं है। यह यह महसूस करने के बारे में है कि मानव होना ही अद्भुत है। इस संस्कृति में, कोई महामानव नहीं है, केवल मानव हैं जो देवतुल्य बनने की ओर बढ़ रहे हैं। वे सामान्य मानव ही थे जिनका जन्म आपकी और मेरी तरह ही हुआ, जीवन की सभी परीक्षाओं और कष्टों से गुजरे, फिर भी एक ऐसे स्थान तक पहुँचे जहाँ सबने उन्हें ईश्वरीय रूप में देखा।
लिंग भैरवी आपको जीवन से भर देंगी - इस हद तक कि अगर आपको आज मरना पड़े, तो आप स्वेच्छा से मरेंगे। ऐसा नहीं कि आप मरना चाहते हैं। आप इसलिए नहीं जी रहे क्योंकि आप जीना चाहते हैं बल्कि इसलिए क्योंकि आप खुद को अच्छी तरह रखते हैं। आपको इच्छा से नहीं बल्कि क्षमता से सफलता मिलती है।
देवी भैरवी ऐसी ही हैं - उन्हें परवाह नहीं है कि आपकी इच्छाएं क्या हैं। वह देखती हैं कि आपको इस जीवन और उससे परे के लिए कैसे सक्षम बनाया जाए, और यही महत्वपूर्ण है।